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भारतीय बाजारों ने तीन दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ा, शॉर्ट टर्म में बंपर कमाई के लिए इन दो शेयरों पर रहे नजर

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वी के विजयकुमार का कहना है कि US बॉन्ड यील्ड में थोड़ी कमी के कारण आज मार्केट का मूड बेहतर रहने की उम्मीद है। रुपये के नज़रिए से एक बड़ी अच्छी बात यह है कि कंसेशनल स्वैप सुविधा के तहत 136 अरब डॉलर की भारी रकम जुटाई गई है। FCNR(B) स्कीम के तहत जुटाए गए 127 अरब डॉलर की रकम अनुमान से कहीं ज़्यादा है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Sep 03, 2026 पर 10:43 AM
भारतीय बाजारों ने तीन दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ा, शॉर्ट टर्म में बंपर कमाई के लिए इन दो शेयरों पर रहे नजर
सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार का कहना है कि निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 23951-24013 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 24078-24121/24173 पर है

भारतीय बाजारों ने तीन दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया है। सुबह 10 बजे, सेंसेक्स 295.68 अंक या 0.39 प्रतिशत बढ़कर 76,866.03 पर और निफ्टी 86.50 अंक या 0.36 प्रतिशत बढ़कर 24,000.95 पर दिख रहा था। निफ्टी पर बढ़त बनाने वाले प्रमुख शेयरों में अडानी पोर्ट्स,पावर ग्रिड कॉर्प, एक्सिस बैंक, HDFC बैंक और SBI शामिल हैं। जबकि गिरावट वाले शेयरों में टेक महिंद्रा,नेस्ले,बजाज ऑटो,इंफोसिस और सिप्ला शामिल हैं। सेक्टर के हिसाब से देखें तो IT इंडेक्स 1% नीचे दिख रहा। जबकि बैंक,रियल्टी और मेटल इंडेक्स में 1-1% की बढ़त है। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स सपाट कारोबार कर रहा है,जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.7% ऊपर है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि US बॉन्ड यील्ड में थोड़ी कमी के कारण आज मार्केट का मूड बेहतर रहने की उम्मीद है। रुपये के नज़रिए से एक बड़ी अच्छी बात यह है कि कंसेशनल स्वैप सुविधा के तहत 136 अरब डॉलर की भारी रकम जुटाई गई है। FCNR(B) स्कीम के तहत जुटाए गए 127 अरब डॉलर की रकम अनुमान से कहीं ज़्यादा है। मार्केट के नज़रिए से इसका मतलब यह है कि रुपया स्थिर होगा,जिससे FIIs का भरोसा बढ़ेगा। ग्रोथ और कमाई की बेहतर संभावनाओं के कारण, US बॉन्ड यील्ड ज़्यादा होने के बावजूद FIIs के भारत में खरीदारी जारी रखने की उम्मीद है। साथ ही,बैंकों द्वारा भारी मात्रा में FCNR(B) फंड जुटाने से उनके NIMs को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। यह बैंकिंग स्टॉक्स के लिए अच्छी बात है।

कल बाज़ार में आई गिरावट की एक दिलचस्प बात यह है कि निफ़्टी में 141 अंकों की गिरावट के बावजूद इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने ₹9,500 करोड़ की खरीदारी की। इसमें FII की खरीदारी ₹6,688 करोड़ और DII की खरीदारी ₹2,812 करोड़ रही। साफ है कि ज़्यादातर बिकवाली रिटेल इन्वेस्टर्स,प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स और 'बेयर्स'(बाज़ार गिरने की उम्मीद करने वालों) की तरफ से हुई,जिन्होंने बाज़ार की कमज़ोरी का फ़ायदा उठाकर शेयरों की कीमतों को नीचे गिराया। आज इसमें बदलाव की संभावना है।

चॉइस ब्रोकिंग में टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर का कहना है कि वॉल स्ट्रीट के बढ़त के साथ बंद होने से ग्लोबल संकेत बेहतर हुए हैं। वहीं एशियाई बाज़ारों में राहत की रैली देखी जा रही है और US ट्रेज़री यील्ड में कमी आई है। हालांकि, US-ईरान के बीच तनाव और $95 के आस-पास कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय बाजारों के लिए बड़ जोखिम बनी हुई हैं।

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