IT Stocks: आप टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसे स्टॉक्स में फंसे हैं? जानिए बेचें, होल्ड करें या खरीदें

IT Stocks:11 फरवरी को माइक्रोसॉफ्ट का शेयर 2.2 फीसदी गिर गया। अल्फाबेट में 2.4 फीसदी गिरावट आई। एसएंडपी 500 सॉफ्पटवेयर इंडेक्स 2.6 फीसदी टूट गया। पिछले हफ्ते भी आईटी स्टॉ़क्स में बड़ी गिरावट आई थी। इसकी वजह अथ्रोपिक के नए एआई टूल्स थे। यह माना जा रहा है कि ये टूल्स ऐसे कई काम करने में सक्षम हैं, जो आईटी कंपनियां अभी करती हैं

अपडेटेड Feb 12, 2026 पर 1:59 PM
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आईटी शेयरों में लगातार गिरावट से यह संकेत मिलता है कि सॉफ्टेवयर कंपनियों के भविष्य को लेकर मार्केट में डर है।

IT Stocks: आईटी शेयरों की पिटाई 12 फरवरी को भी जारी रही। इससे आईटी इंडेक्स 5 फीसदी क्रैश कर 33,495.35 प्वाइंट्स पर आ गया। कोफोर्ज के शेयर में सबसे ज्यादा 6 फीसदी गिरावट आई। यह बीते चार महीने का शेयर का सबसे कम प्राइस है। इंफोसिस, टीसीएस, एलटीआई माइंडट्री, विप्रो के शेयर 5 फीसदी तक क्रैश कर गए।

अमेरिका में आईटी शेयरों पर जॉब रिपोर्ट का असर

अमेरिका में आई जॉब रिपोर्ट का असर आईटी शेयरों पर पड़ा। 11 फरवरी को अमेरिका में भी सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई थी। दरअसल, जनवरी में अमेरिका में नौकरियां उम्मीद से ज्यादा बढ़ी हैं। इससे बेरोजगारी दर गिरकर 4.3 फीसदी पर आ गई। इससे लेबर मार्केट में स्टैबिलिटी का संकेत मिलता है। इसका मतलब है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व फिलहाल इंटरेस्ट रेट को अपरिवर्तित रख सकता है।


11 फरवरी को अमेरिकी सॉफ्टवेयर शेयरों में बड़ी गिरावट

जॉब रिपोर्ट आने के बाद 11 फरवरी को माइक्रोसॉफ्ट का शेयर 2.2 फीसदी गिर गया। अल्फाबेट में 2.4 फीसदी गिरावट आई। एसएंडपी 500 सॉफ्पटवेयर इंडेक्स 2.6 फीसदी टूट गया। पिछले हफ्ते भी आईटी स्टॉ़क्स में बड़ी गिरावट आई थी। इसकी वजह अथ्रोपिक के नए एआई टूल्स थे। यह माना जा रहा है कि ये टूल्स ऐसे कई काम करने में सक्षम हैं, जो आईटी कंपनियां अभी करती हैं। इसका मतलब है कि आगे आईटी कंपनियों के रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है।

आईटी कंपनियों के भविष्य को लेकर निवेशकों में डर

आईटी शेयरों में लगातार गिरावट से यह संकेत मिलता है कि सॉफ्टेवयर कंपनियों के भविष्य को लेकर मार्केट में डर है। इनवेस्टर्स का यह मानना है कि AI अब इंजीनियर्स की जगह लेने को तैयार है। खासकर भारतीय आईटी कंपनियों में ऐसा हो सकता है। हालांकि, Multify के सीओओ दर्शन राठौड़ ने कहा, "मेरा मानना है कि आईटी शेयरों को लेकर इनवेस्टर्स की प्रतिक्रिया तर्क की जगह भावना पर आधारित है।"

फंडामेंटल्स खराब नहीं, गिरावट की वजह इमोशनल

प्लसकैश के फाउंडर और सीईओ प्रणव कुमार ने कहा कि 12 फरवरी को आईटी शेयरों में करेक्शन की वजह फंडामेंटल कमजोरी नहीं बल्कि सेंटिमेंटल है। एडवान्स्ड एआई प्लेटफॉर्म्स का असर आईटी कंपनियों की ट्रेडिशनल सर्विसेज पर पड़ने का डर है। उन्होंने कहा कि इस वजह से आईटी शेयरों खासकर लार्जकैप आईटी स्टॉक्स में बिकवाली हो रही है।

