Jio की दमदार लिस्टिंग से बदल गया बाजार का बादशाह! TATA को पछाड़कर रिलायंस बना देश का सबसे बड़ा बिजनेस ग्रुप

Jio Platforms Share Price: जियो प्लेटफॉर्म्स 1,119 रुपये के इश्यू प्राइस से 21% प्रीमियम पर 1,358 रुपये पर लिस्ट हुआ। इसके साथ रिलायंस ग्रुप का कुल मार्केट कैप 30.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया और उसने टाटा ग्रुप को पीछे छोड़कर देश के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप का ताज हासिल कर लिया

अपडेटेड Oct 28, 2026 पर 10:44 AM
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Jio की दमदार लिस्टिंग के साथ रिलायंस ग्रुप का कुल मार्केट कैप 30.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया.

जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के शेयर बाजार में उतरते ही देश के कॉरपोरेट जगत की रैंकिंग बदल गई है। अरबपति मुकेश अंबानी की अगुवाई वाला रिलायंस ग्रुप अब मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा बिजनेस ग्रुप बन गया है। ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट वैल्यू 30.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। इस छलांग के साथ रिलायंस ने टाटा ग्रुप को पीछे छोड़ दिया है, जो सालों से इस ताज का मालिक बना हुआ था।

1,358 रुपये पर लिस्टिंग

जिन निवेशकों को IPO में शेयर मिले थे, उनके लिए लिस्टिंग का दिन मुनाफे वाला रहा। जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर एक्सचेंज पर 1,358 रुपये के भाव पर लिस्ट हुआ। IPO में इसका इश्यू प्राइस 1,119 रुपये था। यानी लिस्टिंग पर ही शेयर ने 21% का प्रीमियम दे दिया।


इस भाव पर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 12.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। पहले ही दिन इतनी बड़ी वैल्यू के साथ जियो ने बाजार में जिस तरह एंट्री ली, वैसा नजारा बहुत कम देखने को मिलता है।

10 लाख करोड़ क्लब में एंट्री

लिस्टिंग के साथ ही जियो प्लेटफॉर्म्स उन चुनिंदा कंपनियों के एलीट क्लब में शामिल हो गई, जिनकी वैल्यू 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। 12.5 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ जियो अब सिर्फ अपनी पैरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) से पीछे है।

इसका मतलब यह हुआ कि देश की दो सबसे कीमती लिस्टेड कंपनियां अब एक ही ग्रुप की हैं। पहले नंबर पर RIL और दूसरे नंबर पर उसी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स।

इस बदलाव ने टेलीकॉम सेक्टर की रैंकिंग भी उलट-पुलट कर दी है। RIL के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स देश की दूसरी सबसे कीमती लिस्टेड कंपनी बनकर उभरी है और इसके चलते उसकी टक्कर की कंपनी भारती एयरटेल तीसरे नंबर पर खिसक गई है।

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FY2026 में कैसा रहा जियो का कारोबार

इतनी ऊंची वैल्यू के पीछे कंपनी के कारोबार का बड़ा आकार और मोटा मुनाफा है। मार्च 2026 में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में जियो प्लेटफॉर्म्स ने 1.5 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू पर 30,049 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया। कंपनी का EBITDA मार्जिन 52% रहा।

आसान भाषा में समझें तो कंपनी के ऑपरेशन से होने वाली हर 100 रुपये की कमाई में से 52 रुपये ब्याज, टैक्स और डेप्रिसिएशन से पहले बच जाते हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि जियो का डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार सिर्फ बड़ा ही नहीं, बल्कि जमकर कमाई करने वाला भी है।

दो के कंधों पर ग्रुप का वजन

रिलायंस ग्रुप का कुल मार्केट कैप अब 11 लिस्टेड कंपनियों में बंटा हुआ है। लेकिन इस पूरी वैल्यू का ज्यादातर बोझ दो ही कंपनियों के कंधों पर है।

ग्रुप की कुल वैल्यू में करीब 53% हिस्सा अकेले RIL का है। वहीं जियो प्लेटफॉर्म्स का योगदान 42% है। यानी इन दोनों को मिला दें तो ग्रुप की कुल वैल्यू का 95% हिस्सा इन्हीं के पास है और बाकी 9 कंपनियों के हिस्से में सिर्फ 5% बचता है। जियो की 42% हिस्सेदारी यह भी दिखाती है कि ग्रुप की मार्केट वैल्यू में डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार का वजन कितना बढ़ गया है।

