सेंसेक्स-निफ्टी 4 महीने में 15% तक लुढ़के, अब आएगी जोरदार वापसी? रिपोर्ट में दिखे रिकवरी के संकेत

शेयर मार्केट के सबसे प्रमुख इंडेक्स निफ्टी-50 में पिछले चार महीनों से लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। इस दौरान इंडेक्स करीब 15 प्रतिशत तक टूट चुका है। इस गिरावट की वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रही हैं। हालांकि, अब संकेत मिल रहे हैं कि यह लंबी गिरावट आगे चलकर बाजार के लिए एक “कॉन्ट्रा इंडिकेटर” बन सकती है

अपडेटेड Apr 13, 2026 पर 12:11 PM
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सेंसेक्स और निफ्टी-50 इंडेक्स अप्रैल महीने में अब तक 6 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ चुका है

शेयर मार्केट के सबसे प्रमुख इंडेक्स निफ्टी-50 में पिछले चार महीनों से लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। इस दौरान इंडेक्स करीब 15 प्रतिशत तक टूट चुका है। इस गिरावट की वजह ग्लोबल भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रही हैं। हालांकि, अब संकेत मिल रहे हैं कि यह लंबी गिरावट आगे चलकर बाजार के लिए एक “कॉन्ट्रा इंडिकेटर” बन सकती है, यानी अप्रैल में बाजार बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

DSP की रिपोर्ट में क्या कहा गया?

ब्रोकरेज फर्म DSP की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, निफ्टी-50 में चार महीने या उससे ज्यादा की लगातार गिरावट बहुत ही दुर्लभ रही है। अब तक ऐसे सिर्फ 7 ही मौके आए हैं। सबसे लंबा गिरावट का दौर सितंबर 1994 से अप्रैल 1995 तक चला था, जो 8 महीने तक रहा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जितनी लंबी गिरावट होती है, उसके बाद आने वाली तेजी उतनी ही मजबूत होती है। पिछले सात मामलों के एनालिसिस के बाद ब्रोकरेज ने पाया कि शेयर बाजार ऐसी गिरावट के बाद अगले 3 महीनों में औसतन 12.2% रिटर्न देता है। वहीं 6 महीनों में 22.4% रिटर्न और एक साल में 40.7% रिटर्न देता है।


हालांकि, मीडियन रिटर्न इससे थोड़ा कम रहा, जो यह दिखाता है कि कुछ मामलों में बहुत तेज उछाल ने औसत को ऊपर खींचा है। फिर भी, अधिकतर मामलों में गिरावट के बाद बाजार ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

Nifty had a four consecutive monthly negative close

चार महीने से बाजार क्यों गिर रहा था?

यह गिरावट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्लोबल शेयर बाजारों में भी बिकवाली देखी गई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

खासतौर पर होर्मुज समुद्री मार्ग के बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।इससे भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए महंगाई और राजकोषीय दबाव की चिंता बढ़ गई। इसके अलावा, पिछले कुछ समय से भारत में कॉरपोरेट अर्निंग्स ग्रोथ भी अपेक्षा के मुताबिक नहीं रही, जिससे विदेशी निवेशकों (FPI) ने मार्च में रिकॉर्ड बिकवाली की।

अप्रैल में क्यों दिख रही है मजबूती?

अप्रैल महीने में बाजार में कुछ सुधार देखने को मिला है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम की खबरों और वैल्यू बायिंग के चलते बाजार में तेजी आई है। हालांकि, शांति वार्ता में अनिश्चितता के कारण बीच-बीच में दबाव भी देखने को मिल रहा है, फिर भी निफ्टी-50 इंडेक्स इस महीने अब तक 6 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ चुका है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबी गिरावट के बाद बाजार में रिकवरी की संभावना जरूर बनती है, लेकिन मौजूदा हालात में भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी बने हुए हैं।

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