भारतीय शेयर बाजारों में पिछले कुछ महीनों में आई भारी गिरावट का एक बड़ा कारण विदेशी निवेशकों (FPI) की तरफ से अंधाधुंध बिकवाली थी। NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने पिछले साल अक्टूबर 2021 के बाद से जून महीने के अंत भारतीय शेयर बाजार से 2.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक रकम निकाले थे या बिकवाली की थी। इसके चलते BSE सेंसेक्स इस दौरान अपने पीक से करीब 18 फीसदी नीचे गिर गया था।
हालांकि जुलाई महीने में विदेशी निवेशकों का यह रुख बदलता दिख रहा है और एक बार फिर से उन्होंने भारतीय बाजार में पैसा लगाना शुरू कर दिया है। इसके चलते शेयर बाजार में जुलाई महीने में स्थिरता आई है और सेंसेक्स इस महीने अभी तक करीब 6 फीसदी ऊपर जा चुका है।
NSDL के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अभी तक 1,099 करोड़ रुपये की खरीदारी की और वे इस महीने अभी तक शुद्ध खरीदार हैं। यह आंकड़ा बताता है कि विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार में भरोसा फिर से लौट रहा है, जिसके चलते वह बाजार में वापस आ रहे हैं।
यह आंकड़ा इसलिए भी अहम है क्योंकि डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक FPI ने 1-15 जुलाई के दौरान भारतीय इक्विटी मार्केट से 7,432 करोड़ रुपये निकाले थे, लेकिन अब वे शुद्ध खरीदार बन गए हैं। इसका मतलब है कि 18-22 जुलाई के दौरान उन्होंने भारतीय बाजार में बड़े स्तर पर खरीदारी है। इस खरीदारी के चलते सेंसेक्स भी पिछले हफ्ते करीब 3.5 फीसदी ऊपर चढ़ गया।
इससे पहले FPI ने जून में शेयर बाजार से से 50,203 करोड़ रुपए निकाले थे। यह मार्च 2020 के बाद से किसी एक महीने में हुई सबसे अधिक निकासी थी। मार्च 2020 में उन्होंने 61,973 करोड़ रुपए निकाले थे। वहीं साल 2022 की पहली छमाही में विदेशी निवेशकों ने 2.17 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की थी, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 1.07 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की थी।