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नहीं बदल रहा FPI का रुख, मार्च में अब तक बेचे ₹1.13 लाख करोड़ के शेयर; किन कारणों से हैं सेलर

FPI's Selling in March: इससे पहले अक्टूबर, 2024 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने किसी एक महीने में सबसे अधिक सेलिंग की थी। उस वक्त उन्होंने 94017 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। FPI वैश्विक आर्थिक प्रतिकूल परिस्थितियों और बढ़ी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते सेलर बने हुए हैं

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Mar 29, 2026 पर 11:11 AM
नहीं बदल रहा FPI का रुख, मार्च में अब तक बेचे ₹1.13 लाख करोड़ के शेयर; किन कारणों से हैं सेलर
इससे पहले फरवरी में FPI ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मार्च में अब तक घरेलू शेयर बाजार से 1.13 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष, रुपये में लगातार कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारत की ग्रोथ पर असर पड़ने की संभावना है। इसके चलते विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैं। इस महीने का एक कारोबारी सत्र अभी बचा है, जिससे निकासी का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

इससे पहले अक्टूबर, 2024 में FPI ने किसी एक महीने में सबसे अधिक सेलिंग की थी। उस वक्त उन्होंने 94017 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। NSDL के आंकड़ों के अनुसार, FPI साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 1.27 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। 27 मार्च तक उन्होंने 1,13,380 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इससे पहले फरवरी में FPI ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो 17 माह का उच्च स्तर रहा।

एक्सपर्ट्स का क्या है कहना

मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि FPI वैश्विक आर्थिक प्रतिकूल परिस्थितियों और बढ़ी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते सेलर बने हुए हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी है, रुपये में लगातार गिरावट आ रही है। साथ ही खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले पैसों यानि रेमिटेंस में कमी आने का डर है। इतना ही नहीं कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण भारत की वृद्धि और कंपनियों का मुनाफा प्रभावित होने की भी चिंता पैदा हो गई है। इन कारणों के चलते FPI बिकवाली कर रहे हैं।

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