मैक्वायरी ने कहा-अगर विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी AI में बनी रही तो भारतीय बाजार में 10% गिरावट आ सकती है

मैक्वायरी कैपिटल में मैनेजिंग डायरेक्टर और इक्विटी इंडिया के हेड संदीप भाटिया ने कहा कि जब तक ग्लोबल इनवेस्टर्स का फोकस एआई और सेमीकंडक्टर्स पर रहेगा, तब तक इंडिया में बिकवाली जारी रहेगी। अब तक घरेलू लिक्विडिटी ने बाजार को सहारा दिया है। सिप से होने वाला निवेश काफी काम आया है

अपडेटेड Jun 13, 2026 पर 6:26 PM
ग्लोबल इनवेस्टर्स की एआई और सेमीकंडक्टर्स जैसे स्टॉक्स में बढ़ती दिलचस्पी का भारत को नुकसान उठाना पड़ा है।

इंडियन मार्केट्स में आने वाले महीनों में बड़ी गिरावट आ सकती है। मैक्वायरी कैपिटल में मैनेजिंग डायरेक्टर और इक्विटी इंडिया के हेड संदीप भाटिया ने यह आशंका जताई है।  उनका कहना है कि अगर विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी अमेरिका और नॉर्थ एशिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर से जुड़ी कंपनियों में बनी रहती है तो भारतीय बाजार में करेक्शन आ सकता है।

इंडिया में एआई और सेमीकंडक्टर में निवेश के मौके नहीं

भाटिया ने कहा कि अगर घरेलू म्चूचुअल फंडों का निवेश सुस्त पड़ता है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है तो भारतीय बाजार में गिरावट आने की संभावना 50 फीसदी से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि अभी इंडिया के बारे में माना जा रहा है कि यहां एआई और सेमीकंडक्टर इनवेस्टमेंट साइकिल वाले स्टॉक्स नहीं हैं। इस वजह से कैपिटल दक्षिण कोरिया, ताइवान और अमेरिका की तरफ जा रहा है।


भारतीय बाजार में 10 फीसदी से ज्यादा करेक्शन आ सकता है

उन्होंने कहा कि जब तक ग्लोबल इनवेस्टर्स का फोकस एआई और सेमीकंडक्टर्स पर रहेगा, तब तक इंडिया में बिकवाली जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि अगर एआई शेयरों की अगुवाई वाली रैली सितंबर और अक्तूबर में जारी रहती है तो भारतीय बाजार में 10 फीसदी से ज्यादा करेक्शन आ सकता है। उनका यह भी कहना है कि अब तक घरेलू लिक्विडिटी ने बाजार को सहारा दिया है। सिप से होने वाला निवेश काफी काम आया है। लेकिन, अब इसमें कमी आ सकती है।

कई सेक्टर्स में दिख रहे निवेश के मौके

इंडियन मार्केट के आउटलुक को लेकर सावधानी भरे रुख के बावजूद उनका मानना है कि कई सेक्टर्स में अच्छे मौके दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैक्वायरी को एनर्जी सप्लाई चेन से जुड़े डेटा सेंटर में अच्छी ग्रोथ दिख रही है। इनमें सीजी पावर, एनटीपीसी और अदाणी एनर्जी जैसी कंपनियां शामिल हैं। कंज्यूमर स्पेस में उन्होंने नेस्ले इंडिया, इंडियन होटल्स और शैले होटल्स को अपनी पसंद बताया।

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नॉथ एशिया के मुकाबले भारत का खराब प्रदर्शन

ग्लोबल इनवेस्टर्स की एआई और सेमीकंडक्टर्स जैसे स्टॉक्स में बढ़ती दिलचस्पी का भारत को नुकसान उठाना पड़ा है। भारत में अभी निवेश के लिए ऐसी कंपनियां मौजूद नहीं हैं। इस वजह से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसे निकाल अमेरिका और नॉर्थ एशिया जैसे बाजारों में निवेश कर रहे हैं। इससे अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में बड़ी तेजी आई है, जबकि भारतीय बाजार में बड़ी कमजोरी दिखी है।

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