IDFC फर्स्ट बैंक का बड़ा कदम! ₹590 करोड़ के फ्रॉड के बाद बड़े बदलावों की तैयारी, लागू होंगे ये नियम

IDFC फर्स्ट बैंक ने सोमवार 23 फरवरी को बताया कि वह खातों से अनाधिकृत निकासी को रोकने के लिए हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर एक नया और अनिवार्य नियंत्रण सिस्टम लागू करेगा। इसके तहत बैंक अब तय सीमा से ऊपर के लेनदेन पर ग्राहक से डिजिटल नजरिए से स्पष्ट मंजूरी लेगा

अपडेटेड Feb 23, 2026 पर 3:57 PM
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IDFC फर्स्ट बैंक के CEO वी वैद्यनाथन ने बताया कि अब बड़े ट्रांजैक्शन के लिए केवल फोन कॉल पर भरोसा नहीं किया जाएगा

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) ने सोमवार 23 फरवरी को बताया कि वह खातों से अनाधिकृत निकासी को रोकने के लिए हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर एक नया और अनिवार्य नियंत्रण सिस्टम लागू करेगा। इसके तहत बैंक अब तय सीमा से ऊपर के लेनदेन पर ग्राहक से डिजिटल नजरिए से स्पष्ट मंजूरी लेगा। यह फैसला हाल ही में सामने आए 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड मामले के बाद लिया गया है।

कैसे काम करेगा नया सिस्टम?

एनालिस्ट्स के साथ एक कॉन्फ्रेंस कॉल में बैंक के CEO वी वैद्यनाथन ने बताया कि अब बड़े ट्रांजैक्शन के लिए केवल फोन कॉल पर भरोसा नहीं किया जाएगा। अगर कोई हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन क्लियर करना होगा, तो ग्राहक को बैंक के आधिकारिक मोबाइल ऐप में लॉग-इन करके उसे स्पष्ट रूप से मंजूरी देनी होगी।

ग्राहक की पुष्टि एक सत्यापित डिजिटल चैनल के जरिए एक तय समय सीमा के भीतर दर्ज की जाएगी। यह प्रक्रिया अनिवार्य होगी। उन्होंने कहा कि यह अतिरिक्त सुरक्षा परत अनधिकृत डेबिट के जोखिम को कम करेगी।


AI और इंसान, जांच में दोनों होंगे शामिल

बैंक ने बताया कि एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम भी लगाया जाएगा। यह सिस्टम सिग्नेचर वेरिफिकेशन और अन्य असामान्य गतिविधियों की पहचान करेगा। AI के जरिए जांच के बाद मानव स्तर पर भी पुष्टि की जाएगी। वी वैद्यनाथन ने कहा कि हाल की घटना से सबक लेते हुए बैंक अपनी इनटरनल सिस्टम को और मजबूत करेगा।

₹590 करोड़ का फ्रॉड मामला

बैंक ने वीकेंड में खुलासा किया था कि चंडीगढ़ की एक शाखा से जुड़े हरियाणा सरकार के खातों में करीब 590 करोड़ रुपये का फ्रॉड सामने आया है। इस मामले के बाद हरियाणा सरकार ने बैंक को अपने पैनल से हटा दिया। इसके चलते करीब 200 करोड़ रुपये का आउटफ्लो हुआ।

बैंक ने जांच शुरू कर दी है। चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है। मामले को बोर्ड की विशेष समिति के सामने रखा गया है। स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट के लिए KPMG को नियुक्त किया गया है।

बैंक का प्रदर्शन

वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में IDFC फर्स्ट बैंक ने 479 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया। यह पिछले साल की समान तिमाही से 41% ज्यादा है। रेवेन्यू 10,417 करोड़ रुपये रहा। इसमें 11% की बढ़त हुई। हालांकि, फ्रॉड मामले के बाद शेयरों पर दबाव बना हुआ है। दोपहर 1:30 बजे के करीब, बीएसई पर बैंक का शेयर करीब 16% गिरकर 70.55 रुपये पर कारोबार कर रहा था।

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