भारतीय स्टॉक मार्केट में इस साल भारी गिरावट देखने को मिली है। हालांकि इसने ग्लोबल मार्केट की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इस तरह के गिरते बाजार में तमाम निवेशक इस उम्मीद में खराब क्वालिटी के स्टॉक में टिके रहते हैं कि इनमें मार्केट रिकवर होने पर सुधार होता दिखेगा। गिरावट में खरीद करने वाले कुछ निवेशक मार्केट करेक्शन में भारी मार खाए खराब क्वालिटी के शेयरों में खरीदारी करने की गलती करते हैं।
बाजार जानकारों का कहना है कि निवेशकों को बाजार में आने वाले किसी भी करेक्शन का इस्तेमाल अपने पोर्टफोलियो में शामिल खराब क्वालिटी के स्टॉक से छुटकारा पाने के लिए करना चाहिए और करेक्शन में अच्छे क्वालिटी के शेयरों को पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहिए।
Tradingo के फाउंडर पार्थ न्याति का कहना है कि भारतीय बाजारों ने हाल में आई गिरावट में अपने ग्लोबल पीयर्स की तुलना में काफी अच्छी मजबूती दिखाई है। इसके बावजूद हमारा मानना है कि निवेशकों को ऐसी कंपनियों से दूर रहना चाहिए जिनके फंडामेंटल्स कमजोर हैं। इसके अलावा निवेशकों को पेनी स्टॉक्स और ओवरवैल्यूड और खबरों पर आधारित स्टॉक्स से भी दूर रहना चाहिए। जिन निवेशकों के पास ऐसे स्टॉक हों उनको घाटे मुनाफे का विचार किए बिना तुरंत इन शेयरों से निकल जाना चाहिए और ऐसी क्वालिटी कंपनियों में निवेश करना चाहिए जिनकी ग्रोथ की संभावना अच्छी है। जिनका वैल्यूएशन अच्छा हो और जिनको प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल हो।
गौरतलब हो कि भारत का बेंचमार्क निफ्टी इस साल अब तक 7 फीसदी टूटा है जबकि पिछले 1 साल में इसमें करीब 14 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। यह इतनी बड़ी गिरावट है कि इसकी जल्द भरपाई होने की उम्मीद नहीं है। इस गिरावट के बावजूद निफ्टी का प्रदर्शन इंटरनेशनल इंडेक्स MSCI की तुलना में अभी भी अच्छा है। इसमें इस साल अब तक 16 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।
रॉयटर्स के हाल के एक सर्वे के मुताबिक बीएसई सेंसेक्स साल 2022 के अंत तक अपनी अब तक की गिरावट के सिर्फ 40 फीसदी हिस्से की भरपाई कर पाएगा। सेंसेक्स साल के अंत तक सोमवार के 54288.61 के क्लोजिंग स्तर से सिर्फ 3.2 फीसदी की बढ़त दिखाते हुए 56000 का स्तर हासिल कर सकेगा।
गिरावट पर खरीद के मौके तलाश रहे निवेशकों को Geojit Financial Services के वी के विजयकुमार की सलाह है कि बाजार का ट्रेन्ड अनिश्चित नजर आ रहा है। ऐसे में निवेशकों को मध्यम से लॉन्ग टर्म नजरिए से हाई क्वालिटी के स्टॉक्स में खरीदारी करनी चाहिए। इस समय मीडियम से लॉन्ग टर्म की अवधि के लिए फाइनेंशियल और बैंकिंग सेक्टर के लीडर काफी अच्छे नजर आ रहे हैं।
बाजार की आगे की संभावनाओं पर बात करते हुए वी के विजयकुमार ने कहा कि आगे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और एफआईआई की तरफ से हो रही बिकवाली बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी रहेगी। हालांकि इस तरह के संकेत मिल रहे हैं कि बाजार अब स्थिर हो रहा है और वर्तमान स्तर के आसपास कंसोलिडेट हो रहा है। दुनिया के सबसे बड़े बाजार अमेरिकी में इस तरह की धारणा बन रही है कि बाजार मंदी के डर को काफी हद तक पचा चुका है। अपने शिखर से 19 फीसदी के करेक्शन के बाद S&P 500 में आया बाउंसबैक शायद इसी बात का संकेत है कि बाजार अब तेज करेक्शन के साये से बाहर आ गया है।
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