RIL की हिस्सेदारी घटी, दिग्गज निवेशक जुड़े

IPO के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स में प्रमोटर की हिस्सेदारी में मामूली कमी भी आई है। पब्लिक ऑफर के बाद कंपनी में RIL की हिस्सेदारी 66.4% से घटकर 64.5% रह गई है।

बाकी शेयर पब्लिक निवेशकों के पास हैं। इनमें कई बड़े संस्थागत नाम भी शामिल हैं। लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC), कैपिटल ग्रुप का न्यू वर्ल्ड फंड, सिंगापुर सरकार और SBI फोकस्ड फंड जैसे दिग्गज निवेशक अब जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरहोल्डर हैं।

Jio IPO Listing Live Updates

टाटा ग्रुप दूसरे नंबर पर

ताज भले ही रिलायंस के सिर सज गया हो, लेकिन टाटा ग्रुप की ताकत को कम आंकना गलत होगा। कुल मार्केट कैप की रैंकिंग में दूसरे नंबर पर खिसकने के बावजूद टाटा ग्रुप एक बड़ी कॉरपोरेट ताकत बना हुआ है। IT और ऑटोमोबाइल से लेकर स्टील, ज्वेलरी और कंज्यूमर गुड्स तक, इस ग्रुप का कारोबार कई इंडस्ट्री में फैला है।

टाटा ग्रुप की सबसे मजबूत कड़ी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) है, जो एशिया की प्रमुख IT सर्विसेज एक्सपोर्टर है। ग्रुप की कुल मार्केट वैल्यू में करीब 37% हिस्सा अकेले TCS का है। इसके बाद टाइटन कंपनी आती है, जिसका योगदान करीब 16% है। टाटा स्टील की हिस्सेदारी करीब 9% है, जबकि ट्रेंट और टाटा मोटर्स, दोनों का योगदान 6% से थोड़ा ज्यादा है।

TCS आज भी ग्रुप के सबसे अहम कारोबारों में से एक है। मार्च 2026 में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में TCS का रेवेन्यू 30 अरब डॉलर से ज्यादा रहा।

दोनों ग्रुप की बनावट में एक बड़ा फर्क साफ नजर आता है। रिलायंस की वैल्यू का बड़ा हिस्सा दो कंपनियों में सिमटा है, जबकि टाटा ग्रुप की वैल्यू कई कंपनियों में ज्यादा फैली हुई है।

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दुनिया में सबसे ज्यादा अप्लाई किया गया IPO

जियो की यह शानदार लिस्टिंग उसके IPO को मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स का ही नतीजा है। इश्यू खुलने के सिर्फ 100 मिनट के अंदर पूरा सब्सक्राइब हो गया था। इस IPO को रिकॉर्ड 1.39 करोड़ आवेदन मिले, जिसके साथ यह दुनिया भर में सबसे ज्यादा अप्लाई किया गया IPO बन गया।

कुल मिलाकर यह इश्यू 22 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ। हर कैटेगरी में निवेशकों ने खुलकर पैसा लगाया। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स ने अपने लिए रिजर्व शेयरों से 71 गुना ज्यादा शेयरों के लिए बोली लगाई। अमीर नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का हिस्सा 14 गुना सब्सक्राइब हुआ। वहीं रिटेल निवेशकों और कर्मचारियों ने अपने-अपने हिस्से को करीब 3 गुना सब्सक्राइब किया।

इतनी भारी मांग दिखाती है कि बड़े संस्थान हों या आम निवेशक, सभी भारत के टेलीकॉम और डिजिटल इकोसिस्टम में हिस्सेदारी लेने को लेकर कितने उत्साहित हैं। रिलायंस ग्रुप के लिए भी यह लिस्टिंग एक अहम मोड़ है। अपनी फ्लैगशिप पैरेंट कंपनी के साथ अब ग्रुप के पास मार्केट कैप के लिहाज से एक और दिग्गज कंपनी खड़ी हो गई है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल Network18 ग्रुप का हिस्सा है। Network18 का कंट्रोल इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट के पास है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

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