यूपी के सहारनपुर जैसे शहरों में आम तौर पर परिवार अपने बच्चों को इंजीनियर, डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। इसके लिए पूरे परिवार का फोकस बच्चे की पढ़ाई पर होता है। ऐसे में अगर कोई 15 साल की लड़की स्कूल छोड़ने का प्लान बना ले तो परिवार पर क्या बीतेगी? हम बात कर रहे हैं हर्षिता अरोड़ा की। स्कूल छोड़ने के उसके फैसले ने न सिर्फ परिवार बल्कि टीचर्स को भी हैरान कर दिया था।
16 साल की उम्र में क्रिप्टो पोर्टफोलियो ट्रैकिंग ऐप बनाया
हर्षिता की दिलचस्पी कोडिंग में इस कदर बढ़ गई थी कि वह इसके सिवाय दूसरा कुछ करने के बारे में सोच ही नहीं सकती थी। 16 साल की उम्र में उसने क्रिप्टो पोर्टफोलियो ट्रैकिंग ऐप बनाया। एपल जैसी कंपनी को यह ऐप बहुत पसंद आया। जल्द एक कंपनी ने इसे खरीद लिया। फिर यह अमेरिका और कनाडा में यह दूसरा सबसे लोकप्रिय फाइनेंस ऐप बन गया।
पीएम मोदी से 2020 में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिला
सरकार ने 2020 में हर्षिता की उपलब्धियों का सम्मान किया। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार दिया। उसी साल उसने अमेरिका जाने के लिए O-1 वीजा के लिए अप्लाई किया। यह वीजा उन लोगों को इश्यू होता है, जिन्होंने अपने फील्ड में असाधारण टैलेंट का प्रदर्शन किया होता है। एक साल पहले हर्षिता ने विगनान वेलिवेला और तुषार मिश्रा के साथ मिलकर AtoB नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया था। अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को पहुंचने पर उनके स्टार्टअप को पहचान मिली।
कोविड ने पूरे प्लान पर फेर दिया था पानी
इस स्टार्टअप को Y Combinator के समर 2020 बैच में जगह मिल गई थी। लेकिन, कोविड की महामारी आने के बाद पूरे प्लान पर पानी फिर गया। लेकिन, हर्षिता और उसकी टीम के लोगों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने ट्रक ड्राइवर्स से उनकी समस्याओं के बारे में बातचीत शुरू की। उनके पेमेंट्स के बारे में पूछा। फिर अमेरिकी ट्रक इंडस्ट्री के लिए फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर फोकस किया।
कंपनी की वैल्यू करीब 7600 करोड़ रुपये पहुंची
उन्होंने नए सिरे से AtoB को बनाया। फिर ट्रक इंडस्ट्री के लिए एक मॉडर्न टूल पेश किया। आज अमेरिका में 30,000 से ज्यादा ट्रक एटूबी का इस्तेमाल कर रहे हैं। कंपनी की वैल्यू करीब 80 करोड़ डॉलर पहुंच गई है। यह 7,600 करोड़ रुपये के बराबर है। हर्षिता के टैलेंट को देख 2026 में Y Combinator ने उन्हें प्रमोट कर जनरल पार्टनर बना दिया। आज वह दुनिया के कुछ सबसे टैलेंटेड लोगों के साथ काम कर रही हैं।
आज दूसरे स्टार्टअप की मदद कर रहीं हर्षिता
हर्षिता ने यह साबित किया है कि टैलेंट के बल पर कोई व्यक्ति छोटे शहर में होने के बावजूद अपने सपने को पंख दे सकता है। आज वह वाय कंबिनेटर ने यह तय करती हैं कि किस स्टार्टअप को कितनी वित्तीय मदद दी जा सकती है। आज वह सफलता के बड़े मुकाम पर हैं, जबकि उनकी उम्र के लोग अपना करियर शुरू करने की कोशिशों में लगे हैं।