फॉरेन फंड्स (Foreign Funds) इंडियन मार्केट में इनवेस्टमेंट बढ़ा सकते हैं। विदेशी ब्रोकरेज फर्म CLSA ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी फंडों की सोच बदल रही है। वे 2022 के अपने पसंदीदा देशों के स्टॉक मार्केट्स में निवेश नहीं करना चाहते। इनमें ब्राजील, सऊदी अरब और थाईलैंड शामिल हैं। CLSA की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका मतलब यह है कि इंडिया, ताइवान और दक्षिण कोरिया में वे अपना इनवेस्टमेंट बढ़ा सकते हैं। विदेशी इनवेस्टर्स उभरते बाजारों (Emerging Markets) में काफी ज्यादा निवेश कर रहे हैं।
उभरते बाजारों में 12 अरब डॉलर की खरीदारी
सीएलएसए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विदेशी फंडों ने उभरते बाजारों में इस साल 52 अरब डॉलर की खरीदारी की है। यह 2019 की पहली छमाही के बाद सबसे ज्यादा है। चीन को छोड़ दें तो उनकी कुल खरीदारी 21 अरब डॉलर की है। उन्हें अब ताइवान, कोरिया और इंडिया में ग्रोथ की उम्मीद दिख रही है। यह उनके रुख में बदलाव का संकेत है, क्योंकि उन्होंने 2022 में इंडियन मार्केट में 17.21 अरब डॉलर की बिकवाली की थी। तब यह कहा गया था कि इंडियन मार्केट अपने लंबी अवधि के औसत के मुकाबले महंगे हो गए हैं।
इन देशों में खरीदारी में आई कमी
CLSA के एनालिस्ट अलेक्जेंडर रेडमैन ने लिखा है कि मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से ताइवान और कोरिया पहली पसंद के रूप में उभर रहे हैं। विदेशी फंडों की कुल खरीदारी में दोनों देशों की हिस्सेदारी क्रमश: 0.6 फीसदी और 0.5 फीसदी रही है। उधर, ब्राजील, इंडोनेशिया और सऊदी अरब में उनकी खरीदारी में गिरावट देखने को मिली है। चीन को छोड़ दें तो उन्होंने सबसे ज्यादा खरीदारी एशिया में की है। 2023 की पहली छमाही में उनकी कुल खरीदारी 23 अरब डॉलर रही है। यह 2019 की पहली छमाही के बाद सबसे ज्यादा विदेशी खरीदारी है।
इन देशों में फॉरेेन इक्विटी ओनरशिप ज्यादा
इस साल ब्राजील में विदेशी फंडों की खरीदारी में कमी देखने को मिली है। विदेशी फंडों की ज्यादा खरीदारी के बावजूद उभरते देशों में फॉरेन ओनरशिप का स्तर अपेक्षाकृत कम है। इससे आगे खरीदारी बढ़ने का संकेत मिलता है। मार्केट कैप के लिहाज से इंडिया में फॉरेन इक्विटी ओनरशिप करीब 17 फीसदी है। तुर्की में 9 फीसदी है, मलेशिया और फिलीपींस में 20-20 फीसदी और कोरिया में करीब 25 फीसदी है।