विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने जुलाई महीने के दौरान भारतीय शेयर बाजारों से बड़े पैमाने पर पैसे निकाले। इस बिकवाली की अगुआई सिंगापुर, अमेरिका, नीदरलैंड और जापान के विदेशी निवेशकों ने की। इन चारों देशों ने मिलकर जुलाई में भारतीय शेयर बाजार से ₹22,350 करोड़ से अधिक की निकासी की है। सबसे बड़ी बिकवाली सिंगापुर ने की। सिंगापुर के निवेशकों ने शेयर मार्केट से 11,670 करोड़ रुपये और डेट मार्केट से 7,600 करोड़ रुपये निकाली।
अमेरिका भी शुद्ध बिकवाल रहा। इसने शेयर मार्केट से 9,333 करोड़ रुपये की निकासी है। हालांकि इसने डेट मार्केट में करीब 1,230 करोड़ की खरीदकर करके कुछ संतुलन बनाया।
नीदरलैंड ने भी भारतीय शेयर बाजार में निवेश घटाया, लेकिन डेट मार्केट में 2,570 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसी तरह, जापान ने 537 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। लेकिन दूसरी ओर डेट मार्केट में 7,420 करोड़ रुपये का निवेश किया।
इन आंकड़ों को NSDL ने जारी किया है। ये आंकड़े भारत के इक्विटी, डेट और हाइब्रिड इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करने वाले टॉप-10 देशों के शुद्ध निवेश को दिखाते हैं।
इस बिकवाली के बीच फ्रांस इकलौता ऐसा देश रहा, जिसने जुलाई में भारतीय शेयर मार्केट और डेट मार्केट में भारी निवेश किया। फ्रांस ने 14,580 करोड़ रुपये शेयर मार्केट में और ₹3,300 करोड़ रुपये डेट मार्केट में निवेश किया।
इसके अलावा, लक्जमबर्ग और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का रुख भी भारतीय बाजारों को लेकर पॉजिटिव रहा। लक्जमबर्ग ने 2,133 करोड़ रुपये, जबकि यूएई ने ₹1,821 करोड़ रुपये इक्विटी मार्केट में निवेश किए। हालांकि, इनके डेट मार्केट में निवेश काफी कम रहे। लक्जमबर्ग ने 183 करोड़ रुपये, जबकि यूएई ने 215 करोड़ रुपये का निवेश किया।
आयरलैंड और जर्मनी ने भी दोनों एसेट क्लास में शुद्ध निवेश किया। आयरलैंड ने 1,800 करोड़ रुपये इक्विटी मार्केट में और 1,770 करोड़ रुपये डेट मार्केट में निवेश किया। वहीं जर्मनी ने 1,365 करोड़ रुपये इक्विटी में और 330 करोड़ रुपये डेट मार्केट में लगाए।
जुलाई में भारी बिकवाली का कारण
जुलाई के महीने में FIIs ने भारतीय सेकेंडरी मार्केट से कुल 31,988 करोड़ रुपये की बिकवाली की। इस बिकवाली की वजह शेयर बाजार के ऊंचे वैल्यूएशन, उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजे और ग्लोबल स्तर पर टैरिफ विवादों में बढ़ोतरी को माना जा रहा है।
डिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।