IDBI बैंक में विनिवेश की प्रक्रिया फिर से पटरी पर आ सकती है। कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की अगुवाई वाली फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स और डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट्स मैनेजमेंट (DIPAM) के बीच नई बातचीत के बाद ऐसी उम्मीद जगी है। संभावित सौदे की जानकारी रखने वाले कई लोगों का कहना है कि फेयरफैक्स ने एक नई बोली लगाई है और साथ ही IDBI बैंक को फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में अपना 'एंकर इनवेस्टमेंट' बनाने का प्रस्ताव भी दिया है।
बातचीत की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने मनीकंट्रोल को बताया, "संशोधित प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है और सौदा सही दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।" हालांकि सौदे के पूरा होने की सटीक समय-सीमा स्पष्ट नहीं है, लेकिन संबंधित लोगों का कहना है कि विनिवेश प्रक्रिया सितंबर तक पूरी हो सकती है। या फिर ऐसा उससे भी जल्दी हो सकता है।
इस सौदे से सरकार और LIC, दोनों मुख्य शेयरधारकों को लगभग 50,000 करोड़ रुपये या 5 अरब डॉलर से कुछ अधिक मिलने की संभावना है। संबंधित लोगों का कहना है कि हो सकता है कि फेयरफैक्स ने प्रति शेयर लगभग 77 रुपये की बोली लगाई हो। इसका मतलब है कि पिछले 12 महीनों के आंकड़ों के आधार पर 'प्राइस-टू-बुक मल्टीपल' 1.2 गुना है, जो शेयर बाजार में IDBI बैंक के मौजूदा मल्टीपल (1.3 गुना प्राइस-टू-बुक) से बहुत अलग नहीं है। बुधवार को कारोबार बंद होने पर IDBI बैंक के शेयर की कीमत 86.95 रुपये थी।
CSB बैंक में फेयरफैक्स बेच सकती है हिस्सेदारी
संबंधित लोगों का यह भी कहना है कि फेयरफैक्स ने प्रतिबद्धता जताई है कि बैंकिंग क्षेत्र में IDBI बैंक ही उसका एकमात्र निवेश होगा। नतीजतन, IDBI बैंक का अधिग्रहण करने पर वह CSB बैंक में अपनी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी पूरी तरह से बेच देगी। RBI के नियमों का पालन करने के लिए यह जरूरी है। नियमों के तहत कोई प्रमोटर दो बैंकिंग लाइसेंस नहीं रख सकता है। CSB बैंक के मुकाबले IDBI बैंक एक बड़ी कंपनी है, इसलिए माना जा रहा है कि फेयरफैक्स ने तय किया है कि खरीद पूरी होने के बाद वह सिर्फ IDBI बैंक को ही अपने पास रखेगी।
फेयरफैक्स ने 2018 में CSB बैंक (जिसे तब कैथोलिक सीरियन बैंक के नाम से जाना जाता था) को बचाने के लिए एक बेलआउट डील के तहत 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। एक साल बाद बैंक को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया गया।
IDBI बैंक की बनी रहेगी पहचान
पूरी तरह से कैश में होने वाली इस डील के बारे में फेयरफैक्स ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि अधिग्रहण के बाद वह IDBI बैंक की पहचान बरकरार रखेगी। साथ ही भारत के फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में बैंक को अपना मुख्य निवेश बनाएगी। ऐसे में फेयरफैक्स के दो बड़े नॉन-लेंडिंग बिजनेस- GoDigit जनरल इंश्योरेंस और IIFL कैपिटल सर्विसेज के IDBI बैंक की सब्सिडियरी बन जाने की संभावना है।
मार्च में रद्द हो गया था सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री का प्लान
इस साल मार्च महीने की शुरुआत में
IDBI Bank में प्रस्तावित शेयर बिक्री को रद्द कर दिया गया था। इसकी वजह यह रही कि कथित तौर पर दो संभावित खरीदारों की वित्तीय बोलियां, रिजर्व प्राइस से कम थीं। ये संभावित खरीदार एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स थे। मई महीने में ब्लूमबर्ग के हवाले से खबर आई कि केंद्र सरकार IDBI बैंक लिमिटेड में अपनी ज्यादातर हिस्सेदारी बेचने की कवायद में संभावित खरीदारों की दिलचस्पी फिर से जगाने के तरीके तलाश रही है। एक तरीका यह है कि रिजर्व प्राइस को 20 प्रतिशत तक कम कर दिया जाए। अप्रैल में खबर आई कि सरकार नए सिरे से IDBI Bank की वैल्यूएशन को आंक रही है।