'सॉफ्टवेयर और MBA का दौर अब खत्म!' CEA नागेश्वरन ने युवाओं को दी सलाह- इन सेक्टर्स में ढूंढें जॉब, वरना AI खा जाएगा रोजगार

CEA V Anantha Nageswaran: उन्होंने भारत के सामने खड़ी दोहरी चुनौती का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज देश में बेरोजगारी के साथ-साथ 'अनएम्प्लॉयबिलिटी' यानी योग्यता की कमी भी एक बड़ी समस्या है। CEA नागेश्वरन ने युवाओं से अपील की है कि वे अब अपनी सोच बदलें और ऐसे स्किल्स पर फोकस करें जिन्हें AI कभी रिप्लेस नहीं कर सकता

अपडेटेड Jun 15, 2026 पर 1:51 PM
उन्होंने कहा युवाओं को अब ऐसी विधाओं में माहिर होना पड़ेगा, जहां इंसानी मौजूदगी अनिवार्य हो

CEA V Anantha Nageswaran on Job Market: अगर आप भी लाखों रुपये खर्च करके कंप्यूटर साइंस, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग या MBA की डिग्री लेने की सोच रहे हैं, तो रुक जाइए! भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने देश के युवाओं को एक ऐसी कड़वी हकीकत से रूबरू कराया है, जिसने देश के एजुकेशन सिस्टम और जॉब मार्केट में हड़कंप मचा दिया है।

समाचार एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू में CEA नागेश्वरन ने साफ शब्दों में कहा है कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) के आने के बाद वो दौर अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका है, जहां सॉफ्टवेयर जॉब्स और MBA की डिग्रियों को ही सब कुछ माना जाता था।

उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वे अब अपनी सोच बदलें और ऐसे स्किल्स पर फोकस करें जिन्हें AI कभी रिप्लेस नहीं कर सकता। आइए विस्तार से समझते हैं कि देश के सबसे बड़े आर्थिक सलाहकार ने देश में बेरोजगारी और नौकरियों को लेकर क्या बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है।


सॉफ्टवेयर और MBA का जमाना गया'- क्यों बोले CEA?

इंटरव्यू के दौरान जब नागेश्वरन से भविष्य की नौकरियों और तकनीकी बदलावों पर सवाल पूछा गया, तो उनका जवाब बेहद हैरान करने वाला था। उन्होंने कहा कि एक समय था जब ग्लोबलाइजेशन के दौर में हमारे देश के कंप्यूटर साइंस, सॉफ्टवेयर सेक्टर्स और MBA ग्रेजुएट्स को भारी फायदा मिला। लेकिन अब वह एरा पूरी तरह खत्म हो चुका है।

भविष्य अब 'ट्रेड स्किल्स' और 'सॉफ्ट स्किल्स' का है। युवाओं को अब ऐसी विधाओं में माहिर होना पड़ेगा, जहां इंसानी मौजूदगी अनिवार्य हो, क्योंकि इन सेक्टर्स में AI आसानी से इंसान को रिप्लेस नहीं कर पाएगा।

भारत में 'मैनुअल वर्क' को कम सम्मान मिलने पर जताई चिंता

नागेश्वरन ने भारत की सामाजिक सोच पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि हमें दुनिया के सफल देशों से सीख लेने की जरूरत है। स्विट्जरलैंड, जर्मनी, जापान, कोरिया और यहां तक कि चीन जैसे देशों ने जब तरक्की की, तो उन्होंने 'ट्रेड स्किल्स' यानी हुनरमंद मैन्युअल कामगारों को बहुत सम्मान दिया।

इसके विपरीत, हमारे देश में वेल्डर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और कारपेंटर जैसे कामों को बहुत कम सम्मान दिया जाता है। हमने इन पेशों को 'अनएक्सेप्टेबल और अनफैशनेबल' बना दिया है। नागेश्वरन के मुताबिक, देश को आर्थिक महाशक्ति बनना है तो इस मानसिकता को तुरंत बदलना होगा।

बेरोजगारी और 'अनएम्प्लॉयबिलिटी' से एक साथ लड़ना होगा

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भारत के सामने खड़ी दोहरी चुनौती का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज देश में बेरोजगारी के साथ-साथ 'अनएम्प्लॉयबिलिटी' यानी योग्यता की कमी भी एक बड़ी समस्या है।

उनके अनुसार अगर हम आंख मूंदकर पश्चिमी मॉडल को अपनाएंगे, तो वहां ग्रोथ के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत होती है, जिससे रोजगार कम पैदा होते हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर टिके रहने के लिए भारत को भी कुछ क्षेत्रों में इस मॉडल पर काम करना होगा और खुद सामान बनाना होगा। नागेश्वरन ने कहा कि हमें बेरोजगारी को सिर्फ एक डेटा न मानकर, इसे 'आजीविका की समस्या' की तरह देखना चाहिए और इसका समाधान ढूंढना होगा।

इन सेक्टर्स में कभी खत्म नहीं होगी नौकरी, AI भी रहेगा बेअसर

CEA नागेश्वरन ने युवाओं को उन सेक्टर्स की राह दिखाई, जहां आने वाले कई दशकों तक नौकरियों की बंपर भरमार रहने वाली है और जहाँ AI का कोई खतरा नहीं है:

केयरगिविंग: भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को बुजुर्गों की देखभाल करने वाले योग्य लोगों की जरूरत है।

स्पेशल नीड्स वाले बच्चे: विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की काउंसलिंग और थेरेपी से जुड़े क्षेत्र।

हॉस्पिटल स्टाफ और स्पोर्ट्स एजुकेशन: स्वास्थ्य कर्मी और खेल से जुड़ी शिक्षा।

कुलिनरी आर्ट्स और कुकिंग: खान-पान और कुकिंग का क्षेत्र, जहाँ इंसानी स्वाद और कला की जरूरत होती है।

इन सभी श्रम-प्रधान क्षेत्रों में ट्रेंड लोगों की भारी कमी है और युवा यहां अपना शानदार करियर बना सकते हैं।

मुख्य आर्थिक सलाहकार का यह बयान देश के युवाओं की आंखें खोलने वाला है। साफ है कि केवल डिग्रियां बटोरने का दौर अब जा चुका है। अब मार्केट में टिके रहने के लिए आपके हाथों में कोई न कोई हुनर होना अनिवार्य है। अगर भारतीय युवा समय रहते अपनी दिशा नहीं बदलते, तो आने वाले समय में एम्प्लॉयमेंट का संकट और गहरा सकता है।

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