FIIs Selling: जनवरी के दूसरे पखवाड़े में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने शेयर बाजार में अपनी बिकवाली को और तेज कर दिया। उन्होंने सबसे अधिक बिकवाली फाइनेंशियल, कंज्यूमर सर्विसेज, आईटी, ऑटो और कैपिटल गुड्स शेयरों में की। सिर्फ अकेले फाइनेंशियल सेक्टर में विदेशी निवेशकों ने करीब 12,745 करोड़ रुपये की बिकवाली की। वहीं कंज्यूमर सर्विसेज और आईटी शेयरों में उन्होंने जनवरी के दूसरे पखवाड़े के दौरान क्रमशः 4,840 करोड़ रुपये और 4,544 करोड़ रुपये की बिकवाली की। इसके अलावा उन्होंने इस दौरान 3,899 करोड़ रुपये के ऑटो शेयर बेचे, जबकि करीब 3,077 करोड़ रुपये के उन्होंने कैपिटल गुड्स कंपनियों के शेयर बेचे।
विदेशी निवेशकों ने बाकी सेगमेंट में भी बिकवाली जारी रखी। जनवरी के दूसरे पखवाड़े के दौरान उन्होंने 2,912 करोड़ रुपये, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 2,869 करोड़ रुपये, सर्विस सेगमेंट में 1,334 करोड़ रुपये, कंस्ट्रक्शन में 1,277 करोड़ रुपये और पावर सेक्टर में 1,083 करोड़ रुपये की बिकवाली की। यह साफ दिखाता है कि विदेशी निवेशकों ने अधिकांश बड़े सेक्टर्स से अपनी होल्डिंग कम कर दी है।
हालांकि, बिकवाली के इस दौर में भी कुछ सेगमेंट ऐसे भी रहे, जहां विदेशी निवेशकों ने खरीदारी की। FIIs ने जनवरी महीने के दौरान टेलीकॉम सेक्टर की चुनिदां कंपनियों में 643 करोड़ रुपये की खरीदारी की। वहीं टेक्सटाइल सेक्टर में उनकी ओर से 397 करोड़ रुपये, केमिकल सेक्टर में 313 करोड़ रुपये और डाइवर्सिफाइड स्टॉक्स में 287 करोड़ रुपये की खरीदारी देखने को मिली।
जनवरी में इस भारी बिकवाली के चलते FIIs की भारतीय शेयर बाजार में हिस्सेदारी गिरकर 16.08 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले 12 सालों का सबसे निचला स्तर है। यह आंकड़ा जून 2012 के बाद सबसे कम दर्ज किया गया है।
इसके अलावा, FIIs के पास मौजूद एसेट्स अंडर कस्टडी (AUC) घटकर 67.76 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो आठ महीने का सबसे निचला स्तर है। पिछले चार महीनों में FII AUC में 10.2 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
दूसरी ओर, म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी इस दौरान बढ़कर 10.28 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो दिसंबर में 9.93 प्रतिशत थी। इससे साफ है कि विदेशी निवेशक बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जबकि घरेलू निवेशक अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं।
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