El Nino Impact: क्या अल-नीनो बिगाड़ेगा भारत की जीडीपी का खेल? सिटीग्रुप के अर्थशास्त्री ने की ये प्रेडिक्शन
El Nino Impact on India GDP: अल-नीनो के असर से भारत की जीडीपी में 20 से 30 बीपीएस की गिरावट का अनुमान था, लेकिन जमीनी आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। ऑटो सेक्टर की बंपर बिक्री और न्यूनतम मजदूरी में हुई बढ़ोतरी ने ग्रामीण इलाकों में नई जान फूंक दी है। जानिए आखिर कैसे अल-नीनो के झटके से खुद को बचा रहा है भारतीय बाजार
अल-नीनो की आशंकाओं के बावजूद ग्रामीण अर्थव्यवस्था से पॉजिटिव आंकड़े सामने आ रहे हैं
Indian Economy and El Nino: अल-नीनो को लेकर जताई जा रही आशंकाओं के बीच देश की आर्थिक वृद्धि दर यानी GDP ग्रोथ को लेकर राहत भरी खबर आई है। ग्लोबल फाइनेंशियल फर्म सिटीग्रुप के एमडी और चीफ इकोनॉमिस्ट (इंडिया) समीरन चक्रवर्ती ने मनीकंट्रोल को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि अल-नीनो के कारण FY27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ में 20 से 30 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आ सकती है, लेकिन गैर-ग्रामीण क्षेत्रों की मजबूत मांग इस नुकसान की भरपाई कर देगी।
सिटीग्रुप के अनुसार, बाजार में अल-नीनो का डर जितना पहले था, उसके मुकाबले अर्थव्यवस्था के हालिया आंकड़े काफी बेहतर रहे हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ता नहीं दिख रहा है।
ग्रामीण इलाकों से मिल रहे मजबूत संकेत
अल-नीनो की आशंकाओं के बावजूद ग्रामीण अर्थव्यवस्था से पॉजिटिव आंकड़े सामने आ रहे हैं। FADA के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2026 (FY27) के दौरान देश में ट्रैक्टरों की बिक्री में सालाना आधार पर 21% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी अवधि के दौरान टू-व्हीलर्स की बिक्री में भी 17% का उछाल देखने को मिला है।
समीरन चक्रवर्ती ने बताया कि 'हाई-फ्रीक्वेंसी ग्रोथ नंबरों में अल-नीनो का खौफ नहीं दिखता। इस साल अल-नीनो का असर खरीफ के बजाय रबी पर अधिक हो सकता है।'
बारिश और खाद्य महंगाई की मौजूदा स्थिति
देश में मानसून और महंगाई के मोर्चे पर फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। जून में हुई कम बारिश के कारण कुल बारिश में 13% की कमी जरूर दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई और अगस्त में स्थिति में काफी सुधार हुआ है। बुवाई का रकबा भी पिछले साल के लगभग बराबर ही है। सब्जियों या अनाज की कीमतों में कोई असामान्य उछाल नहीं देखा गया है। जुलाई 2026 में खाद्य महंगाई दर 5.52% पर रही।
महंगाई को लेकर असली जोखिम वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2027) में आ सकता है, अगर उस दौरान असामान्य रूप से ज्यादा गर्मी देखने को मिलती है।
न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी से बढ़ी ग्रामीण मांग
सिटीबैंक के अर्थशास्त्री का मानना है कि पिछले दो सालों से ग्रामीण इलाकों की मांग शहरी इलाकों से बेहतर बनी हुई है। 2025 से सभी राज्यों में न्यूनतम मजदूरी में दोहरे अंकों की वृद्धि हुई है।
पिछले 6-7 सालों में लेबर के मुकाबले कंपनियों का पलड़ा भारी था, लेकिन लेबर कानूनों के तहत हुए एकमुश्त वेज एडजस्टमेंट ने आम लोगों के हाथों में पैसा पहुंचाया है, जिससे मांग में तेजी आई है।
सरकारी प्रोत्साहन और क्रेडिट ग्रोथ का मिला सहारा
भारत में घरेलू मांग को बढ़ाने में पिछले साल दिए गए राजकोषीय और मौद्रिक प्रोत्साहन की बड़ी भूमिका रही है। इनकम टैक्स में छूट, जीएसटी दरों में कटौती और ब्याज दरों में कटौती जैसे कदमों ने बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाई।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई 2026 तक देश के सभी शेड्यूल्ड बैंकों का कुल क्रेडिट ₹225.87 लाख करोड़ पहुंच गया, जो सालाना आधार पर लगभग 19% अधिक है।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY27) में FMCG कंपनियों की बिक्री में जबरदस्त वॉल्यूम ग्रोथ देखने को मिली है, जो मजबूत उपभोक्ता मांग का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।