LIC Stake Sale OFS Details: देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के शेयरों में मंगलवार, 4 अगस्त को भारी बिकवाली देखने को मिली। सरकार द्वारा कंपनी में OFS के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किए जाने के बाद एलआईसी का शेयर 7 फीसदी तक गिरकर ₹397.80 के स्तर पर आ गया।
सरकार इस OFS के जरिए एलआईसी में अपनी 6.5 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचकर लगभग ₹31,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। इस बिक्री के लिए ₹382 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है, जो सोमवार के क्लोजिंग प्राइस से लगभग 10-11% डिस्काउंट पर है। इसी भारी डिस्काउंट और बाजार में नए शेयरों की सप्लाई बढ़ने की आशंका से शेयर पर दबाव देखने को मिल रहा है।
क्या है LIC OFS का स्ट्रक्चर?
DIPAM सचिव अरुणीश चावला के मुताबिक, इस OFS की रूपरेखा इस प्रकार है:
बेस ऑफर: सरकार पहले चरण में एलआईसी की 2.5% इक्विटी (इक्विटी शेयर पूंजी) की बिक्री कर रही है।
ग्रीनशू ऑप्शन: संस्थागत निवेशकों की ओर से मजबूत मांग रहने पर 4% अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने का भी विकल्प रखा गया है।
कुल हिस्सेदारी बिक्री: अगर ग्रीनशू ऑप्शन का पूरा इस्तेमाल होता है, तो सरकार कुल 6.5% हिस्सेदारी बाजार में बेचेगी।
कब और किसके लिए खुलेगा OFS?
ओएफएस को दो दिनों के विंडो में विभाजित किया गया है:
गैर-खुदरा निवेशक: संस्थागत निवेशकों और एचएनआई (HNI) के लिए यह इश्यू मंगलवार, 4 अगस्त को खुल चुका है।
खुदरा निवेशक: रिटेल इन्वेस्टर्स और पात्र कर्मचारी बुधवार, 5 अगस्त को इस ओएफएस में बोली लगा सकेंगे। रिटेल निवेशकों और कर्मचारियों को कट-ऑफ प्राइस पर ₹15 प्रति शेयर का अतिरिक्त डिस्काउंट भी मिलेगा।
सरकार क्यों बेच रही है हिस्सेदारी?
इस OFS का मुख्य उद्देश्य बाजार नियामक सेबी (SEBI) के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (MPS) नियमों का पालन करना है। मई 2022 में देश का सबसे बड़ा आईपीओ लाने के बाद से सरकार के पास एलआईसी की 96.5% हिस्सेदारी थी, जबकि जनता के पास केवल 3.5% शेयर थे। सेबी ने एलआईसी को अपनी सरकारी हिस्सेदारी घटाकर 90% करने के लिए मई 2027 तक का समय दिया है।
6.5% हिस्सेदारी बिकने के बाद सरकार की होल्डिंग घटकर 90% रह जाएगी, जिससे समय सीमा से काफी पहले ही सेबी के 10% न्यूनतम पब्लिक शेयर होल्डिंग वाले नियम के अनुकूल हो जाएगा।
निवेशकों पर क्या होगा इसका असर?
बाजार में फ्री-फ्लोट बढ़ने से शेयर की ट्रेडिंग लिक्विडिटी बेहतर होगी। पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ने से आगे चलकर एलआईसी के ग्लोबल व डोमेस्टिक पैसिव सूचकांकों में शामिल होने की संभावनाएं मजबूत होंगी।
फ्लोर प्राइस डिस्काउंट पर होने के कारण शॉर्ट टर्म में शेयर में उतार-चढ़ाव रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों और रिटेल खरीदारों के लिए डिस्काउंटेड प्राइस पर एंट्री का अवसर बन रहा है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।