Lollapalooza effect: शेयर बाजार पर है लोलापालूजा इफेक्ट, अब आखिर ये क्या बला है!

इस साल स्टॉक मार्केट में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जनवरी में निफ्टी (Nifty) 18,300 पहुंच गया था। मार्च की शुरुआत में यह 15,800 के स्तर पर आ गया। अब भी एक दिन बाजार चढ़ता है तो दूसरे दिन उतरता है

अपडेटेड Apr 22, 2022 पर 7:02 PM
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस माहौल में इनवेस्टर्स को बहुत एग्रेसिव नहीं होना चाहिए। अगर इनवेस्ट करना चाहते हैं तो वे मजबूत बुनियाद वाली कंपनियों के शेयरों में थोड़ा-थोड़ा निवेश कर सकते हैं।

इंडियन स्टॉक मार्केट में एक तिमाही में शायद ही कभी इतना उतार-चढ़ाव रहा होगा। इस साल जनवरी में निफ्टी (Nifty) 18,300 पहुंच गया था। मार्च की शुरुआत में यह 15,800 के स्तर पर आ गया। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि स्टॉक मार्केट पर लोलापालूजा इफेक्ट ((Lollapalooza Effect)) है। अंग्रेजी बिजनेस न्यूज वेबसाइट मिंट ने यह खबर दी है।

मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ के एमडी एवं सीईओ आशीष शंकर ने मिंट को बताया, "अभी मार्केट पर लोलापालूजा इफेक्ट दिख रहा है। ध्यान से देखें तो एक साथ कई फैक्टर मार्केट पर असर डाल रहे हैं। यूक्रेन में लड़ाई से कमोडिटी के प्राइसेज बढ़ गए हैं। इंटरेस्ट रेट में वृद्धि शुरू हो गई है। इसके चलते मार्केट में उतार-चढ़ाव बहुत ज्यादा है।"

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सबसे पहले यह समझ लेना जरूरी है कि लोलापालूजा इफेक्ट (Lollapalooza Effect) क्या है। बर्कशायर हैथवे के वाइस-चेयरमैन चार्ली मुंगेर ने यह टर्म दिया था। इसका मतलब यह है कि कई बार कई चीजें एक साल मिलकर इनसान के व्यवहार को निर्धारित करती हैं। इसके पॉजिटिव और निगेटिव दोनों तरह के नतीजे हो सकते हैं।

इसका मतलब हम यह निकाल सकते हैं कि पिछले तीन-चार महीनों में कुछ बड़ी घटनाएं हुई हैं, जो एक साल मिलकर बाजार पर असर डाल रही हैं। यूक्रेन क्राइसिस और दुनियाभर में इंटरेस्ट रेट में वृद्धि तो स्पष्ट हैं। ये दोनों ही चीजें मार्केट के लिए बहुत अहम हैं। रूस कमोडिटीज का बड़ा सप्लायर है। लड़ाई का असर कमोडिटीज की सप्लाई पर पड़ा है, जिससे उनकी कीमतें बढ़ गई हैं।

इंटरेस्ट रेट में वृद्धि का सीधा असर इकोनॉमी और इंडस्ट्री पर पड़ने वाला है। कोरोना की महामारी शुरू होने के बाद दुनियाभर में सरकारों ने इकोनॉमी को सपोर्ट देने के लिए इंट्रेस्ट रेट में कमी की थी। अब इकोनॉमी में रिकवरी है। इसलिए केंद्रीय बैंकों ने इंटरेस्ट रेट्स बढ़ाने के फैसले लिए हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जनवरी से अब तक भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद मार्केट बहुत ज्यादा नहीं गिरा है। हाल के अपने सबसे ऊंचे स्तर से निफ्टी 50 सिर्फ 5 फीसदी गिरा है। इससे पता चलता है कि मार्केट के फंडामेंटल्स अब भी मजबूत हैं। इसका मतलब है कि मध्यम से लंबी अवधि में मार्केट के लिए चिंता की कोई बात नहीं है। दरअसल, थोड़े और समय के लिए मार्केट में कंसॉलिडेशन जारी रहेगा।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस माहौल में इनवेस्टर्स को बहुत एग्रेसिव नहीं होना चाहिए। अगर इनवेस्ट करना चाहते हैं तो वे मजबूत बुनियाद वाली कंपनियों के शेयरों में थोड़ा-थोड़ा निवेश कर सकते हैं। शॉर्ट टर्म में मुनाफा कमाना अभी थोड़ा मुश्किल है। लेकिन, लॉन्ग टर्म में इनवेस्टमेंट के लिए ठीक है। मार्केट में हर गिरावट पर इनवेस्टर्स थोड़ी खरीदारी कर सकते हैं।

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