वित्त वर्ष 2022 में घाटे में रहने के बावजूद कई कंपनियों ने डिविडेंड की सिफारिश की है। हालांकि यह सिफारिश अभी शेयर धारकों की मंजूरी के अधीन है। इन कंपनियों में प्रमोटरों की हिस्सेदारी 38 फीसदी से 73 फीसदी है। इसका मतलब यह है कि लाभांश के इस ऐलान से प्रमोटरों को सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है।
