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हिंदुस्तान जिंक की OFS प्रक्रिया के दौरान वेदांता के फैसले, बयानों से सरकार नाखुश

सीएनबीसी-आवाज़ के लक्ष्मण रॉय ने कहा कि सरकार HINDUSTAN ZINC में अपनी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इसके लिए सरकार ऑफर फॉर सेल लाने की तैयारी कर रही थी। जब ये बात सार्वजनिक तौर पर ज्ञात थी उस समय वेदांता की ओर से अनावश्यक बयानों या फैसलों की आवश्यकता नहीं थी। ओएफएस प्रक्रिया के दौरान वेदांता द्वारा जिंक बिजनेस बेचने का प्रस्ताव एक गलत कदम है

Lakshman Royअपडेटेड Mar 10, 2023 पर 11:35 AM
हिंदुस्तान जिंक की OFS प्रक्रिया के दौरान वेदांता के फैसले, बयानों से सरकार नाखुश
Hindustan Zinc में सरकार एक साथ पूरी हिस्सेदारी नहीं बेचेगी। इसके लिए सरकार किश्तों में OFS लाएगी। सीधे वेदांता को भी हिस्सेदारी नहीं बेची जायेगी

सरकार हिंदुस्तान जिंक (HINDUSTAN ZINC ) का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) लाने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया के बीच वेदांता (Vedanta Limited) की तरफ से कई प्रकार के बयान आये हैं। उन्होंने अपनी कंपनी की हिस्सेदारी को लेकर कुछ फैसले किये हैं। इसको लेकर सरकार नाखुश नजर आ रही है। सरकार कहना है कि OFS प्रक्रिया के दौरान बिजनेस खरीदना ठीक नहीं है। HINDUSTAN ZINC की OFS प्रक्रिया के दौरान वेदांता का कदम गलत है। ग्लोबल जिंक बिजनेस लेने से पहले चर्चा नहीं की है। कंपनी द्वारा सरकार से कोई विस्तृत चर्चा नहीं की गई। सरकार ने वेदांता के प्रस्ताव का विरोध किया है। छोटे निवेशकों के हित में सरकार ने विरोध जताया है।

सीएनबीसी-आवाज़ के लक्ष्मण रॉय ने इस खबर पर ज्यादा जानकारी देते हुए कहा कि वेदांता कंपनी के हाल के बयानों से सरकार नाखुश है। सरकार HINDUSTAN ZINC में अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहती है। इसके लिए सरकार ऑफर फॉर सेल (OFS) लाने की तैयारी कर रही है। जब ये बात पब्लिक डोमेन में थी उस समय वेदांता कंपनी की तरफ से अनावश्यक बयानों या फैसलों की जरूरत नहीं थी। जब सरकार ओएफएस ला रही है ऐसे कंपनी द्वारा अपना जिंक बिजनेस बेचने का प्रस्ताव लाना एक गलत कदम है। कंपनी द्वारा लाये गये प्रस्ताव का समय सही नहीं था।

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दूसरी बात आप हिंदुस्तान जिंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं। भले ही आप हिंदुस्तान जिंक में मेजॉरिटी स्टेक होल्डर हैं फिर भी आपने छोटे या मझोले स्टेकहोल्डर्स को इस बारे में नहीं बताया। इसके अलावा सरकार को भी Vedanta Limited ने इसकी जानकारी नहीं दी। छोटे हिस्सेदार के रूप में सरकार को कंपनी ने इतना समय भी नहीं दिया कि वह ये विचार कर सके कि इस बिजनेस का खरीदा जाना सरकार के हित में है या नहीं। बल्कि कंपनी ने सीधे ऐलान कर दिया है वे इस बिजनेस को बेचने जा रहे हैं। कंपनी के इस कदम से भी सरकार नाखुश है।

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