नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप पहली बार 4 लाख करोड़ डॉलर (334.72 लाख करोड़ रुपये) के पार पहुंच गया है। बीते शुक्रवार को निफ्टी ने अपने अब तक के रिकॉर्ड हाई को छू लिया था। बेंचमार्क निफ्टी शुक्रवार को 134.75 अंक यानी 0.67 फीसदी चढ़कर 20,267.90 के रिकॉर्ड हाई पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी ने रिकॉर्ड स्तर 20,291.55 को भी छू लिया। तेजी के इस दौर में निफ्टी-500 इंडेक्स भी 18,141.65 के रिकॉर्ड हाई तक पहुंचा। यह दर्शाता है कि शेयर बाजार में तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक ही सीमित नहीं है।
NSE ने रविवार को एक बयान में कहा, "यह बड़ी उपलब्धि ‘अमृत काल’ के नजरिए का एक प्रमाण है जिसमें मजबूत पब्लिक फाइनेंस के साथ टेक्नोलॉजी और नॉलेज-बेस्ड इकोनॉमी और एक मजबूत फाइनेंशियल सेक्टर शामिल है।” बयान के अनुसार एनएसई में लिस्ट कंपनियों का मार्केट कैप दो लाख करोड़ डॉलर (जुलाई 2017 में) से तीन लाख करोड़ डॉलर (मई 2021 में) तक पहुंचने की यात्रा 46 महीनों में पूरी हुई थी। वहीं तीन लाख करोड़ डॉलर से चार लाख करोड़ डॉलर तक का सफर सिर्फ 30 महीने में ही पूरा हो गया।
NSE के चीफ बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर ने क्या कहा?
NSE के चीफ बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर श्रीराम कृष्णन ने कहा, "NSE में लिस्ट कंपनियों का मार्केट कैप चार लाख करोड़ डॉलर से अधिक होना देश की अर्थव्यवस्था के पांच लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचने के सफर में एक अहम पड़ाव है। अर्थव्यवस्था में पॉजिटिव सेंटीमेंट ने कैपिटल मार्केट को गति प्रदान की है।”
बीएसई पर भी मार्केट वैल्यूएशन में उछाल
इसके पहले 29 नवंबर को बीएसई पर भी सभी लिस्टेड कंपनियों का संयुक्त मार्केट वैल्यूएशन पहली बार चार लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गया था। एनएसई ने कहा कि लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप पिछले 10 वर्षों में 17.5 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है।
मार्केट वैल्यूएशन के हिसाब से टॉप तीन कंपनियों- रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और एचडीएफसी बैंक ने अपना मूल्यांकन उस समय भी बरकरार रखा जब एनएसई का मूल्यांकन दो लाख करोड़ डॉलर, तीन लाख करोड़ डॉलर और चार लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचा।
NSE ने कहा, "मार्केट कैप के हिसाब से भारत टॉप पांच देशों में से एक है। लेकिन एनएसई पर लिस्टेड कंपनियों का बाजार पूंजीकरण देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.18 यानी 118 फीसदी है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान जैसे विकसित बाजारों की तुलना में कम है।”