Infosys सब्सिडी वाली जमीन लेती है लेकिन नौकरियां नहीं देती, कर्नाटक के विपक्षी नेता ने सदन में लगाया आरोप

Infosys कर्नाटक के विपक्ष के उपनेता अरविंद बेलाड ने आरोप लगाया कि कंपनी ने सरकार से सब्सिडी वाली जमीन तो खरीद ली, लेकिन पर्याप्त नौकरियां देने में नाकामयाब रही। विधानसभा सत्र के दौरान 24 दिसंबर को BJP नेता ने बेलाड ने कहा कि सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर ने बेंगलुरु, मैसूरु और मेंगलुरु में जमीन ली। लेकिन इसके बदले में नौकरियां नहीं मिलीं

अपडेटेड Dec 25, 2024 पर 11:34 AM
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अरविंद बेलाड ने 14 फरवरी, 2024 को भी सरकार से हुबली में Infosys को आवंटित 58 एकड़ जमीन को रद्द करने की मांग की गई थी क्योंकि यह रोजगार पैदा नहीं कर रही थी

कर्नाटक के विपक्ष के उपनेता अरविंद बेलाड (Karnataka's deputy leader of the opposition, Arvind Bellad) ने आरोप लगाया कि इंफोसिस (Infosys) ने सरकार से सब्सिडी वाली जमीन तो खरीद ली, लेकिन पर्याप्त नौकरियां पैदा नहीं कीं। 24 दिसंबर को, चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान, उन्होंने आईटी दिग्गज के खिलाफ कार्रवाई करने का आह्वान किया। भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party (BJP) नेता ने कहा कि सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर ने बेंगलुरु, मैसूरु और मेंगलुरु में जमीन ली। लेकिन इसके बदले में नौकरियां नहीं मिलीं।

इससे पहले बेलाड ने 14 फरवरी, 2024 को इसी तरह की टिप्पणी की थी। जिसमें सरकार से हुबली में इंफोसिस को आवंटित 58 एकड़ जमीन को रद्द करने की मांग की गई थी क्योंकि यह रोजगार पैदा करने में नाकामयाब रही थी।

उस समय, बेलाड ने कहा, "इन्फोसिस ने मेरे निर्वाचन क्षेत्र में एक इंडस्ट्रियल एस्टेट में 58 एकड़ जमीन ली, लेकिन एक भी नौकरी नहीं पैदा की। कंपनी केवल बागवानी और लैंडस्केपिंग में लगी रही।" वह इंडस्ट्रियल इस्टेब्लिशमेंट में स्थानीय रोजगार के अवसरों पर सदन में बोल रहे थे।


उन्होंने माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स (पूर्व में Twitter) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इंफोसिस को लगता है कि वह रियल एस्टेट कारोबार में है, आईटी में नहीं। “पूरे कर्नाटक में जमीन पर सब्सिडी दी गई लेकिन बदले में नौकरियाँ नहीं मिली? सरकार के लिए इस अधिनियम पर गौर करने का समय आ गया है! हम उन किसानों के कर्जदार हैं जिन्होंने अपनी जमीनें गंवा दीं!” हुबली-धारवाड़ (पश्चिम) के विधायक ने एक्स (X) पर लिखा।

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उन्होंने कहा कि सरकार ने "दर्द" झेलते हुए किसानों से जमीन खरीदी है और इसलिए उसे रियल एस्टेट उद्देश्यों के लिए बेंगलुरु में मुख्यालय वाली फर्म को अब जमीन नहीं देनी चाहिए।

इससे पहले 14 फरवरी को उन्होंने कहा था कि इंफोसिस को 35 लाख रुपये प्रति एकड़ की रियायती दर पर जमीन मिली। जबकि इसकी वास्तविक कीमत 1.5 करोड़ रुपये थी। "मैंने किसानों को इस आश्वासन के साथ अपनी जमीनें छोड़ने के लिए राजी किया था कि उनके बच्चों को नौकरी मिल जाएगी। अदालती मामले भी वापस ले लिए जाएंगे। इसलिए कंपनी पर कुछ जुर्माना लगाया जाना चाहिए।"

टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के आईटी-बीटी मंत्री प्रियांक खड़गे (Karnataka’s IT-BT Minister Priyank Kharge ) ने तब सुझाव दिया था कि ऐसे मामलों में इंसेंटिव वापस लिया जा सकता है।

दूसरी तरफ 24 दिसंबर को बाजार बंद होने के समय इंफोसिस का शेयर 0.79 प्रतिशत या 15.25 रुपये गिरकर 1909.05 रुपये के स्तर पर बंद हुआ।

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।)

 

 

 

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