दिग्गज वैश्विक ब्रोकरेज फर्म JP Morgan ने Nifty 50 के लिए अपना 27,000 का बेस-केस टारगेट बरकरार रखा है। ब्रोकरेज का कहना है कि FY27 की पहली तिमाही में भारतीय कंपनियों के नतीजों ने जून 2024 के बाद सबसे मजबूत कमाई दिखाई है। हालांकि बाजार के सभी शेयरों पर एक जैसी तेजी की उम्मीद नहीं है। उसकी नजर खास तौर पर घरेलू मांग से जुड़े सेक्टरों पर है।
तिमाही नतीजे क्या संकेत देते हैं
JP Morgan के मुताबिक, MSCI India कंपनियों का रेवेन्यू सालाना आधार पर 19% बढ़ा, जबकि PAT में 16% की बढ़ोतरी हुई। वहीं Nifty 50 कंपनियों का रेवेन्यू 20% और मुनाफा 12% बढ़ा। सबसे खास बात यह रही कि अनुमान से बेहतर नतीजे देने वाली कंपनियों की संख्या कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों से काफी ज्यादा रही।
ब्रोकरेज का मानना है कि घरेलू मांग भारतीय बाजार की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है। कंपनियों ने अपने मैनेजमेंट कमेंट्री में भी स्थानीय खपत, सरकारी कैपेक्स और निवेश गतिविधियों को प्रमुख सहारा बताया है। इसी वजह से JP Morgan पूरे बाजार की बजाय चुनिंदा घरेलू साइक्लिकल शेयरों पर ज्यादा सकारात्मक नजरिया रखता है।
इन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा भरोसा
JP Morgan के अनुसार बिजली, इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर से जुड़े कारोबार आने वाले वर्षों में बड़ा मौका बन सकते हैं। ब्रोकरेज ने Hitachi Energy, ABB और NTPC जैसी कंपनियों को इस थीम का प्रमुख लाभार्थी बताया है। उसका अनुमान है कि AI, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक वाहनों की वजह से भारत में पीक पावर डिमांड में करीब 30 गीगावॉट की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है।
इसके अलावा डिफेंस, कैपेक्स, ऑटो और कंज्यूमर स्टेपल्स सेक्टर में भी बेहतर संभावनाएं दिखाई गई हैं। वहीं ITC, Dr Reddy's, Cipla और IndiGo जैसी कुछ बड़ी कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन ने कुल मुनाफे के आंकड़ों पर दबाव डाला।
मिडकैप और स्मॉलकैप भी मजबूत
सिर्फ बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार ने भी दमदार प्रदर्शन किया। Nifty Midcap 100 (एनर्जी को छोड़कर) का PAT 42% बढ़ा, जबकि Nifty Smallcap 100 का मुनाफा 39% बढ़ा। इससे संकेत मिलता है कि कमाई का सुधार बाजार के कई हिस्सों में फैला हुआ है।
क्या हैं सबसे बड़े जोखिम?
JP Morgan ने चेतावनी दी है कि भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, टैरिफ, शिपिंग व्यवधान और मानसून जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। खासकर ग्रामीण मांग मानसून पर काफी हद तक निर्भर करेगी।
ब्रोकरेज ने Nifty के लिए 27,000 का बेस-केस, 30,000 का बुल-केस और 20,500 का बेयर-केस टारगेट रखा है। उसका मानना है कि अगर घरेलू कमाई मजबूत रही और सरकारी निवेश जारी रहा, तो भारतीय बाजार को आगे भी सपोर्ट मिलता रहेगा।
Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।