'अभी कोई इरादा नहीं', सरकार ने स्टॉक मार्केट से LTCG टैक्स हटाने पर रुख साफ किया
शेयर बाजार के निवेशकों को LTCG टैक्स में राहत की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने संसद में अपना रुख साफ कर दिया। क्या भविष्य में नियम बदल सकते हैं? जानिए सरकार ने क्या कहा, मौजूदा टैक्स नियम क्या हैं और FPI को लेकर भ्रम क्यों फैला।
LTCG टैक्स से सरकार की कमाई पिछले दो साल में तेजी से बढ़ी है।
लंबे समय से मांग उठ रही थी कि सरकार इक्विटी यानी शेयर बाजार में निवेश से होने वाले मुनाफे पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स खत्म करे। हालांकि, सरकार का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। सरकार ने संसद में साफ कहा है कि LTCG टैक्स हटाने का कोई प्रस्ताव अभी विचाराधीन नहीं है।
संसद में सरकार ने क्या कहा?
लोकसभा में सरकार से पूछा गया था कि क्या बाजार का माहौल बेहतर बनाने, घरेलू निवेशकों को राहत देने और विदेशी-भारतीय निवेशकों के बीच बराबरी लाने के लिए LTCG टैक्स खत्म किया जाएगा। इस पर वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लिखित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव फिलहाल सरकार के पास नहीं है।
हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि टैक्स से जुड़े नियम हमेशा के लिए तय नहीं होते। सरकार हर साल बजट तैयार करते समय इनकी समीक्षा करती है और उस समय देश की आर्थिक स्थिति समेत कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।
दो साल में सरकार की कमाई दोगुनी
LTCG टैक्स से सरकार की कमाई पिछले दो साल में तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए सरकार को 72,249 करोड़ रुपये मिले थे। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,29,158 करोड़ रुपये हो गया।
यानी सिर्फ दो साल में सरकार ने 2.01 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई LTCG टैक्स के जरिए की है। यह भी एक वजह मानी जा रही है कि इस टैक्स को खत्म करने की संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही।
अभी क्या हैं LTCG टैक्स के नियम?
अगर आपने किसी लिस्टेड शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड में 12 महीने से ज्यादा निवेश किया है, तो उससे होने वाला मुनाफा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक के LTCG पर कोई टैक्स नहीं लगता। लेकिन इससे ऊपर होने वाले मुनाफे पर 12.5% टैक्स देना पड़ता है।
क्या विदेशी निवेशकों को राहत मिल गई है?
हाल के दिनों में यह चर्चा भी तेज हुई कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को LTCG टैक्स से छूट मिल गई है, जबकि घरेलू निवेशकों से अब भी टैक्स लिया जा रहा है। सरकार ने संसद में इस पर भी स्थिति साफ कर दी।
सरकार के मुताबिक, इक्विटी निवेश पर 12.5% LTCG टैक्स की दर FPI, घरेलू निवेशकों और रिटेल निवेशकों सभी के लिए समान है। यानी शेयर बाजार में निवेश के मामले में किसी एक वर्ग को अलग से छूट नहीं दी गई है।
फिर G-Sec पर छूट का मामला क्या है?
सरकार ने हाल ही में एक अध्यादेश के जरिए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को सरकारी बॉन्ड (Government Securities या G-Secs) में निवेश पर टैक्स राहत दी है। इसके तहत G-Secs से मिलने वाले ब्याज और कैपिटल गेन पर आयकर नहीं लगेगा।
हालांकि यह राहत सिर्फ सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश तक सीमित है। इसका शेयरों या इक्विटी म्यूचुअल फंड पर लगने वाले LTCG टैक्स से कोई संबंध नहीं है।
वित्त मंत्री पहले क्या कह चुकी हैं?
मई में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार शेयर बाजार के निवेशकों की चिंताओं को सुनने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा था कि LTCG और STCG टैक्स को लेकर अगर निवेशकों की ओर से सुझाव आते हैं, तो सरकार उन पर विचार करेगी।
हालांकि अब संसद में दिए गए ताजा जवाब से इतना साफ हो गया है कि फिलहाल सरकार के एजेंडे में LTCG टैक्स खत्म करने का कोई प्रस्ताव शामिल नहीं है।