Daily Voice - मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर करें फोकस, लंबी अवधि में होगी जोरदार कमाई : विकास सचदेवा

ऑटो सेक्टर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस सेक्टर की बिक्री में आगे बढ़त कायम रहेगी। हमें ऑटो सेक्टर की उन कंपनियों पर नजर रखना चाहिए जो हायर वैल्यू प्रोडक्ट सेगमेंट और एक्सपोर्ट में ग्रोथ करती नजर आ रही हैं

अपडेटेड Jul 11, 2022 पर 4:55 PM
Emkay का मानना है कि अगले 5-10 साल उसी तरह मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के रहेंगे जिस तरह पिछले 2 दशक सर्विस सेक्टर के रहे थे

Emkay Investment Managers के सीईओ विकास एम सचदेवा ने बाजार और इकोनॉमी की आगे की दशा और दिशा पर मनीकंट्रोल से खास बातचीत की। इनका कहना है कि मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर अगले 5-10 सालों में एक बड़ा वेल्थ क्रिएटर साबित होगा। ऐसे में हमें इसके लिए अलग रणनीति की जरूरत होगी। Emkay का मानना है कि अगले 5-10 साल उसी तरह मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के रहेंगे जिस तरह पिछले 2 दशक सर्विस सेक्टर के रहे थे।

इस सेक्टर में किस थीम पर रहे नजर? इस सवाल का जवाब देते हुए विकास एम सचदेवा ने कहा कि इस समय हमारी नजर ऑटो OEM और बिल्डिंग मटेरियल से जुड़े स्टॉक्स पर है। इसके अलावा हम ऑटो एंसिलरी और फार्मा जैसे एक्सपोर्ट आधारित थीम पर भी फोकस कर रहे हैं।

इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि सरकार देश में रोजगार और ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए PLI जैसी स्कीम के जरिए मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए तमाम तरह के कर छूट भी दी जा रही है। ऐसे में अगले 5-10 साल में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में काफी तेजी से ग्रोथ होता नजर आएगा।


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ऑटो सेक्टर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस सेक्टर की बिक्री में आगे बढ़त कायम रहेगी। हमें ऑटो सेक्टर की उन कंपनियों पर नजर रखना चाहिए जो हायर वैल्यू प्रोडक्ट सेगमेंट और एक्सपोर्ट में ग्रोथ करती नजर आ रही हैं। ऑटो एंसिलरी स्टॉक भी निवेशकों के नजर में रहने चाहिए।

बढ़ती महंगाई और उससे जुड़ी चिंता पर बात करते हुए विकास सचदेवा ने कहा कि अब महंगाई का दबाव कुछ कम होता नजर आ रहा है। अधिकांश बेस मेटल 2021 के दूसरी छमाही के औसत से 10-12 फीसदी नीचे नजर आ रहे हैं। हमारा मानना है कि महंगाई का दबाव तेजी से कम हो रहा है। ये भारत जैसे बेसिक रॉ मटेरियल उपभोक्ताओं के लिए काफी अच्छी बात है। लेकिन रुपये की गिरावट चिंता का विषय है। इसमें अच्छी बात ये है कि कमोडिटी की कीमतों में एकाएक भारी गिरावट आई है जिससे रुपये की कमजोरी से हुए नुकसान की काफी भरपाई हो गई है।

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