F&O Manual : 19 अक्टूबर को बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। बाजार पर कमजोर ग्लोबल संकेतों का असर देखने को मिला। दोपहर के कारोबारी सत्र में सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में दिख रहे हैं। मेटल इंडेक्स में 1 फीसदी की कमजोरी के साथ कारोबार हो रहा है। बाजार जानकारों का कहना है कि मध्य पूर्व में इजराइल और फिलिस्तीन के आतंकवादी संगठन हमास के बीच बढ़ते संघर्ष, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बेरोकटोक बिकवाली और कुछ बड़ी कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों ने बाजार का सेंटीमेंट खराब कर दिया है। स्टॉक्स की बात करें तो एस्ट्रल, बंधन बैंक और आईजीएल में शॉर्ट बिल्ट-अप देखने को मिल रहा है।
ऑप्शन आंकड़ों से पता चलता है कि 19550 और 19600 स्ट्राइक पर बड़ी मात्रा में स्ट्रैडल ट्रेड लिए गए हैं। ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर के मुताबिक निफ्टी एक बार फिर 19700 के रजिस्टेंस को पार करने में विफल रहा और अंततः भारी मुनाफावसूली के साथ 19600 से नीचे फिसल गया। इससे बाजार का रुख कमजोर हो गया। इसको देखते हुए ट्रेडर और निवेशक सतर्क नजरिया अपना रहे हैं।
प्रभुदास लीलाधर का मानना है कि तकनीकी नजरिए से देखें तो निफ्टी के लिए 50EMA यानी 19600 पर नियर टर्म सपोर्ट है। अगर ये सपोर्ट टूट जाता है तो फिर निफ्टी में गिरावट बढ़ जाएगी और फिर इसके लिए अगला बड़ा सपोर्ट 19200 पर होगा। आज इंट्राडे में निफ्टी के लिए 19500 पर सपोर्ट और 19700 पर रजिस्टेंस दिख रहा है।
एक्सिस सिक्योरिटीज ने हाल में जारी अपने एक नोट में कहा है कि सितंबर सीरीज में निफ्टी 0.45 फीसद की बढ़त के साथ 19523 के स्तर पर बंद हुआ। इस सीरीज में निफ्टी पॉजिटिव नोट पर बंद हुआ। अक्टूबर सीरीज के मध्य में, निफ्टी को 19850 के स्तर के आसपास रजिस्टेंस का सामना करना पड़ा और अब ये 19550 के आसपास कारोबार कर रहा है।
एक्सिस के मुताबिक अक्टूबर एक्सपायरी के लिए सबसे ज्यादा कॉल ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट 19800 की स्ट्राइक पर हैं। उसके बाद 20000 और 19900 की स्ट्राइक पर सबसे ज्यादा कॉल ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट देखने को मिल रहे हैं। वहीं, 19500 की स्ट्राइक पर सबसे ज्यादा पुट ऑप्शन ओपन इंटरेस्ट है। उसके बाद 19300 और 19200 की स्ट्राइक पर सबसे पुट ओपन इंटरेस्ट है। ये लेवल अक्टूबर एक्सपायरी के लिए इमीडिएट सपोर्ट का काम करेंगे।
एक्सिस की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वोलैटिलिटी इंडेक्स (India VIX) 10 और 13 के बीच उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस उतार-चढ़ाव में गाजा हमले जैसी खबरों का अहम योगदान है। इसके अलवा इस उतार-चढ़ाव में कुछ हद तक, घरेलू आर्थिक आंकड़ों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये कीसुस्त चाल, ब्याज दरों में बढ़ोतरी, बारिश के पैटर्न, फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) के फैसले और महंगाई का भी योगदान है। हालांकि आगे हम जैसे-जैसे अक्टूबर एक्सपायरी के करीब पहुंचेंग, यह उम्मीद है कि India VIX नीचे आता जाएगा। अक्टूबर एक्सपायरी में इसके 10 से 14 के दायरे में रहने की उम्मीद है।
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