IDBI Bank Stake Sale: खरीदारों की दिलचस्पी फिर से जगाने के तरीके तलाश रही सरकार, क्या ​रिजर्व प्राइस होगा कम?

IDBI Bank Stake Sale: इस साल मार्च महीने की शुरुआत में इस प्रस्तावित बिक्री को रद्द कर दिया गया। दो संभावित खरीदारों की वित्तीय बोलियां, रिजर्व प्राइस से कम थीं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अप्रैल में कहा था कि अधिकारी IDBI Bank में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया जारी रखेंगे

अपडेटेड May 18, 2026 पर 4:12 PM
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सरकार IDBI Bank में अपनी हिस्सेदारी लंबे वक्त से कम करना चाहती है।

केंद्र सरकार IDBI बैंक लिमिटेड में अपनी ज्यादातर हिस्सेदारी बेचने की कवायद में संभावित खरीदारों की दिलचस्पी फिर से जगाने के तरीके तलाश रही है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, मामले की जानकारी रखने वालों का कहना है कि एक तरीका यह है कि रिजर्व प्राइस को 20 प्रतिशत तक कम कर दिया जाए। बैंक में सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री की पिछली कोशिश में खरीदारों ने हिचकिचाहट दिखाई थी और वह राउंड मार्च में रद्द कर दिया गया था।

सरकार IDBI Bank में अपनी हिस्सेदारी लंबे वक्त से कम करना चाहती है। विनिवेश के तहत सरकार IDBI Bank में अपनी और LIC की हिस्सेदारी में से 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहती है। इस साल मार्च महीने की शुरुआत में इस प्रस्तावित बिक्री को रद्द कर दिया गया। इसकी वजह यह रही कि कथित तौर पर दो संभावित खरीदारों की वित्तीय बोलियां, रिजर्व प्राइस से कम थीं। ये संभावित खरीदार एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स थे।

अभी तक कभी भी मिनिमम रिजर्व प्राइस नहीं हुआ पब्लिक


ब्लूमबर्ग के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि डील को मुमकिन बनाने के लिए कोशिशें चल रही हैं। इसमें एक ऐसा प्राइस तय करना भी शामिल है, जो बैंक की असल कीमत को दर्शाता हो और उसके शेयर प्राइस पर निर्भरता कम करता हो। हालांकि ये विकल्प अभी शुरुआती दौर में हैं और इनमें बदलाव हो सकता है। सरकार ने अभी तक कभी भी IDBI Bank में सरकारी हिस्सेदारी को कम करने की कोशिश के तहत मिनिमम रिजर्व प्राइस सार्वजनिक नहीं किया है। यह भी कहा जा रहा है कि अधिकारियों ने इच्छुक बोलीदाताओं के साथ बिक्री प्रक्रिया फिर से शुरू करने का इरादा भी जाहिर किया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अप्रैल में कहा था कि अधिकारी IDBI Bank में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया जारी रखेंगे। वर्तमान में IDBI Bank में पब्लिक शेयरहोल्डिंग केवल 5.29 प्रतिशत है। सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसका बैंक पर नियंत्रण है। वहीं, भारत सरकार की हिस्सेदारी 45.48 प्रतिशत है। सरकार का प्लान IDBI Bank में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का था। वहीं LIC, बैंक में 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही थी।

जनवरी 2019 में LIC ने IDBI Bank को भारी खराब ऋणों (bad loans) से बचाने के लिए लगभग 21,624 करोड़ रुपये में सरकार से 51 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की थी। इसके बाद बैंक प्राइवेट सेक्टर का बैंक बन गया। दिसंबर 2020 में बैंक में LIC की हिस्सेदारी घटकर 49.24 प्रतिशत हो गई।

कोटक महिंद्रा बैंक ने पहले दिखाई थी दिलचस्पी, फिर नहीं लगाई बोली

विनिवेश की पिछली कोशिश में कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड ने शुरू में IDBI बैंक में दिलचस्पी दिखाई थी। लेकिन फिर ज्यादा वैल्यूएशन का हवाला देते हुए बोली नहीं लगाई। अब अधिकारी इस बात का आकलन कर रहे हैं कि क्या इस प्रक्रिया में और बोली लगाने वालों को शामिल किया जा सकता है। हालांकि ऐसा करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से नए सिरे से 'फिट-एंड-प्रॉपर' मंजूरी लेनी पड़ सकती है। इससे समय-सीमा आगे बढ़ सकती है।

अप्रैल में यह भी खबर आई थी कि सरकार नए सिरे से IDBI Bank की वैल्यूएशन को आंक रही है। विनिवेश की प्रक्रिया में बैंक के शेयर की कीमतों में आई भारी गिरावट भी एक बाधा है। इस गिरावट ने सरकार के लिए मोलभाव करने की गुंजाइश को काफी कम कर दिया है। शेयर एक साल में 19 प्रतिशत और 3 महीनों में लगभग 40 प्रतिशत नीचे आया है।

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कब से अटका है प्राइवेटाइजेशन

सरकार ने सबसे पहले साल 2016 में घोषणा की थी कि वह IDBI Bank का प्राइवेटाइजेशन करना चाहती है। यह विचार सबसे पहले फरवरी 2016 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केंद्रीय बजट भाषण में आधिकारिक तौर पर दिया था। बैंक में सरकारी हिस्सेदारी कम करने की पहली को​शिश मूल्यांकन संबंधी चिंताओं के कारण नाकाम हो गई थी। फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी 2020 में वित्त वर्ष 2021 का बजट पेश करते हुए बैंक में सरकारी हिस्सेदारी और कम करने का प्रपोजल रखा।

IDBI Bank के प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया को औपचारिक गति तब मिली, जब आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मई 2021 में बैंक में मैनेजमेंट कंट्रोल के ट्रांसफर के साथ-साथ रणनीतिक विनिवेश के लिए अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दी। सरकार ने अक्टूबर, 2022 में LIC के साथ मिलकर इस बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (EoI) आमंत्रित किए। अक्टूबर 2022 में ही KPMG India को लेनदेन सलाहकार (Transaction Advisor) नियुक्त किया गया। फरवरी 2026 में एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स से वित्तीय बोलियां मिलीं।

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