हर किसी से स्टॉक टिप्स मांगना छोड़िए! इन 9 बातों को जानकर बन जाएंगे शेयर बाजार के बादशाह

अब आप भी यही सोच रहे होंगे कि क्या 5 अगस्त को आई गिरावट के बाद खरीदारी का बड़ा मौका है? या फिर उसके बाद आई तेजी में सभी शेयरों को बेचकर बाजार से बाहर निकल जाना चाहिए। आप क्या करेंगे ये आप हमें कॉमेंट बॉक्स में लिखकर बता सकते हैं और हम आपको बता रहे हैं कि ऐसे समय में जब कभी बाजार ऊपर तो कभी नीचे जा रहा है तो किन 8 चीजों का ध्यान रखना चाहिए।

अपडेटेड Aug 08, 2024 पर 1:08 AM
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अगर आपने मार्केट के मूड स्विंग को पहचान लिया है तो शेयर बाजार का बादशाह बन सकते हैं

अगर आपसे पूछा जाए कि शेयर बाजार में मोटी कमाई कैसे होती है? तो आप में से ज्यादातर लोगों का यही जवाब होगा कि शेयर खरीदने और बेचने से। लेकिन मशहूर निवेशक वॉरेन बफे ऐसा नहीं मानते। बफे का कहना है कि खरीदने और बेचने से नहीं, बल्कि असल में मोटी कमाई होती है इंतजार करने से। यह बिल्कुल ध्यान लगाकर मछली मारने जैसा है। आप पानी के बहाव को देखें , समझे और फिर उसके हिसाब से मौके की तलाश में बैठ जाएं।

अगर हम इसी बात को शेयर बाजार से जोड़कर देखें तो इसका मतलब ये है कि आपको पहले अपना होमवर्क करना है। फिर सही शेयर खरीदने हैं। और फिर कंपाउंडिंग रिटर्न के मैजिक से छोटे निवेश को बढ़ने का मौका देना है।

दूसरी स्ट्रैटेजी ये है कि आप निवेश करने के लिए सही मौके का इंतजार कर सकते हैं। आप खरीदारी तब करें जब बाजार में कोहराम मचा होता है। उस वक्त जब हर कोई बाजार से भागने की कोशिश कर रहा होता है और यही शेयर मार्केट में एंट्री का सही वक्त साबित होता है।


बाजार में कब करें खरीदारी?

अब आप भी यही सोच रहे होंगे कि क्या 5 अगस्त को आई गिरावट के बाद खरीदारी का बड़ा मौका है? या फिर उसके बाद आई तेजी में सभी शेयरों को बेचकर बाजार से बाहर निकल जाना चाहिए। आप क्या करेंगे ये आप हमें कॉमेंट बॉक्स में लिखकर बता सकते हैं और हम आपको बता रहे हैं कि ऐसे समय में जब कभी बाजार ऊपर तो कभी नीचे जा रहा है तो किन 8 चीजों का ध्यान रखना चाहिए।

क्या मार्केट में गिरावट बढ़ सकती है? 

पहला सवाल तो यही है कि क्या मार्केट में गिरावट बढ़ सकती है? फिलहाल बाजार पर तीन बुरी खबरों का असर दिख रहा है। पहला, अमेरिका में मंदी की आशंका, येन कैरी ट्रेड में अनवाइंडिंग। अनवाइंडिंग का मतलब है कि येन में कर्ज लेकर मार्केट में निवेश करने वाले निवेशक अब सौदा काटकर अपना कर्ज चुका रहे हैं। और बाजार पर असर डालने वाली तीसरी खबर है कि रूस और यूक्रेन के बीच लड़ाई और बढ़ सकती है और इसमें ईरान भी शामिल हो सकता है।

लेकिन अच्छी बात ये है कि इन तीनों चीजों में से किसी का सीधा असर भारत पर नहीं पड़ने वाला है। वैसे यह भी ध्यान रखना होगा कि इंडियन मार्केट्स ग्लोबल क्राइसिस से पूरी तरह से अछूता नहीं रह सकता। भले ही विदेशी निवेशकों का अब ज्यादा असर पड़ता नहीं दिख रहा लेकिन ग्लोबल ट्रेड, लॉजिस्टिक्स, मनी कॉस्ट और कमोडिटी की कीमतों का असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ना तय है। लिहाजा इसका असर शेयरों की कीमतों पर भी दिख सकता है।

क्या इससे इंडिया की ग्रोथ स्टोरी बेपटरी हो सकती है?

दूसरी बात ये है कि क्या इससे इंडिया की ग्रोथ स्टोरी बेपटरी हो सकती है? तो इसका जवाब नहीं है। इंडिया की इकोॉमिक ग्रोथ स्टोरी मजबूत बनी हुई है। इंडिया दुनिया में सबसे ज्यादा ग्रोथ वाली इकोनॉमी है। लेकिन, स्टॉक मार्केट हमेशा इकोनॉमी का आईना नहीं होता है। निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत है। वैश्विक हालात पर असर डालने वाली चीजों का असर ग्रोथ, इनफ्लशन और फॉरेन निवेश पर पड़ेगा। इससे इंडियन मार्केट्स भी प्रभावित हो सकता है।

ग्लोबल मार्केट्स में गिरावट आती है तो क्या इंडियन मार्केट्स भी गिरेंगे? 

