Global Economy vs India: यूरोपीय सेंट्रल बैंक के पूर्व अध्यक्ष जॉन-क्लाउड ट्रिसेट ने भारत के आर्थिक भविष्य को लेकर एक बड़ा पॉजिटिव बयान दिया है। नई दिल्ली में आयोजित 'कौटिल्य इकोनॉमिक एन्क्लेव' के दौरान मनीकंट्रोल से खास बातचीत में ट्रिसेट ने कहा कि वह पूरी दुनिया की तुलना में भारत के आर्थिक भविष्य को लेकर अधिक आशावादी और पॉजिटिव हैं। उनके मुताबिक, भारत के पास 'मिडिल-इनकम ट्रैप' में फंसे बिना आर्थिक रूप से आगे बढ़ने और वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' बनने के अपने लक्ष्य को हासिल करने के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था से बेहतर स्थिति में भारत
दुनियाभर की मंदी और अनिश्चितता के बीच पूर्व ECB चीफ ने भारत की आर्थिक सुधारों की यात्रा और मजबूत विकास दर की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, 'अगर मैं भारत की बात करूं तो मैं बहुत पॉजिटिव हूं। बाकी दुनिया की तुलना में मैं भारत को लेकर ज्यादा सकारात्मक दृष्टिकोण रखता हूं। हाल के वर्षों में भारत द्वारा किए गए आर्थिक सुधार बिल्कुल सही दिशा में हैं और देश का ग्रोथ रिकॉर्ड यह साबित करता है कि भारत में कुछ बड़ा घटित हो रहा है।'
मिडिल-इनकम ट्रैप से दूर है भारत
विकासशील देशों के सामने अक्सर 'मिडिल-इनकम ट्रैप' यानी वह स्थिति जहां देश एक निश्चित आय स्तर पर पहुंचकर रुक जाते हैं और विकसित नहीं बन पाते का खतरा रहता है। लेकिन ट्रिसेट का मानना है कि भारत इस जाल में फंसे बिना तेजी से आगे बढ़ सकता है। उनके अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था के पास अभी कैच-अप करने यानी विकसित देशों की बराबरी करने के लिए बहुत गुंजाइश है।
भारत की सबसे बड़ी ताकत: 'ह्यूमन कैपिटल और ब्रेन पावर'
भारत के दीर्घकालिक विकास को लेकर अपने भरोसे का सबसे बड़ा कारण बताते हुए ट्रिसेट ने देश के मानव संसाधन की सराहना की। उन्होंने कहा, 'भारत के पास इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और अत्यधिक कुशल पेशेवरों का विशाल खजाना है, जो लंबे समय तक देश की समृद्धि को बनाए रखेगा'।
दुनिया की शीर्ष वैश्विक कंपनियों और टेक सेंटरों में शीर्ष पदों पर बैठे भारतीय मूल के एग्जीक्यूटिव्स और इंजीनियर्स भारत की इस प्रतिभा का जीवंत प्रमाण हैं। साथ ही भारत के लोकतांत्रिक संस्थान, राजनीतिक स्थिरता और पिछले कुछ वर्षों में किए गए रिफॉर्म्स भारत के लिए सबसे बड़े लॉन्ग-टर्म एडवांटेज हैं।
2047 के लक्ष्य में 'वैश्विक अव्यवस्था' बनी बड़ी चुनौती
हालांकि, 2047 तक विकसित भारत बनने के सफर पर बात करते हुए ट्रिसेट ने आगाह भी किया। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वैश्विक अर्थव्यवस्था किस दिशा में जाती है।
अगर दुनिया नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को छोड़कर आक्रामक शक्ति-राजनीति की तरफ बढ़ती है, तो यह हर देश के लिए जोखिम भरा होगा। वर्तमान वैश्विक अर्थव्यवस्था में 'अनिश्चितता' एक मुख्य विशेषता बन गई है। भारत के लक्ष्य की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता कब लौटती है।
रणनीतिक स्वतंत्रता ही भारत का सही रास्ता
दुनियाभर में व्यापार, वित्त और सप्लाय चेन के भू-राजनीतिक हथियार बनने पर ट्रिसेट ने भारत की विदेश और आर्थिक नीति का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रमुख वैश्विक शक्तियों के बीच गुटबाजी में शामिल होने के बजाय अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता को बनाए रखना ही भारत का स्वाभाविक और सबसे सही रास्ता है।
यूरोप का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह यूरोप अपने आर्थिक हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करता है, ठीक उसी तरह भारत भी इस अनिश्चितता भरी दुनिया में अपना स्वतंत्र और मजबूत रास्ता बनाने में सक्षम है।