जियो टेलीकॉम (Jio Telecom) और रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) जैसे रिलायंस के सीधे कस्टमर से जुड़ाव वाले बिजनेसों में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (Jio Financial Services) एक और बेशकीमती इजाफा होगा। रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर, मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने 28 अगस्त को कंपनी की सालाना जनरल मीटिंग (AGM) के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (JFS) ग्राहकों और मर्चेंट्स दोनों के लिए अपने पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा। साथ ही ब्लॉकचेन-आधारित प्लेटफॉर्म और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) जैसी नए फीचर्स के इस्तेमाल की भी संभावनाएं तलाशेगा।
अंबानी ने कहा, "JFS का डिजिटल आधारित आर्किटेक्चर इसे लाखों भारतीयों तक पहुंचने के लिए एक बेजोड़ शुरुआत देगा। यह एक काफी पूंजी निवेश वाला बिजनेस है और इसने JFS को एक बेहतरीन, वर्ल्ड क्लास फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी बनने और तेजी से ग्रोथ हासिल करने के लिए एक मजबूत पूंजी आधार मुहैया कराया है।"
उन्होंने कहा कि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की नेटवर्थ 1.2 करोड़ रुपये है और यह दुनिया में सबसे अधिक पूंजी के साथ शुरुआत करने वाली फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों में से एक है।
जियो फाइनेंशियल सर्विजेस के शेयरों में 21 अगस्त को सूचीबद्ध होने के बाद भले ही लगातार 4 दिनों तक करीब 5 प्रतिशत की गिरावट आई थी, लेकिन आगे कंपनी का गिरावट का जोखिम सीमित है। ऐसा इसलिए क्योंकि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज में 6.1 फीसदी हिस्सेदारी है, जो इसकी अधिकतर वैल्यू को सपोर्ट करता है।
कंपनी की लिस्टिंग 1.66 लाख करोड़ रुपये के वैल्यूएशन पर हुई थी, जो इसे देश की तीसरी सबसे बड़ी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) बनाती है। यह इंडसइंड जैसे कई मिड-साइज के बैंकों से अधिक वैल्यूएशन है। JFS से अधिक बस बजाज ग्रुप की 2 दो कंपनियों- बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व की मार्केट वैल्यू है।
ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली ने JFS के बिजनेस प्लान पर जो रिपोर्ट जारी की थी, उसके मुताबिक कंपनी आगे चलकर पेमेंट गेटवे, यूपीआई पेमेंट, प्वाइंट ऑफ सेल (PoS), कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन, इंश्योरेंस ब्रोकिंग, पेमेंट बैंकिंग और इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स जैसे सेगमेंट में मौजूद फिनटेक स्टार्टअप्स से मुकाबला कर सकती है। इनमें से प्रत्येक सेगमेंट में कई अरब डॉलर के वैल्यूएशन वाली कई कंपनियां है।
ब्रोकरेज ने कहा कि फाइनेंशियल सेवाओं के व्यापक दायरे में JFS की महत्वाकांक्षा बाकी फर्मों के लिए बड़ा खतरा हो सकती है क्योंकि इसके पूंजी की कोई खास दिक्कत नहीं है। साथ ही RIL के पास नए बिजनेसों को बड़े पैमाने पर स्थापित करने की क्षमता है। रिटेल और टेलीकॉम बिजनेस में इसने ऐसा करके दिखाया भी है।
इस बीच फिनटेक स्टार्टअप्स ने फिलहाल जियो फाइनेंशियल के लिए 'देखो और इंतजार करो' की रणनीति अपनाई हुई है। उनका मानना है कि JFS के आने से इंडस्ट्री में कॉम्पिटीशन तेज होगा, लेकिन यह उनके लिए नए दरवाजे भी खोल सकता है।
जियो के शेयरहोल्डिंग पैटर्न को आप नीचे दिए चार्ट में देख सकते हैं-
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।
डिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।