आईटी कंपनियों के बिजनेस मॉडल्स में आ सकता है बदलाव

राठौड़ ने कहा, "यह सही है कि AI टूल्स आज कोड लिख सकते हैं, बग्स को ठीक कर सकते हैं और पहले के मुकाबले तेजी से सिस्टम तैयार कर सकते हैं। इस वजह से इनवेस्टर्स को ऐसा लग रहा है कि आगे आईटी कंपनियों को ज्यादा इंजीनियर्स की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर एंप्लॉयीज की जरूरत कम रह जाती है तो कॉस्ट स्ट्रक्चर बदलेगा। कॉस्ट स्ट्रक्चर में बदलाव का असर सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों की वैल्यूएशन पर दिखेगा। लेकिन, हमें डर और सच्चाई के बीच फर्क करना पड़ेगा।"

AI काफी ताकतवर, लेकिन इनसान की जगह नहीं ले सकता

उन्होंने कहा कि AI काफी पावरफुल है, लेकिन यह मुख्य रूप से प्रोडक्टिविटी टूल है। यह इंजीनियर्स को तेजी से और ज्यादा प्रभावी तरीके से काम करने में मदद करता है। इसकी वजह से इंजीनियर्स को एक ही काम को बार-बार नहीं करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इससे सॉफ्टवेयर कंपनियों के मार्जिन में इम्प्रूवमेंट आ सकता है। उनका मानना है कि एआई जिम्मेदारी नहीं ले सकता।

आईटी सर्विस इंडस्ट्री का अंत नहीं होने जा रहा

उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी कंपनियां कॉम्प्लेक्स, पुराने और ज्यादा कस्टमाइज्ड सिस्टम पर काम करती हैं। इन सिस्टम्स को मानवीय फैसलों, बिजनेस की समझ और अकाउंटिबिलिटी की जरूरत पड़ती है। अगर कोई बड़ी गड़बड़ हो जाती है तो एल्गोरिद्म को कानूनी रूप से जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि आईटी सर्विस इंडस्ट्री का अंत होने नहीं जा रहा है। जब कोई चीज सस्ती और ज्यादा सक्षम हो जाती है तो उसकी डिमांड बढ़ जाती है।

फिलहाल आईटी शेयरों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह

बोनांजा में टेक्निकल एनालिस्ट डी विठलानी ने कहा कि निवेशकों को शॉर्ट टर्म में आईटी शेयरों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। जब तक आईटी इंडेक्स अहम रेसिस्टेंस लेवल को पार करने के बाद फिर से स्ट्रेंथ हासिल नहीं कर लेता तब तक इनवेस्टर्स 'सेल-ऑन-राइज' स्ट्रेटेजी यानी तेजी आने पर बिकवाली की रणनीति का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विप्रो और टेक महिंद्रा जैसे शेयर अहम सपोर्ट लेवल से नीचे चल रहे हैं, जो कमजोर मोमेंटम का संकेत है।

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रिकवरी की स्थिति में बिकवाली का दबाव दिख सकता है

उन्होंने कहा कि आईटी सेक्टर में RSI ओवरसोल्ड टेरीटरी में है, जो टेक्निकल बाउंस का संकेत है। हालांकि, व्यापक ट्रेंड निगेटिव है। इंडेक्स के रेसिस्टेंस लेवल की तरफ बढ़ने पर बिकवाली का दबाव दिख सकता है। इसलिए फिलहाल निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत है।

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फिलहाल इनवेस्टर्स 'सेल-ऑन-राइज' की स्ट्रेटेजी अपना सकते हैं

करेंट लेवल पर फ्रेश शॉर्ट पोजीशन में तब तक रिस्क-रिवॉर्ड सीमित रह सकता है, जब तक निफ्टी आईटी इंडेक्स का 33,000 का लेवल टूट नहीं जाता। ऐसा होने पर यह 32,000 की तरफ बढ़ सकता है। इसके उलट अगर इंडेक्स 35,500-36,500 की तरफ बढ़ता है तो इसे तब तक 'सेल-ऑन-राइज' मौके के रूप में देखा जाएगा जब तक इंडेक्स फिर से 37,500-38,000 की रेंज को हासिल नहीं कर लेता।

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