Gold Stocks: गोल्ड फाइनेंस और ज्वेलरी स्टॉक्स में बड़ी गिरावट, जानिए 3 बड़े कारण
Gold Stocks: सोने की कीमतों में आई तेज गिरावट ने गोल्ड फाइनेंस और ज्वेलरी शेयरों को हिला दिया है। मुथूट फाइनेंस से लेकर कल्याण ज्वेलर्स तक कई शेयर टूट गए। आखिर निवेशक अचानक क्यों घबराए और बाजार किन तीन बड़े संकेतों को लेकर चिंतित है?
सोने की कीमत गिरने का सबसे ज्यादा असर गोल्ड फाइनेंस कंपनियों पर पड़ा।
Gold Stocks: सोने की कीमतों में आई तेज गिरावट का असर सोमवार को गोल्ड फाइनेंस और ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर भी साफ दिखा। कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच मुथूट फाइनेंस, IIFL फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस जैसे शेयर 6% तक टूट गए। वहीं कल्याण ज्वेलर्स, PC Jeweller और टाइटन जैसे ज्वेलरी शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। आइए जानते हैं कि सोने की कीमतों में कितनी गिरावट आई और इसकी तीन बड़ी वजह क्या हैं।
सोने की कीमत में बड़ी गिरावट
फ्यूचर्स बाजार में सोना 2,374 रुपये टूटकर 1,53,220 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। MCX पर अगस्त डिलीवरी वाले गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट में 1.53% की गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक बाजार में भी सोने पर दबाव बना रहा। न्यूयॉर्क में गोल्ड फ्यूचर्स करीब 0.96% गिरकर 4,286.81 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। एनालिस्टों का कहना है कि ग्लोबल मार्केट से कमजोर रुझानों की वजह से सोने में बिकवाली बढ़ी है।
गोल्ड फाइनेंस शेयरों में भारी दबाव
सोने की कीमत गिरने का सबसे ज्यादा असर गोल्ड फाइनेंस कंपनियों पर पड़ा। मुथूट फाइनेंस का शेयर 6.35% टूटकर 2,953 रुपये पर आ गया। IIFL फाइनेंस 5% गिरकर 491 रुपये पर पहुंच गया, जबकि मणप्पुरम फाइनेंस 3.5% टूटकर 297.30 रुपये पर आ गया।
आमतौर पर जब सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव आता है, तो गोल्ड लोन कंपनियों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ जाती है। इसी वजह से इन शेयरों में दबाव देखने को मिला।
ज्वेलरी शेयर भी फिसले
गोल्ड फाइनेंस कंपनियों के साथ-साथ ज्वेलरी शेयरों में भी कमजोरी रही। कल्याण ज्वेलर्स का शेयर 5% तक गिर गया। PC Jeweller में 4% की गिरावट आई। टाइटन कंपनी और सेनको गोल्ड के शेयर में भी 2% तक की कमजोरी देखने को मिली।
1. बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोने पर दबाव बढ़ा
बाजार जानकारों के मुताबिक, अमेरिका से आए मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने निवेशकों की सोच बदल दी है। खासकर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोने पर दबाव बढ़ा है।
अमेरिका के 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड हाल ही में दो हफ्ते के उच्च स्तर तक पहुंच गई। जब बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो निवेशक सोने जैसी ऐसी संपत्तियों से पैसा निकालने लगते हैं जो कोई ब्याज या नियमित आय नहीं देतीं।
2. पश्चिम एशिया का तनाव चिंता की वजह
मार्केट सेंटीमेंट पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भी असर पड़ा है। इजरायल ने सोमवार को कहा कि उसने पश्चिमी और मध्य ईरान में सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
इस बीच कच्चे तेल की कीमतें भी 4% से ज्यादा चढ़कर 94 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका और मजबूत हुई है।
3. ब्याज दरों को लेकर बढ़ी परेशानी
हालांकि सोने को आमतौर पर महंगाई से बचाव का साधन माना जाता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरें इसके लिए अच्छी खबर नहीं होतीं। जब ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की संभावना बनती है, तो सोने की मांग कमजोर पड़ सकती है।
अमेरिका में मई महीने में लगातार तीसरे महीने मजबूत रोजगार वृद्धि दर्ज की गई है। इससे संकेत मिलता है कि वहां की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है। ऐसे में अमेरिकी केंद्रीय बैंक पर ब्याज दरें जल्द घटाने का दबाव कम हो सकता है। यही वजह है कि फिलहाल सोने की कीमतों और उससे जुड़े शेयरों पर दबाव बना हुआ है।
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