ऐसा लगता है कि हिंडनबर्ग रिसर्च ने सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच पर लगाया गया चौथा आरोप हटा लिया है। इस आरोप का संबंध रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) जुड़े नियमों से था। आरोप में कहा गया था कि इन नियमों से ब्लैकस्टोन को फायदा हुआ। 10 अगस्त को हिंडनबर्ग के आरोपों पर माधबी पुरी बुच ने सफाई पेश की। सोशल मीडिया एक्स पर एक के बाद एक आए कई पोस्ट को देखने के बाद ऐसा लगता है कि आरईआईटी से जुड़ा आरोप हिंडनबर्ग ने हटा दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नए सवालों में रीट का मामला शामिल नहीं
हिंडनबर्ग ने 11 अगस्त की देर शाम अपने आरोपों पर बुच के जवाब पर नए सवाल उठाए थे। ये एक ऑफशोर फंड में बुच की हिस्सेदारी से जुड़े थे। बुच की तरफ से सिंगापुर में बनाई गई कंसल्टिंग कंपनी के जरिए हुए बिजनेस की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए थे। इंडिया स्थित एक कंपनी के रेवेन्यू के स्रोत पर भी सवाल उठाए गए थे, जिसमें बुच की हिस्सेदारी है।
लेकिन, चौथे आरोपों के बारे में कोई नए सवाल नहीं पूछा गया है। पहले कहा गया था कि मार्केट रेगुलेटर की तरफ से REIT से जुड़े कई नियम लागू किए गए, जिनसे Blackstone को फायदा हुआ। ब्लैकस्टोन इंडिया में REIT के सबसे बड़े स्पॉन्सर्स में से एक है। ब्लैकस्टोन ने बुच के पति धवब बुच को अपनी कंपनी में सीनियर पॉजिशन पर अप्वाइंट किया था।
धवल की ब्लैकस्टोन में नियुक्ति बुच के सेबी चीफ बनने से पहले हुई थी
हिंडनबर्ग ने यहां तक कहा था कि माधबी बुच संभवत: इंडिया में रीट की सबसे बड़ी पैराकार रही हैं। उसने अपने दावे के पक्ष में बुच के भाषण का हवाला दिया था, जो उन्होंने न्यूज18 के एक कार्यक्रम में दिया था। हिंडनबर्ग के आरोपों के जवाब में माधबी बुच और धवल बुच की तरफ से जो बयान जारी किया गया, उनमें कहा गया है कि धवल को ब्लैकस्टोन ने 2019 में सीनियर एडवाइजर के पोस्ट पर नियुक्त किया था। सप्लाई चेन मैनेजमेंट में धवल के व्यापक अनुभव को देखते हुए यह नियुक्ति हुई थी। इस तरह यह अप्वाइंटमेंट माधबी बुच के सेबी की चेयरपर्सन नियुक्त किए जाने से पहले हुई थी।
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सभी सर्कुलर को सेबी के बोर्ड ने चर्चा के बाद एप्रूव किया था
माधबी और धवल बुच के बयान में यह भी कहा गया है कि धवल की नियुक्ति के बाद ब्लैकस्टोन ग्रुप को तुरंत सेबी की माधबी की रेक्यूजल लिस्ट में शामिल कर दिया गया था। इस बयान में पॉलिसी बनाने से जुड़े सवालों के जवाब देने की भी कोशिश की गई है। इसमें कहा गया है कि पिछले 2 साल में सेबी ने 300 से ज्यादा सर्कुलर जारी किए हैं। इन्हें व्यापक चर्चा के बाद जारी किया गया। इन्हें सेबी के बोर्ड ने एप्रूव किया था।