JUNE Services PMI: 3 जुलाई को जारी एक प्राइवेट सर्वे के मुताबिक नए ऑर्डरों में बढ़त और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में होने वाली बिक्री में आई तेजी के कारण भारत के सर्विस सेक्टर की गतिविधि जून में 60.5 के स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले महीने के पांच महीने के निचले स्तर 60.2 से ज्यादा है। गौरतलब है कि एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स 2024 की शुरुआत से 60 अंक से ऊपर बना हुआ है।
बता दें कि 50 का स्तर सर्विसेज गतिविधि में विस्तार और संकुचन के विभाजक रेखा का काम करता है। यानी सर्विसेज PMI की 50 से ऊपर की रीडिंग सर्विस सेक्टर की गतिविधि में विस्तार का संकेत देती है। जबकि 50 से नीचे की रीडिंग सर्विस सेक्टर की गतिविधि में संकुचन का संकेत होती है।
कंपोजिट PMI 60.5 से बढ़कर 60.9 पर आई
जून में कंपोजिट PMI 60.5 से बढ़कर 60.9 पर आ गई है। बता दें कि कम्पोजिट पीएमआई, सर्विसेज PMI और मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई का योग होती है।
जून में रोजगार सृजन की गति करीब दो साल में सबसे तेज स्तर पर रही
एचएसबीसी के अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, "भारत के सर्विस सेक्टर की गतिविधि में जून में बढ़त हुई है। ये इंडेक्स 0.3 अंक बढ़कर 60.5 पर आ गया है। इसका कारण घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों ऑर्डरों में हुई बढ़त रही।" बेहतर मांग की वजह से भी कंपनियों को भर्ती बढ़ाने में मदद मिली और जून में रोजगार सृजन की गति करीब दो साल में सबसे तेज स्तर पर पहुंच गई।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ताजे आंकड़ों से पता चलता है कि जूनियर, मध्यम और वरिष्ठ स्तर के पदों के लिए शॉर्ट-टर्म और स्थायी नियुक्तियों का दोनों की देखने को मिली हैं। नई भर्तियों से कंपनियों पर लागत का बोझ बढ़ गया, लेकिन अच्छी बात ये है कि इनपुट महंगाई चार महीने के निचले स्तर पर आ गई।
चार्ज इंफ्लेशन की दर मध्यम स्तर पर रही
इसके अलावा, केवल 5 फीसदी सर्विस सेक्टर की कंपनियों ने लागत का बोझ ग्राहकों पर डाला, जिससे चार्ज इंफ्लेशन की दर मध्यम स्तर पर रही। हालांकि बाजार की अनिश्चितता और प्रतिस्पर्धा से जुड़ी चिंताओं के कारण सेंटिमेंट 11 महीने के निचले स्तर पर आ गया।
निर्यात ऑर्डरों में तेज बढ़त
इंडेक्स के लिए किए गए सर्वे में शामिल 400 सर्विस सेक्टर की कंपनियों ने निर्यात ऑर्डरों में तेज बढ़त की जानकारी दी। ये ऑर्डर एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व और अमेरिका से आ रहे हैं।
वित्त वर्ष 2024 में सेवाओं का निर्यात करीब 5 फीसदी बढ़कर 341.1 बिलियन डॉलर पर रहा है। जबकि वस्तुओं का निर्यात वित्त वर्ष 2023 के स्तर से थोड़ा कम रहा है। इस साल सेवाओं के निर्यात में और बढ़त होने की संभावना है और सरकार 2030 तक इसे 1 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
2 जुलाई को NCAER के एक कार्यक्रम में IMF के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरींचस ने कहा कि भारत का सेवा निर्यात कमजोर हो रही ग्लोबल अर्थव्यवस्था के लिए सहारा बनेगा।