इंडियन स्टॉक मार्केट (India Stock Market) के लिए संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। इसमें और 1000 अंक की गिरावट आ सकती है। क्रेडिट सुइस में वेल्थ मैनेजमेंट के डायरेक्टर-इक्विटी रिसर्च हेड जितेंद्र गोहिल ने यह अनुमान जताया है। उन्होंने CNBC-TV18 से बातचीत में यह आशंका जताई।
गोहिल ने कहा कि अगर अमेरिकी की अर्थव्यवस्था मंदी में जाती है तो उसका असर इंडियन मार्केट पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर क्रूड ऑयल के प्राइस 140-150 डॉलर प्रति बैरल को पार कर जाता है तो बाजार में तेज गिरावट आ सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इसकी आशंका बहुत कम दिखाई देती है।
गोहिल ने कहा, "क्रूड ऑयल की कीमत सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है। इसके 140 डॉलर पहुंचने का अनुमान नहीं है।" उन्होंने कहा कि इंडिया में वैल्यूएशन अहम फैक्टर बनने जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगले दो या तीन साल के लिहाज से देखने पर इंडिया की स्थिति बहुत अच्छी दिखाई देती है। कंपनियों की बुनियादी स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि आगे इंडियन मार्केट की वैल्यूएशन बहुत अहम होगी। यह थोड़े ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है। अगर हम और गिरावट देखते हैं तो यह बाजार में एंट्री का सही समय हो सकता है।"
उन्होंने कहा, "रिस्क यह है कि अगर ऑयल का प्राइस 140 या 150 डॉलर को पार कर जाता है या अमेरिकी इकोनॉमी गहरी मंदी में जाती है तो इंडियन मार्केट में 1000 अंक की गिरावट आ सकती है।" गोहिल का यह बयान बाजार में बड़ी गिरावट के दो हफ्ते बाद आया है। 13 जून को आई गिरावट में इनवेस्टर्स को करीब 7 लाख करोड़ रुपये का लॉस हुआ था।
सेंसेक्स और निफ्टी 18 अक्टूबर, 2021 को क्रमश: 61,765 और 18,477 अंक की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। तब से दोनों सूचकांक 15 फीसदी तक गिर चुके हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह FII की बिकवाली है।
FII पिछले साल अक्टूबर से लगातार इंडियन स्टॉक मार्केट में बिकवाली कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने 32 अरब डॉलर मूल्य के शेयर बेचे हैं। इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 2.93 लाख करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं।
हालांकि, पिछले हफ्ते से बाजार का रुख बदला है। पिछले हफ्ते बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली। तेजी का सिलिसिला सोमवार को भी जारी रहा। बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक अच्छी तेजी के साथ बंद हुए।