कच्चा तेल क्या बिगाड़ेगा बाजार का सेटीमेंट या आज फिर भरेगा जोश, जानें वीकली एक्सपायरी पर गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा संकेत

Gift Nifty Indicator: रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े शेयरों के दम पर पिछले तीन सत्रों में भारतीय शेयरों में आई जोरदार तेजी ने घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को मजबूत किया है। हालांकि, मिडिल ईस्ट में संघर्ष को लेकर नई चिंताएं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक सेमीकंडक्टर शेयरों में लगातार बिकवाली बाजार की बढ़त को सीमित कर सकती हैं

अपडेटेड Nov 03, 2026 पर 8:28 AM
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एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट के बावजूद, GIFT निफ्टी अच्छी बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है।

Gift Nifty Indicator: मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के मजबूत शुरुआत के साथ खुलने की उम्मीद है। एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट के बावजूद, GIFT निफ्टी अच्छी बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े शेयरों के दम पर पिछले तीन सत्रों में भारतीय शेयरों में आई जोरदार तेजी ने घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को मजबूत किया है। हालांकि, मिडिल ईस्ट में संघर्ष को लेकर नई चिंताएं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक सेमीकंडक्टर शेयरों में लगातार बिकवाली बाजार की बढ़त को सीमित कर सकती हैं।

सुबह 7:40 बजे के आसपास, GIFT निफ्टी 116 अंक (0.5 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 23,519 पर कारोबार कर रहा था। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में तेजी रही। सेंसेक्स 1,233.25 अंक (1.66 प्रतिशत) उछलकर 75,692.78 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 387.70 अंक (1.68 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 23,440.80 पर बंद हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज के दूसरे तिमाही के मजबूत नतीजों के बाद इसके शेयरों में करीब 12 फीसदी की उछाल आई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार दूसरे सत्र में 3,114 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 392 करोड़ रुपये के शेयर बेचे - यह लगातार दूसरा सत्र है जब उन्होंने बिकवाली की है।

एशियाई बाजारों में गिरावट


मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी सेमीकंडक्टर शेयरों में लगातार बिकवाली का असर टेक्नोलॉजी शेयरों पर पड़ा, जिससे ईरान में संघर्ष को सुलझाने के लिए चल रहे राजनयिक प्रयासों से बनी सकारात्मक उम्मीदें फीकी पड़ गईं। यह गिरावट अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में आई भारी गिरावट (करेक्शन) के बाद हुई है। नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) अपने उच्चतम स्तर से 10 प्रतिशत गिरकर 'करेक्शन' के दायरे में आ गया है।

MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 0.6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि दक्षिण कोरिया का टेक्नोलॉजी-प्रधान कोस्पी (Kospi) सूचकांक 2 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया। जापान के शेयर बाजार छुट्टी के कारण बंद थे, हालांकि निक्केई 225 (Nikkei 225) फ्यूचर्स में 0.4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। हांगकांग का हैंग सेंग (Hang Seng) 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि शंघाई कंपोजिट (Shanghai Composite) में 0.9 प्रतिशत की गिरावट आई। US S&P 500 फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं दिखा।

वॉल स्ट्रीट का कारोबार मिला-जुला रहा, नैस्डैक 1% से ज्यादा गिरा

सोमवार को US इक्विटी मार्केट का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश के उछाल के टिकाऊ होने को लेकर चिंताओं के बीच, टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट जारी रही। सेमीकंडक्टर और अन्य टेक्नोलॉजी शेयरों में लगातार कमजोरी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर किए जा रहे भारी खर्च को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दर्शाती है।

नैस्डैक कंपोजिट 1.07 फीसदी गिरकर 25,164.32 पर आ गया, जबकि S&P 500 में 0.51 फीसदी की गिरावट आई और यह 7,541.40 पर बंद हुआ। इसके उलट, डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 0.41 फीसदी बढ़कर 51,983.98 पर पहुंच गया।

ईरान पर US के हमले की खबर के बाद ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर के पार पहुंचा

मंगलवार को एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। यह तेजी एक रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें कहा गया कि अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर हमला किया है। इससे आठ महीने से चल रहे संघर्ष के और तेज होने की चिंताएं बढ़ गई हैं। इससे पहले, संघर्ष को खत्म करने के लिए चल रही राजनयिक कोशिशों को लेकर उम्मीदें थीं, जिसके चलते तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई थी।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 48 सेंट यानी 0.5 फीसदी बढ़कर 105.25 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 47 सेंट यानी 0.5 फीसदी बढ़कर 96.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

इंडेक्स पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि वैश्विक संकेत मिले-जुले हैं। भू-राजनीतिक घटनाक्रम और एनर्जी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय इक्विटी बाजारों की शॉर्ट टर्म पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी आती है, तो इससे घरेलू बाजारों में जारी रिकवरी को सपोर्ट मिल सकता है।

हालांकि, अगर बातचीत विफल हो जाती है या फिर ग्लोबल टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी बनी रहती है, तो बाजार में फिर से उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) बढ़ सकता है। इससे निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान प्रभावित हो सकता है और वैश्विक पूंजी प्रवाह (कैपिटल फ्लो) पर भी असर पड़ सकता है।

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