दक्षिण कोरिया की कंपनी हुंडई ने अपनी इंडियन सब्सिडियरी हुंडई मोटर इंडिया के आईपीओ पर 624 करोड़ रुपये खर्च किए। यह इंडिया में किसी कंपनी के आईपीओ पर खर्च किया गया सबसे ज्यादा अमाउंट है। हुंडई मोटर कंपनी का आईपीओ 27,855 करोड़ रुपये का था। हुडंई मोटर के शेयर 22 अक्टूबर को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट हो गए। उम्मीद के मुताबिक, शेयरों की लिस्टिंग डिस्काउंट के साथ हुई। उसके बाद शेयरों में तेज गिरावट दिखी। दोपहर बाद कंपनी का शेयर 7 फीसदी गिर चुका था।
इनवेस्टमेंट बैंकर्स को मिले 493 करोड़
हुंडई (Hyundai) ने आईपीओ के साइज का 2.24 फीसदी खर्च इसके प्रबंधन और दूसरी चीजों पर खर्च किया। इसमें कई तरह की फीस शामिल हैं। कंपनी की तरफ से फाइल फाइनल डॉक्युमेंट से यह जानकारी मिली है। ऐसे में लगता है कि इस आईपीओ से सबसे ज्यादा फायदा इनवेस्टमेंट बैंकर्स को हुआ है। उन्हें इंडिया के इस सबसे बड़े आईपीओ के प्रबंधन के लिए 493 करोड़ रुपये मिले। इस आईपीओ के मर्चेंट बैंकर्स में Kotak Mahindra Capital, Citigroup, HSBC, JP Morgan और Morgan stanley शामिल थे।
पेटीएम ने खर्च किए थे 411 करोड़
हुंडई ने आईपीओ पर जो कुल पैसे खर्च किए उसमें बैंकर्स को चुकाई गई फीस की हिस्सेदारी 79 फीसदी रही। रेगुलेटरी फाइलिंग और लिस्टिंग फीस पर 45 करोड़ रुपये खर्च हुए। एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग पर 25 करोड़ रुपये खर्च हुए। ऑडिटर्स को 13 करोड़ रुपये की फीस चुकाई गई। खास बात यह है कि हुंडई ने इससे पहले आए आईपीओ के मुकाबले काफी ज्यादा फीस चुकाई। पेटीएम ने 18,300 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था। सितंबर 2021 में आए इस आईपीओ के लिए उसने 411.5 करोड़ रुपये की फीस चुकाई थी।
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LIC ने चुकाए थे सिर्फ 119 करोड़
LIC ने 21,000 करोड़ रुपये का आईपीओ मई 2022 में पेश किया था। उसने आईपीओ पर सिर्फ 119.5 करोड़ रुपये खर्च किए थे। यह फीस पेटीएम और हुंडई के मुकाबले काफी कम थी। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टमेंट बैंकर्स सरकारी कंपनियों के आईपीओ के प्रबंधन के लिए काफी कम फीस लेते हैं। एलआईसी ने इनवेस्टमेंट बैंकर्स को सिर्फ 11.8 करोड़ रुपये चुकाए थे। इसके मुकाबले पेटीएम को 323.9 करोड़ रुपये चुकाने पड़े थे।