आज यानी 6 अप्रैल को पांचवें सत्र के लिए भारतीय बाजारों में तेजी नजर आई। एक आश्चर्यजनक कदम उठाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने दरों को अपरिवर्तित रखा। आरबीआई द्वारा रेपो रेट को यथावत रखने से भारतीय शेयर बाजार में रौनक नजर आई। जिसके बाद बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में बढ़त के कारण सेंसेक्स और निफ्टी 0.39 प्रतिशत चढ़ गये। बजाज फाइनेंस 2.1 प्रतिशत, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और इंडसइंड बैंक प्रत्येक 1.8 प्रतिशत बढ़ गये। जबकि बजाज फिनसर्व 1.4 प्रतिशत चढ़ा। जेफरीज इंडिया द्वारा खरीदारी की रेटिंग बनाए रखने और टारगेट प्राइस में 22 प्रतिशत की वृद्धि करने के बाद एलएंडटी 1 प्रतिशत चढ़ गया।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने दरों को अपरिवर्तित रखा है। इसके साथ ही अपने महंगाई अनुमानों को घटाया है। आरबीआई ने अनुमान लगाया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) FY24 में औसतन 5.2 प्रतिशत रहेगा। जो कि 5.3 प्रतिशत के पहले के अनुमान से मामूली कम है। RBI ने अर्थव्यवस्था के लचीलेपन पर भी प्रकाश डाला। केंद्रीय बैंक ने अनुमान लगाया कि FY24 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा। जो कि 6.4 प्रतिशत के पहले के अनुमान से थोड़ा अधिक है।
सेंसेक्स और निफ्टी में पांचवें दिन रैली दिखाने वाले कारक
आरबीआई द्वारा रेट को यथावत रखना
आरबीआई ने अबकी बार रेपो रेट में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की है। जबकि स्ट्रीट को उम्मीद थी कि कम से कम 0.25 प्रतिशत की दर बढ़ोत्तरी अवश्य हो सकती है। ग्लोबल बैंकिंग सेक्टर में अनिश्चितता बढ़ने के बीच फिलहाल रेट का नहीं बढ़ने से भारतीय बाजारों में पॉजिटिव रिस्पॉनस् देखने को मिला है।
बैंकों द्वारा जारी मजबूत प्रोविजनल आंकड़े
हाल के प्रोविजनल आंकड़ों से पता चलता है कि प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के दौरान क्रेडिट और डिपॉजिट में मजबूत वृद्धि दर्ज की है। कुछ बैंकों ने इंडस्ट्री के एवरेज को पार कर लिया है। एचडीएफसी बैंक, इंडसइंड बैंक, यस बैंक, फेडरल बैंक और बंधन बैंक ने मार्च 2023 को समाप्त तिमाही के लिए अपने वित्तीय परिणामों से पहले प्रोविजनल बिजनेस आंकड़े जारी किये हैं। इन सभी बैंकों ने मार्च के आंकड़ों में 14 से लेकर 20 प्रतिशत की डिपॉजिट ग्रोथ दर्ज की है।
विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में दिख रही हालिया खरीदारी का कारण वैल्यूएशन में नरमी है। जेफरीज के अनुसार हाल के बाजार करेक्शन से उचित रूप से वैल्यूएशन पर्याप्त रूप से घटा है। इसके अलावा निफ्टी 100 में से 56 शेयर अब अपने 10 साल के ऐतिहासिक औसत से नीचे कारोबार कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त कुछ फाइनेंस, चुनिंदा ऑटो कंपनियों और फार्मास्युटिकल स्टॉक्स अपने ऐतिहासिक औसत से डिस्काउंट पर कारोबार कर रहे हैं। दूसरे कई स्टॉक्स भी डिस्काउंट पर कारोबार कर रहे हैं।
PMI में दिखा लगातार सुधार
इस बार 3 अप्रैल को जारी आंकड़ों के अनुसार भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने मार्च में अपनी वृद्धि की गति को बनाए रखा। एस एंड पी ग्लोबल परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) फरवरी के 55.3 से बढ़कर 56.4 हो गया। ये 50 से ऊपर की रीडिंग गतिविधि में विस्तार को दर्शाता है। जबकि 50 से नीचे का स्कोर संकुचन को दर्शाता है। यह लगातार 21वां महीना है जब भारत का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 50 से अधिक हो गया है। पिछले महीने जारी आंकड़ों के अनुसार फरवरी में सर्विसेस पीएमआई 12 साल के उच्चतम स्तर 59.4 पर पहुंच गया।