Reliance Jio Origin Story: ईशा अंबानी ने सुनाया जियो की शुरुआत का दिलचस्प किस्सा, वो घटना जिसने भारत में ला दी डिजिटल क्रांति

Jio Origin Story: अमेरिका में पढ़ाई के दौरान इंडिया आई ईशा अंबानी का एक सिंपल कॉलेज असाइनमेंट सबमिट नहीं हो पाया था। इंटरनेट के उस एक झटके ने जन्म दिया भारत की सबसे बड़ी डिजिटल क्रांति 'रिलायंस जियो' को। 2009 के उस 'असाइनमेंट मोमेंट' से लेकर 2026 के मेगा IPO तक, जानिए कैसे 29% सालाना रिटर्न देने वाले रिलायंस साम्राज्य ने भारत में इंटरनेट की तस्वीर बदल दी। जानिए ईशा अंबानी की जुबानी जियो की कहानी

अपडेटेड Oct 15, 2026 पर 4:12 PM
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'मुझे अपना एक कॉलेज असाइनमेंट ऑनलाइन सबमिट करना था, लेकिन इंटरनेट न चलने की वजह से मैं उसे जमा नहीं कर सकी'

Reliance Jio Origin Story: रिलायंस जियो के मेगा IPO के ऐतिहासिक ऐलान के बीच, ईशा अंबानी ने वह दिलचस्प किस्सा शेयर किया है कि कैसे एक छोटी सी इंटरनेट समस्या ने भारत के सबसे बड़े डिजिटल नेटवर्क 'रिलायंस जियो' को जन्म दिया। इसके साथ ही उन्होंने रिलायंस ग्रुप के बिजनेस फिलॉसफी, नेट-डेट फ्री बनने के सफर और अपने दादा धीरूभाई अंबानी के 50 साल पुराने सपने को याद किया।

2009 की वो एक घटना... और हुआ Reliance Jio का जन्म

ईशा अंबानी ने जियो की शुरुआत के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे एक असाइनमेंट सबमिट न हो पाने की वजह से देश में डिजिटल क्रांति का विचार उपजा। उन्होंने बताया, 'बात 2009-2010 की है। आकाश और मैं अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे और छुट्टियों में बॉम्बे वाले घर आए हुए थे। मुझे अपना एक कॉलेज असाइनमेंट ऑनलाइन सबमिट करना था, लेकिन इंटरनेट न चलने की वजह से मैं उसे जमा नहीं कर सकी।'


उन्होंने बताया कि, इसके बाद घर में इस बात पर लंबी चर्चा हुई कि आखिर भारत कनेक्टिविटी के मामले में पश्चिम के देशों से भारत क्यों पीछे है?

आकाश अंबानी का मानना था कि इसका एकमात्र समाधान भारत में एक मजबूत 'डिजिटल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म कंपनी' तैयार करना है। इसी सोच के साथ 2016 में जियो की नींव रखी गई, जो आज 2026 में देश का सबसे बड़ा डिजिटल नेटवर्क बन चुका है।

रिलायंस की सफलता के 3 मूल मंत्र: लॉन्ग-टर्म विजन, स्केल और एग्जीक्यूशन

ईशा अंबानी ने बताया कि रिलायंस में बिजनेस बनाने की फिलॉसफी तीन मुख्य स्तंभों पर टिकी है:

लॉन्ग-टर्म पर्सपेक्टिव: रिलायंस केवल आज या कल के लिए नहीं सोचता, बल्कि आने वाले दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर दांव लगाता है।

स्केल: कंपनी हमेशा उस स्तर का स्केल हासिल करने का लक्ष्य रखती है जो उस पूरे उद्योग की इकोनॉमिक्स को बुनियादी तौर पर बदल दे।

एग्जीक्यूशन: रिलायंस एक गहराई से तकनीकी कंपनी है। किसी भी प्रोजेक्ट को तय समय और सटीकता से पूरा करना कंपनी की आदत में शामिल है।

'फाइनेंशियल प्रूडेंस' और वादे पर खरे उतरने की मिसाल

अपने बयान में ईशा अंबानी ने रिलायंस की वित्तीय अनुशासन और शेयरधारकों के प्रति प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया, साल 2019 में मुकेश अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को 2021 तक 'नेट-डेट फ्री' बनाने का वादा किया था। 2020 में कोरोना महामारी और वैश्विक मंदी आने के बावजूद, कंपनी ने समय सीमा से 9 महीने पहले ही रिलायंस को कर्जमुक्त बना दिया'।

धीरूभाई अंबानी का 50 साल पुराना सपना और 29% एनुअलाइज्ड रिटर्न

रिलायंस इंडस्ट्रीज की ऐतिहासिक यात्रा को याद करते हुए ईशा अंबानी ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी को नमन किया। 1977 में धीरूभाई अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज का आईपीओ (IPO) लेकर आए थे, जिसे लगभग 50 साल पूरे हो चुके हैं। इन 50 वर्षों में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने शेयरधारकों को 29% का सालाना रिटर्न दिया है।

उन्होंने कहा, 'मेरे दादाजी के लिए रिलायंस सिर्फ एक कंपनी नहीं थी। रिलायंस एक वादा है कि हर भारतीय को भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनने, इसकी समृद्धि को साझा करने और एक बेहतर भविष्य पर विश्वास करने का अवसर मिलना चाहिए।'

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