तीसरी चीज है कि अगर ग्लोबल मार्केट्स में गिरावट आती है तो क्या इंडियन मार्केट्स भी गिरेंगे? निश्चित तौर पर ऐसा होगा लेकिन गिरावट बहुत ज्यादा नहीं रहेगी। दरअसल, इंडियन कंपनियों के प्रॉफिट पर उतना ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि हमारी इकोनॉमी का ज्यादा फोकस घरेलू फैक्टर्स पर है। इसके अलावा घरेलू निवेशकों की तरफ से विदेशी निवेशकों के मुकाबले ज्यादा लिक्विडिटी आ रही है।

क्या इस गिरावट पर खरीदारी करना चाहिए? 

चौथा और एक अहम सवाल ये है कि क्या इस गिरावट पर खरीदारी करना चाहिए? अगर आप कोविड महामारी का दौर याद करें तो तब से एक नया ट्रेंड शुरू हुआ है। ट्रेंड ये है कि हर गिरावट पर बाजार में खरीदारी हुई है। इंडियन स्टॉक्स आगे भी बेहतर रिटर्न दे सकते हैं। लेकिन, अभी वैल्यूएशन का जो लेवल है, उस पर खरीदारी बहुत अट्रैक्टिव नहीं है। लेकिन घबराहट में शेयरों को बेचने की गलती करना भी ठीक नहीं है।

क्या स्मॉलकैप शेयरों में निवेश बनाए रखना चाहिए?

ऐसे में आपके दिमाग में पांचवां सवाल भी आएगा कि क्या स्मॉलकैप शेयरों में निवेश बनाए रखना चाहिए? फिलहाल वैल्यूएशन देखेंगे तो स्मॉलकैप सेगमेंट के शेयर सस्ते नहीं रह गए हैं। कुछ शेयर तो बहुत महंगे हो गए हैं। निफ्टी 50 की वैल्यू ठीक लग रही है। लेकिन, मिडकैप स्टॉक्स और स्मॉलकैप स्टॉक्स की कीमतें आसमान में पहुंच गई हैं। इससे इनमें रिस्क दिख रहा है। कुछ स्टॉक्स में आगे अच्छी ग्रोथ स्टोरी दिख सकती है। लेकिन इनमें ज्यादा उतारचढ़ाव दिख सकता है। हालांकि, घबराहट में शेयरों को बेचने की जरूरत नहीं है। लेकिन, निवेशकों को ज्यादा सुरक्षित, कम उतारचढ़ाव वाले लॉर्जकैप स्टॉक्स में शिफ्ट होना ठीक रहेगा।

बाजार के उतारचढ़ाव में क्या आपको अपनी SIP रोक देनी चाहिए?

एक सवाल ये भी है कि क्या आपको अपनी SIP रोक देनी चाहिए? तो बाजार के तमाम उतारचढ़ाव के बावजूद ऐसा करने की गलती बिल्कुल मत कीजिएगा। शेयर अब भी सेविंग्स के लिए बहुत अच्छा जरिया हैं। शेयरों और रियल एस्टेट्स ने हमेशा लंबी अवधि में इनफ्लेशन के असर को एडजस्ट को करने के बाद काफी ज्यादा रिटर्न दिया है। छोटी अवधि के उतारचढ़ाव आते रहते हैं। लेकिन, लंबी अवधि की ग्रोथ पर इसका असर पड़ने वाला नहीं है।

किन शेयरों से दूर रहने की जरूरत है?

सातवां सवाल बहुत जरूरी है क्योंकि अगर आप इसे जान लेंगे तो लॉस से बच सकते हैं। यह सवाल है कि किन शेयरों से दूर रहने की जरूरत है? अभी निवेश के लिए ऐसे सेक्टर और शेयरों पर फोकस करने की जरूरत है, जिनका बिजनेस इंडिया से जुड़ा है और जिनकी निर्भरता एक्सपोर्ट पर नहीं है। डिफेंस और रेलवे स्टॉक्स बहुत महंगे हो गए हैं। उनमें बिकवाली की जा सकती है। आपको हर कंपनी की ग्रोथ की संभावनाओं को देखने के बाद निवेश का फैसला लेने की जरूरत है।

क्या गिरावट में एवरेजिंग करना चाहिए?

Last but not the least आठवां सवाल ये है कि क्या गिरावट में एवरेजिंग करना चाहिए? एवरेज करने में जोखिम होता है। अगर आप अपने स्टॉक को लेकर सुपर कॉन्फिडेंट है कि ये तो बाउंस बैंक करेगा ही. तभी आप उसमें एवरेजिंग करने का फैसला लें। लेकिन हर बार गिरावट पर हर शेयर में एवरेजिंग करने की भूल ना करें

 

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