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हालिया गिरावट में लार्जकैप कंपनियों को लगा तगड़ा झटका, कुल मार्केट कैप में हिस्सेदारी घटकर 2017 के निचले लेवल पर आई

2017 में कंबाइंड मार्केट कैप में टॉप 10 कंपनीज़ की हिस्सेदारी 17.6% थी। टोटल कंबाइंड मार्केट कैप में ये हिस्सेदारी अब फिर से उसी लेवल पर आ गई है। बीते चार सालों में देखें तो इसका पीक 25% के आसपास था जो कि 2024 में 22% हुआ। 2025 में 21% और अब 2026 में वापस से 2017 के लेवल यानी 17.65% के आसपास आ गया है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Oct 13, 2026 पर 1:08 PM
हालिया गिरावट में लार्जकैप कंपनियों को लगा तगड़ा झटका, कुल मार्केट कैप में हिस्सेदारी घटकर 2017 के निचले लेवल पर आई
दिग्गजों की इस बेहाली की सबसे बड़ी वजह FPI की तरफ से हुई भारी बिकवाली रही है। इनकी तरफ से कुल 3 लाख करोड़ से ज्यादा की बिकवाली देखने को मिली है

पिछले कुछ समय से बाजार में जो गिरावट रही है उसमें लार्जकैप कंपनियों को ज्यादा झटका लगा है। कुल मार्केट कैप में टॉप 10 कंपनियों का हिस्सा 9 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। मार्केट हाई में कुल मार्केट कैप 5.7 लाख करोड़ डॉलर पर था जो अभी 4.9 लाख करोड़ डॉलर पर दिख रहा है। टॉप-10 शेयरों के संकट पर नजर डालें तो इनका मार्केट कैप 9 साल के निचले स्तरों पर है। इनका कुल मार्केट कैप घटकर 84.84 लाख करोड़ रुपए पर आ गया है। दिसंबर 2023 के बाद इनका मार्केट कैप सबसे निचले स्तर पर है। यह जनवरी 2017 के लेवल पर पहुंच गए हैं। टॉप-10 शेयरों की हिस्सेदारी रिलेटिव टर्म्स में करीब 29% फिसली है। टॉप 10 शेयरों का मार्केट कैप में हिस्सा 2017 में 17.60 फीसदी था जो अक्टूबर 2026 में 17.64 फीसदी पर आ गया।

2017 में कंबाइंड मार्केट कैप में टॉप 10 कंपनीज़ की हिस्सेदारी 17.6% थी। टोटल कंबाइंड मार्केट कैप में ये हिस्सेदारी अब फिर से उसी लेवल पर आ गई है। बीते चार सालों में देखें तो इसका पीक 25% के आसपास था जो कि 2024 में 22% हुआ। 2025 में 21% और अब 2026 में वापस से 2017 के लेवल यानी 17.65% के आसपास आ गया है। इस साल टॉप 10 शेयरों में जिस हिसाब से कमजोरी नजर आई है उसमें TCS आपको सबसे ऊपर दिखेगा। इसमें 32% की कमजोरी देखने को मिली है। इसी तरह HDFC Bank में 27% और Reliance Industries में 26% की कमजोरी नजर आई है। वहीं, भारतीय Airtel में 15% की कमजोरी देखने को मिली है। लेकिन दूसरी तरफ Kotak Mahindra Bank एक ऐसा स्टॉक है जहां पे 1% का पॉजिटिव रिटर्न इस साल देखने को मिला है। L&T में 11%, LIC में 7% और बजाज फाइनेंस में 3% की गिरावट आई है। वहीं,ICICI बैंक और SBI के रिटर्न फ्लैट रहे हैं।

दिग्गजों का हाल सबसे ज्यादा बेहाल क्यों?

दिग्गजों की इस बेहाली की सबसे बड़ी वजह FPI की तरफ से हुई भारी बिकवाली रही है। इनकी तरफ से कुल 3 लाख करोड़ से ज्यादा की बिकवाली देखने को मिली है। इस 3 लाख करोड़ के फिगर में 60 से 70% बिकवाली टॉप 10 शेयरों में रही है। जिसकी वजह से आपको इतना बड़ा मार्केट शेयर फॉल देखने को मिला है। रुपए की कमजोरी ने मार्केट सेंटीमेंट पर लगातार दबाव बनाए रखा है। एक और रीजन है जिसकी वजह से मार्केट शेयर शिफ्ट हुआ है। वह है स्मॉल एंड मिड कैप शेयरों की तरफ बाजार का बढ़ता रुझान। इसकी वजह से मार्केट कैप में स्माल कैप शेयरों की हिस्सेदारी 20.6% पर पहुंच गई है।

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