FPI Outflow: 6 महीने की सबसे बड़ी बिकवाली! FPI ने शेयर बाजार से निकाले 35 हजार करोड़

FPI outflow: अगस्त 2025 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 34,993 करोड़ रुपये निकाले, जो छह महीनों की सबसे बड़ी बिकवाली रही। जानिए ट्रंप टैरिफ के अलावा किस वजह से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं और कहां निवेश कर रहे हैं।

अपडेटेड Aug 31, 2025 पर 2:27 PM
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एक्सपर्ट के मुताबिक, FPI की मौजूदा बिकवाली के पीछे ग्लोबल और डोमेस्टिक, दोनों फैक्टर जिम्मेदार हैं।

फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) ने अगस्त में भारतीय शेयर बाजार से 34,993 करोड़ रुपये (करीब 4 अरब डॉलर) की भारी बिकवाली की। यह बीते छह महीनों में सबसे बड़ी निकासी रही। फरवरी के बाद यह पहली बार है, जब इतनी बड़ी मात्रा में पैसे बाजार से बाहर गए हैं। इससे पहले फरवरी में FPI ने 34,574 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।

जुलाई की तुलना में यह निकासी लगभग दोगुनी रही, जब 17,741 करोड़ रुपये का आउटफ्लो दर्ज हुआ था। इस तरह 2025 में अब तक भारतीय इक्विटी से कुल FPI निकासी 1.3 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच गई है।

FPI किस वजह से कर रहे बिकवाली?


एक्सपर्ट का मानना है कि मौजूदा बिकवाली के पीछे ग्लोबल और डोमेस्टिक, दोनों फैक्टर जिम्मेदार हैं। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट्स के एसोसिएट डायरेक्टर-मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर 50% तक टैरिफ लगा दिया है। इससे निवेशकों के सेंटिमेंट को धारणा को बड़ा झटका लगा है।

उन्होंने कहा कि भारी टैरिफ के चलते भारत की व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और ग्रोथ आउटलुक पर आशंका बढ़ गई। साथ ही, जून तिमाही में कुछ प्रमुख सेक्टरों की कॉर्पोरेट कमाई उम्मीद से कमजोर रही, जिसने निवेशकों की भूख और घटा दी।

महंगा वैल्यूएशन भी है बड़ी वजह

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि FPI की इस बड़े पैमाने की बिकवाली की बड़ी वजह भारत में ऊंचा वैल्यूएशन है। वहीं, अन्य बाजारों में वैल्यूएशन अपेक्षाकृत सस्ते हैं। इसी कारण निवेशक पूंजी वहां शिफ्ट कर रहे हैं।

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हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि FPI लंबे समय से प्राइमरी मार्केट में खरीदार बने हुए हैं। इस साल एक्सचेंजों के जरिए भारी बिकवाली के बावजूद उन्होंने प्राइमरी मार्केट में 40,305 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी है, जहां IPO का वैल्यूएशन कुछ हद तक आकर्षक रहा।

डेट मार्केट में भी हलचल

इक्विटी से निकासी के बीच FPI ने अगस्त में डेट मार्केट में भी आंशिक रूप से रुख बदला। उन्होंने इस अवधि में डेट जनरल लिमिट में 6,766 करोड़ रुपये का निवेश किया, जबकि डेट वॉलंटरी रिटेंशन रूट से 872 करोड़ रुपये निकाले।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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