थार-स्कॉर्पियो और XUV 7XO होगी और महंगी! M&M चौथी बार बढ़ाएगी दाम!

M&M Price Hike: इस साल तीन बार कीमतें बढ़ाने के बाद महिंद्रा एंड महिंद्रा एक बार फिर अपनी एसयूवी की कीमतें बढ़ाने की तैयारियों में जुटी है यानी कि थार, स्कॉर्पियो और XUV 7XO अभी और महंगी हो सकती है। जानिए इससे पहले इस साल कब-कब कंपनी की कारें महंगी हुई थीं, आगे क्या प्लान है, और इस साल कीमतों में बढ़ोतरी का इसकी बिक्री पर क्या असर पड़ा

अपडेटेड Sep 27, 2026 पर 1:28 PM
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M&M Price Hike: महिंद्रा एंड महिंद्रा का दावा है कि पूरे ऑटो इंडस्ट्री में हाल ही में हुई प्राइस हाइक का ग्राहकों की इंक्वायरी और बुकिंग्स पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।

M&M Price Hike: महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) की एसयूवी एक बार और महंगी हो सकती हैं। कमोडिटीज यानी कच्चे माल के बढ़ते भाव के चलते कंपनी इसकी योजना बना रही है और अगले कुछ हफ्तों में कंपनी इस पर फैसला ले सकती है। यह जानकारी कंपनी के ऑटोमोटिव प्रेसिडेंट और सीईओ Nalinikanth Gollagunta ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को एक इंटरव्यू में दी। उन्होंने कहा कि कंपनी साल पहले ही तीन बार- जनवरी, अप्रैल और जुलाई में कीमतें बढ़ा चुकी हैं और अब एक बार फिर इसकी तैयारी है। जुलाई में तो कंपनी ने एसयूवी की कीमतें करीब 2.7% तक बढ़ाई थी। अब चौथी बार बढ़ोतरी को लेकर उन्होंने कहा कि इस पर अगले कुछ हफ्तों में फैसला हो सकता है कि कीमतें बढ़ाने की जरूरत है या नहीं।

दाम में बढ़ोतरी का बिक्री पर कितना असर?

नलिनकांत का दावा है कि पूरे ऑटो इंडस्ट्री में हाल ही में हुई प्राइस हाइक का ग्राहकों की इंक्वायरी और बुकिंग्स पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। इसकी एक बड़ी वजह उन्होंने बताई कि महिंद्रा की गाड़ियां अभी भी जीएसटी में कटौती से पहले की कीमतों की तुलना में सस्ती हैं। अब आगे की बात करें तो उन्हें फेस्टिव सीजन से पॉजिटिव उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि गाड़ियों की कीमतें अभी भी जीएसटी में कटौती से पहले की तुलना में सस्ती हैं तो महिंद्रा के नए और अपडेटेड मॉडल आ रहे हैं, जिनसे फेस्टिव सीजन में मांग अच्छी दिख सकती हैं


क्या है Mahindra & Mahindra की स्ट्रैटेजी

हाइब्रिड टेक्नोलॉजी को लेकर नलिनकांत ने कहा कि कंपनी का फोकस फिलहाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) पर बना हुआ है लेकिन नियमों में बदलाव पर उसके हिसाब से कंपनी खुद को ढाल लेगी। उन्होंने कहा कि CAFE (कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिसिएंसी) से जुड़े नियमों में ईवी और हाइब्रिड को मिलने वाले फायदों में साफ फर्क है जिसकी वजह से कंपनी का फोकस ईवी पर है।

कैपेसिटी को लेकर उन्होंने कहा कि कंपनी के पास अभी हर महीने तेल से चलने वाली 60 हजार और 8 हजार इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनाने की क्षमता है और अगले साल मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत तक तेल से चलने वाली गाड़ियों के प्रोडक्शन की क्षमता हर महीने 70 हजार और ईवी की 12 हजार करने का लक्ष्य है। इस प्रकार कंपनी का लक्ष्य अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी को करीब छह महीने में मौजूदा 68 हजार से बढ़ाकर 84 हजार करने की है। साथ ही कंपनी अगली दो तिमाहियों में तेल से चलने वाली एक और एक ईवी लॉन्च करने की तैयारी में है।

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