IT sell-off impact : प्रेस्टीज एस्टेट्स और दूसरे रियल एस्टेट शेयरों में 6% तक की गिरावट, रियल्टी इंडेक्स 4% नीचे

IT सेक्टर में हायरिंग में कटौती के डर से रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की डिमांड पर असर पड़ सकता है,जिससे रियल्टी शेयरों पर दबाव पड़ रहा है। इसके चलते प्रेस्टीज एस्टेट्स और दूसरे रियल एस्टेट शेयरों में 6 फीसदी तक की गिरावट आई है। रियल्टी इंडेक्स 4% नीचे कारोबार कर रहा है

अपडेटेड Feb 13, 2026 पर 12:49 PM
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IT Stocks : बजाज ब्रोकिंग रिसर्च ने कहा "जल्द ही US रेट कट की कम होती उम्मीदें और AI से संभावित परेशानियों को लेकर बढ़ती चिंताएं IT स्टॉक्स में बिकवाली को तेज़ कर रही हैं

IT sell-off impact : इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) स्टॉक्स में कमजोरी के साथ ही शुक्रवार को रियल एस्टेट कंपनियों के शेयर्स में भी गिरावट आई है। इसके चलते प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, DLF और गोदरेज प्रॉपर्टीज़ सबसे ज़्यादा टूटे हैं। आज के ट्रेडिंग सेशन के दौरान सेक्टोरल रियल्टी इंडेक्स में लगभग 4 परसेंट की गिरावट आई, जबकि कुछ चुनिंदा स्टॉक्स में 6 परसेंट तक की गिरावट आई। गुरुवार को यानी पिछले सेशन में भी इस इंडेक्स में 1.5 परसेंट तक की गिरावट आई थी। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में सिग्नेचरग्लोबल (इंडिया) को छोड़कर 10 में से 9 शेयर्स नुकसान में ट्रेड कर रहे हैं। सिग्नेचरग्लोबल लगभग 5 परसेंट तेजी के साथ कारोबार कर रहा है।

IT स्टॉक्स में आई तेज़ बिकवाली का पड़ा असर

रियल्टी शेयरों में यह बिकवाली इस हफ़्ते IT स्टॉक्स में आई तेज़ बिकवाली के बीच हुई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से चलने वाले ऑटोमेशन से होने वाली दिक्कतों की चिंताओं ने IT कंपनियों पर दबाव डाला है,जिससे यह सेक्टर मार्च 2020 के बाद (जब COVID-19 लॉकडाउन की घोषणाओं के बाद बाज़ारों में गिरावट आई थी) से अपने सबसे खराब प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है।


IT स्टॉक्स में कमज़ोरी ने इस सेक्टर में रोज़गार की संभावनाओं को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। IT वर्कफ़ोर्स शहरी घरों के लिए एक अहम खरीदार रहे हैं। ऐसे में हायरिंग में कमी या नौकरी जाने के डर से रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज़ की मांग पर असर पड़ सकता है,जिससे रियल्टी शेयरों पर दबाव आ सकता है।

IT इंडेक्स में इस हफ़्ते 11.4 परसेंट की गिरावट आई है और 2026 में अब तक यह 16.6 परसेंट नीचे आया है,जो पिछले पूरे साल में दर्ज 12.6 परसेंट की गिरावट से ज़्यादा है।

एनालिस्ट का कहना है कि AI रोज़ाना के काम में ऑटोमेशन को तेज़ कर सकता है और डिलीवरी टाइमलाइन को छोटा कर सकता है, जिससे भारत में IT फर्मों के ट्रेडिशनल हेडकाउंट-बेस्ड आउटसोर्सिंग मॉडल पर दबाव पड़ेगा। AI को अपनाने में तेजी आने से नई डील और रेवेन्यू ग्रोथ पर भी असर पड़ सकता है।

बजाज ब्रोकिंग रिसर्च ने कहा "जल्द ही US रेट कट की कम होती उम्मीदें और AI से संभावित परेशानियों को लेकर बढ़ती चिंताएं IT स्टॉक्स में बिकवाली को तेज़ कर रही हैं,जिससे मार्केट सेंटिमेंट खराब हो रहा है।"

SBI सिक्योरिटीज में फंडामेंटल रिसर्च के हेड सनी अग्रवाल ने कहा कि पिछले एक साल में मैक्रोइकॉनॉमिक चिंताओं, टैरिफ की अनिश्चितताओं, जियोपॉलिटिकल तनाव और कमज़ोर डिस्क्रिशनरी खर्च के कारण IT सेक्टर दबाव में रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि इन्वेस्टर्स को चिंता है कि AI टेक्नोलॉजी फंक्शनल एरिया में मुश्किल कामों को ऑटोमेट कर सकती हैं, जिससे ट्रेडिशनल IT सर्विसेज़ और आउटसोर्सिंग बिज़नेस मॉडल पर असर पड़ सकता है, जबकि AI-लेड स्टार्ट-अप्स से कॉम्पिटिशन भी मार्केट शेयर पर असर डाल सकता है।

 

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