Dollar Vs INR : रुपया नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर हुआ बंद, जल्द ही छू सकता है 93 रुपये का लेवल!

Indian rupee : डॉलर के मुकाबले रुपया आज नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर हुआ बंद हुआ है। एनालिस्ट्स का कहना है कि भारतीय रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर से और नीचे जाने का डर है, जल्द ही यह 93 रुपये के लेवल को छू सकता है

अपडेटेड Mar 04, 2026 पर 6:03 PM
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Dollar Vs INR : अगर होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति खराब बनी रहती है तो तेल की कीमतें और ज़्यादा बढ़ेंगी,जिससे रुपए पर और दबाव आ सकता है

Currency Check : बुधवार 4 मार्च को भारतीय रुपया 67 पैसे गिरकर 92.14 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ,जबकि सोमवार को यह 91.47 पर बंद हुआ था। ट्रेडर्स के मुताबिक इंट्राडे में रुपया 92.31 तक गिर गया। हमारी करेंसी में आज करीब 70 पैसे की गिरावट आई,जो हाल के महीनों की एक दिन की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है। भारतीय रुपया इतिहास में पहली बार 92 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ है। मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़ने से इन्वेस्टर्स US डॉलर और सोने जैसे सेफ-हेवन एसेट्स की ओर भाग रहे हैं, इसके चलते रुपए पर दबाव बन रहा है।

ऐसे में अब एनालिस्ट और डीलर्स को डर है कि अगर RBI करेंसी में और ज़्यादा गिरावट को रोकने के लिए डॉलर बेचने के साथ स्पॉट और ऑफ़शोर नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) मार्केट में दखल नहीं देता तो आने वाले दिनों में रुपया 93 रुपये प्रति डॉलर के निशान से भी नीचे गिर सकता है। बता दें कि जब रुपया 91 रुपये प्रति डॉलर के करीब था तब RBI ने गिरावट को रोकने के लिए दखल दिया था।

OCBC बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट लावण्या वेंकटेश्वरन ने कहा RBI लिक्विडिटी की स्थिति को मैनेज करने के लिए बहुत सोच-समझकर काम किया है। ग्रोथ की तस्वीर मज़बूत है। ये अच्छी बात है। इससे पॉलिसी बनाने वालों को काउंटर-साइक्लिकल पॉलिसी से निपटने के लिए एक बफ़र मिलता है।


4 मार्च को, रुपया डॉलर के मुकाबले 92.15 रुपये पर बंद हुआ, जबकि पिछले सेशन में यह 91.47 रुपये था। ट्रेडर्स के मुताबिक, दिन में रुपया 92.31 तक गिर गया, जिसके बाद RBI के रुपये में फ्री फॉल को रोकने के लिए मार्केट में मौजूद रहने की उम्मीद है। करेंसी एक ही दिन में लगभग 70 पैसे गिरी, जो हाल के महीनों में सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट में से एक है।

HDFC सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार का कहना है कि भारतीय रुपये में मई 2025 के बाद से दो सेशन की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। एनर्जी की बढ़ती कीमतों ने महंगाई बढ़ने और बढ़ते ट्रेड डेफिसिट के डर को बढ़ा दिया। बाजार में जोखिम से बचने की भावना के साथ-साथ एनर्जी लागत बढ़ने के कारण शॉर्ट टर्म में करेंसी पर दबाव बने की उम्मीद है।

इन्वेस्टर मिडिल ईस्ट संघर्ष पर करीब से नज़र रख रहे हैं। अगर यह गतिरोध लंबे समय तक बना रहता है तो एनर्जी और कीमती मेटल की इंपोर्ट लागत बढ़ सकती है, जबकि एक्सपोर्ट ग्रोथ में रुकावट आ सकती है। स्पॉट USDINR को 92.60 पर तत्काल रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है,जबकि इसके लिए अहम सपोर्ट 91.80 पर बना हुआ है।

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कोटक सिक्योरिटीज के हेड करेंसी और कमोडिटी रिसर्च, अनिंद्य बनर्जी का कहना है कि US$-INR स्पॉट मार्केट में 92.30 के करीब नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया है। क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी और ईरान-US और इज़राइल के बीच बढ़ते झगड़े के बीच ग्लोबल मार्केट में डॉलर की सप्लाई में कमी से कारण रुपए पर दबाव बढ़ा है। उम्मीद है कि RBI समय-समय पर बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव और रुपये में बेतरतीब गिरावट को रोकने के लिए दखल देगा। हालांकि,जब तक क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी,रुपये पर गिरावट का दबाव बना रह सकता है।

अगर होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति खराब बनी रहती है तो तेल की कीमतें और ज़्यादा बढ़ेंगी,जिससे रुपए पर और दबाव आ सकता है। वहीं, अगर मिडिल ईस्ट में स्थितियों में सुधार के संकेत मिलते हैं तो क्रूड ऑयल की कीमतें स्थिर हो सकती हैं और रुपये को कुछ राहत मिल सकती है। उम्मीद है कि निकट भविष्य में USDINR स्पॉट 91–93 रुपए की रेंज में ट्रेड करेगा।

 

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