Fortis Healthcare News: हेल्थकेयर सेक्टर की दिग्गज कंपनी फोर्टिस हेल्थकेयर का कहना है कि दाइची सैंक्यो (Daiichi Sankyo) और सिंह ब्रदर्स (मलविंदर मोहन सिंह और शिविंदर मोहन सिंह) के बीच चल रहे कानूनी विवाद में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। फोर्टिस का अपने बचाव में मुख्य रूप से कहना है कि इस विवाद में वह पूरी तरह बाहरी पक्ष है और सिंह ब्रदर्स की फोर्टिस में अपनी हिस्सेदारी खत्म करने या इधर-उधर किए जाने में कंपनी की कोई भूमिका नहीं थी। कंपनी ने यह दलील सुप्रीम कोर्ट में दी और इसके बारे में आज 27 सितंबर को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया।
क्या कहना है सुप्रीम कोर्ट का और वहां कैसे पहुंचा मामला
दिल्ली हाई कोर्ट ने 31 अगस्त के अपने आदेश में फोर्टिस का फोरेंसिक ऑडिट कराने का निर्देश दिया था, जिसके खिलाफ कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। हालांकि 25 सितंबर को कोर्ट ने फोर्टिस की SLP (स्पेशल लीव पिटीशन) का निपटारा करते हुए फोरेंसिक ऑडिट को आगे बढ़ाने की अनुमति दी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में जो कुछ भी कहा यानी जो भी टिप्पणी की, वह सिर्फ यह तय करने के लिए थी कि ऑडिट होना चाहिए या नहीं और अब ऑडिट स्वतंत्र रूप से किया जाएगा, जिस पर हाईकोर्ट की टिप्पणी का कोई असर नहीं होगा।।
फोर्टिस का कहना है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने उस पर कोई देनदारी या जुर्माना नहीं लगाया है और न ही यह दाईची सैंक्यो और सिंह ब्रदर्स के बीच चल रहे आर्बिट्रेशन प्रोसिडिंग्स यानी कानूनी मामले में कभी पक्षकार रही है। फोर्टिस का कहना है कि वह एक लिस्टेड कंपनी है और उसके पास प्रमोटर्स के शेयरों के लेन-देन को कंट्रोल करने की कोई शक्ति ही नहीं थी। फोर्टिस का यह भी कहना है कि पुराने प्रमोटर्स के शेयरों के लेन-देन से कोई पैसा भी नहीं मिला।
फोर्टिस का कहना है कि जब सिंह ब्रदर्स की शेयरहोल्डिंग 1% से कम हो गई और उन्होंने मार्च 2018 तक बोर्ड से इस्तीफा दे दिया, तो इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर्स ने इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को नियुक्त किया। इसके बाद इंडिपेंडेंट बोर्ड ने जून 2018 में एक नया इन्वेस्टर खोजने और उसे शामिल करने के लिए कॉम्पिटिटिव बिडिंग प्रोसेस शुरू किया।
कंपनी के अनुसार उसके मौजूदा प्रमोटर शेयरहोल्डर और IHH हेल्थकेयर बरहाद ग्रुप की नॉर्दर्न टीके वेंचर प्राइवेट लिमिटेड ने नवंबर 2018 में इसमें इक्विटी शेयरों के नए इश्यू के जरिए निवेश किया था और इसे लेकर पहले ही CCI, SEBI, स्टॉक एक्सचेंजों और शेयरहोल्डर्स समेत सभी कानूनी और रेगुलेटरी मंजूरियां ले ली गई थीं। फोर्टिस का कहना है कि यह ट्रांजैक्शन तब हुआ जब सिंह ब्रदर्स का कंपनी के साथ कोई संबंध नहीं रह गया था और इसमें उनसे शेयरों का ट्रांसफर शामिल नहीं था। फिलहाल कंपनी ने भरोसा जताया है कि स्वतंत्र तरीके से फोरेंसिक ऑडिट में ये तथ्य सही साबित होंगे।