नहीं थम रही FPI की सेलिंग, भारतीय शेयरों से मई में अब तक निकाले ₹14231 करोड़; क्यों हैं सेलर

FPI's Selling in May: FPI की बिकवाली की मुख्य वजह ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक अनिश्चितता है। विदेशी निवेशक खास तौर पर महंगाई, ब्याज दरों और भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर चिंतित हैं। बिकवाली के बावजूद FPI बिजली, निर्माण और पूंजीगत सामान जैसे चुनिंदा क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं

अपडेटेड May 10, 2026 पर 12:19 PM
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फरवरी को छोड़कर, 2026 के अब तक के सभी महीनों में FPI नेट सेलर रहे हैं।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का भारतीय शेयर बाजार से निकासी का सिलसिला मई में भी जारी है। वैश्विक तौर पर मैक्रोइकोनॉमिक अनिश्चितता के बीच FPI ने मई में अब तक भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध रूप से 14,231 करोड़ रुपये निकाले हैं। NSDL के आंकड़ों के अनुसार, इसके साथ ही 2026 में FPI की भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का आंकड़ा बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया है। पूरे 2025 के दौरान FPI ने भारतीय बाजार से 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाले थे।

फरवरी को छोड़कर, 2026 के अब तक के सभी महीनों में FPI नेट सेलर रहे हैं। जनवरी में उन्होंने 35,962 करोड़ रुपये निकाले थे। हालांकि, फरवरी में उन्होंने 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो 17 माह का उच्च स्तर रहा। मार्च में यह रुख फिर पलट गया और विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। अप्रैल में भी उन्होंने 60,847 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। मई में भी यह सिलसिला जारी है और FPI अब तक 14,231 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं।

क्या है एक्सपर्ट्स की राय


न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल-मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि FPI की बिकवाली की मुख्य वजह ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक अनिश्चितता है। विदेशी निवेशक खास तौर पर महंगाई, ब्याज दरों और भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर चिंतित हैं। कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतें और लगातार बरकरार भू-राजनीतिक तनावों, खासकर पश्चिम एशिया के तनावों ने दुनिया भर में महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया है। इसके चलते निवेशकों को प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ओर से निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की अपनी उम्मीदों पर फिर से विचार करना पड़ रहा है।

ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स अपेक्षाकृत अच्छी बनी हुई हैं। इससे विकसित बाजारों की निश्चित आय वाली संपत्तियों का आकर्षण बढ़ा है और उभरते बाजारों के शेयरों में जोखिम लेने की निवेशकों की इच्छा कम हुई है। यह भी कहा कि भारतीय रुपया भी दबाव में है, जो विदेशी निवेशकों के लिए डॉलर-एडजस्टेड रिटर्न पर असर डाल रहा है।  जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार के मुताबिक, कुल बिकवाली के बावजूद FPI बिजली, निर्माण और पूंजीगत सामान जैसे चुनिंदा क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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