Hyundai Motor: क्या 22 अक्टूबर को आई बड़ी गिरावट में हुंडई मोटर के आईपीओ का हाथ था? जानिए क्या है सच

हुंडई ने इंडिया का सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया था। यह 27,870 करोड़ रुपये का था। यह इश्यू 2.37 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसका मतलब है कि निवेशकों ने कुल 46,322 करोड़ रुपये इस इश्यू मे लगाए। Hyundai के इश्यू को सफल बनाने में क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (क्यूआईबी) का बड़ा हाथ रहा

अपडेटेड Oct 23, 2024 पर 1:42 PM
22 अक्टूबर को हुंडई के शेयरों की लिस्टिंग हुई। उस दिन Sensex 930 प्वाइंट्स गिरा।

स्टॉक मार्केट में जब भी बड़ी गिरावट आती है, उसकी वजह तलाशने की कोशिश शुरू हो जाती है। इस बार इंडियन मार्केट में आई बड़ी गिरावट के लिए प्राइमरी मार्केट (आईपीओ मार्केट) को वजह माना जा रहा है। इसमें पहला नाम हुंडई मोटर का है। कंपनी का स्टॉक इस हफ्ते स्टॉक मार्केट्स में लिस्ट हो गया है। हुंडई ने इंडिया का सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया था। यह 27,870 करोड़ रुपये का था। यह इश्यू 2.37 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसका मतलब है कि निवेशकों ने कुल 46,322 करोड़ रुपये इस इश्यू मे लगाए।

क्यूआईबी ने हुंडई के आईपीओ को डूबने से बचाया

Hyundai के इश्यू को सफल बनाने में क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (QIB) का बड़ा हाथ रहा। क्यूआईबी के लिए रिजर्व कोटा 6.97 गुना सब्सक्राइब हुआ था। रिटेल इनवेस्टर्स ने इस इश्यू में दिलचस्पी नहीं दिखाई। उनका कोटा सिर्फ 50 फीसदी सब्सक्राइब हुआ था।


रिटेल इनवेस्टर्स ने दिखाई होशियारी

रिटेल इनवेस्टर्स का यह रिस्पॉन्स चौंकाने वाला है। इससे पहले आए आईपीओ में उनकी अच्छी दिलचस्पी दिखी थी। हालांकि, उम्मीद के मुताबिक, हुंडई के स्टॉक की लिस्टिंग 22 अक्टूबर को डिस्काउंट पर हुई। पहले दिन यह करीब 7 फीसदी गिरकर बंद हुआ। रिटेल इनवेस्टर्स और नॉन-रिटेल इनवेस्टर्स के हुंडई के आईपीओ में दिलचस्पी नहीं दिखाने की क्या वजह हो सकती है? ऐसा लगता है कि रिटेल इनवेस्टर्स ने Paytm और LIC के आईपीओ से सबक लिया है। इन कंपनियों के आईपीओ की मार्केट में बहुत चर्चा थी। लेकिन, दोनों की लिस्टिंग कमजोर हुई थी। इतना ही नहीं लिस्टिंग के बाद भी शेयरों का प्रदर्शन लंबे समय तक कमजोर था। इससे निवेशकों को काफी मायूसी हुई थी।

फॉरेन स्टॉक मार्केट्स में भी ऐसा हो चुका है

हुंडई के आईपीओ पर मार्केट सेंटिमेंट का भी असर पड़ा। जिस दिन हुंडई के शेयरों की लिस्टिंग हुई, उस दिन Sensex 930 प्वाइंट्स गिरा। बड़े आईपीओ के दौरान मार्केट में गिरावट का यह मामला सिर्फ इंडिया में नहीं है। अमेरिका में Facebook के शेयरों को लिस्टिंग के बाद काफी संघर्ष करना पड़ा था। इसी तरह दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने वाली Saudi Aramco को भी लिस्टिंग के बाद बिकवाली दबाव का सामना करना पड़ा था। इससे यह पता चलता है कि बड़ी कंपनियों के आईपीओ का मार्केट पर बड़ा असर पड़ता है।

मार्केट पर क्यों पड़ता है बड़े आईपीओ का असर?

किसी बड़ी कंपनी का आईपीओ आने पर फंड मैनेजर्स और इनवेस्टर्स को पैसे का इंतजाम करना पड़ता है। इसके लिए वे कई बार कुछ कंपनियों के शेयरों को शेयरों को बेच देते हैं। कई बार उन्हें अपने इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में भी बड़े बदलाव करने पड़ते हैं। इससे नई कंपनी को तो पूंजी मिल जाती है लेकिन कई दूसरी कंपनियों के शेयरों को बिकवाली दबाव का सामना करना पड़ता है। हुंडई के मामले में असर ऑटो सेक्टर पर पड़ा। ऑटो इंडेक्स सितंबर के अंत के अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 12 फीसदी गिर गया। इस दौरान निफ्टी में करीब 9.3 फीसदी गिरावट आई।

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आगे आने वाले हैं ये बड़े आईपीओ

आगे Swiggy, NSDL और NTPC Green Energy जैसे बड़े आईपीओ आने वाले हैं। हुंडई के आईपीओ को मिले रिस्पॉन्स के बाद इन कंपनियों के आईपीओ के एडवाइजर्स को अपनी स्ट्रेटेजी के बारे में सोचना होगा। वे मार्केट में रिकवरी लौटने तक इंतजार करने का फैसला ले सकते हैं। इतना तय है कि आईपीई को प्रदर्शन निराशाजनक रहने का असर पूरे मार्केट पर पड़ता है।

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