Stock Market : भारतीय शेयर बाजार का मार्केट कैप पिछले पांच सालों में दोगुना हो गया है। इसके साथ ही, यह हांगकांग के मार्केट कैप के करीब पहुंच गया है और जल्द ही उसकी जगह लेने के लिए तैयार है। भारत की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप अक्टूबर के अंत में 3.7 लाख करोड़ डॉलर है, जबकि हांगकांग का 3.9 लाख करोड़ डॉलर है। वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।
इस साल अब तक देश के प्रमुख शेयर बाजार S&P BSE सेंसेक्स में 14 फीसदी और निफ्टी 50 में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, दूसरी ओर हांगकांग के बेंचमार्क Hang Seng index में 17 फीसदी की गिरावट आई है।
हांगकांग के एक्सचेंजों में गिरावट की क्या है वजह
चीन के बिगड़ते रियल एस्टेट सेक्टर के बीच हांगकांग के एक्सचेंजों में यह मंदी आई है। इससे ब्रॉडर इकोनॉमी के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। कोविड के तीन सालों के बाद दुनिया भर में हायर इंटरेस्ट रेट्स, बढ़ी हुई मुद्रास्फीति, सुस्त विदेशी निवेश और हाउसिंग मार्केट में लगातार उथल-पुथल के कारण हांगकांग के बाजारों में गिरावट आई है।
दिलचस्प बात यह है कि भारतीय इक्विटी बाजार 5 दिसंबर को 4 लाख करोड़ डॉलर से अधिक के आंकड़े पर पहुंच गए। यह दुनिया के पांचवें सबसे बड़े इक्विटी मार्केट के लिए एक अहम उपलब्धि है। इससे हांगकांग मार्केट के साथ गैप और कम हो गया है।
भारत के लिए संभावित उपलब्धि यह है कि अर्थव्यवस्था खुद को ग्लोबल इनवेस्टर्स और कंपनियों के लिए चीन के विकल्प के रूप में स्थापित कर रही है। हाल के दिनों में आईपीओ को शानदार सब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग पर बंपर मुनाफे के चलते भी इसमें उछाल आया है। इसके अलावा, 4 में से 3 राज्यों के चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की भारी जीत ने निवेशकों की 2024 के आम चुनावों में भी स्थिर सरकार बनाने की उम्मीद को मजबूत कर दिया है।
कई ग्लोबल ब्रोकरेज फर्मों ने दूसरी तिमाही की अच्छी कमाई के कारण भारत को 'ओवरवेट' रेटिंग में अपग्रेड कर दिया है। इनमें जेपी मॉर्गन, मॉर्गन स्टेनली, CLSA और नोमुरा शामिल हैं। CLSA ने कहा कि उसे उम्मीद है कि जीडीपी ग्रोथ के बीच भारत दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में एक बन जाएगी। अनुमान के मुताबिक भारत साल 2047 तक 29 ट्रिलियन डॉलर और 2052 तक 45 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बन जाएगी।
अनुमान है कि 2047 तक 29 ट्रिलियन डॉलर और 2052 तक 45 ट्रिलियन डॉलर होगी। "तब तक चीन और अमेरिका ही भारत से बड़ी अर्थव्यवस्थाएं होंगी।" ब्रोकरेज फर्म ने पहले के एक नोट में कहा था, "यदि बड़े सुधारों से कार्यकुशलता आती है, तो भारत 2052 तक आकार में अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आगे निकल सकता है।"
ब्रोकरेज फर्म ने पहले के नोट में कहा था, "तब तक चीन और अमेरिका ही भारत से बड़ी अर्थव्यवस्थाएं होंगी। अगर बड़े पैमाने पर सुधार होते हैं, तो भारत 2052 तक आकार में अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आगे निकल सकता है।"
दूसरी ओर, हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार लगभग 30 लोकल ब्रोकरेज ने इस साल हांगकांग में ऑफिस बंद कर दिए हैं। जेफरीज ग्रीड एंड फियर रिपोर्ट के अनुसार हांगकांग के आईपीओ 20 साल के निचले स्तर पर हैं। इस साल के पहले दस महीनों में आईपीओ द्वारा जुटाए गए फंड में सालाना 63 फीसदी की गिरावट आई है।
BSE का मार्केट कैप 5 साल में हुआ दोगुना से अधिक
BSE का मार्केट कैप 2023 में 3.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 343.5 लाख करोड़ रुपये हो गया। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के सीनियर इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट सिरम BKR ने कहा कि सेंसेक्स प्राइस इंडेक्स ने 5 दिसंबर 2023 को पहली बार 69,000 की उपलब्धि को पार कर लिया। सिरम ने कहा, "अप्रैल 2017 में इंडेक्स को 30,000 अंक तक पहुंचने में 31.3 साल लग गए। अगले 30,000 अंक अगले 4.4 सालों में जुड़ जाएंगे।"