Market insight : GST कटौती से दूसरी तिमाही के नतीजों पर दबाव संभव, उपभोक्ता कुछ समय के लिए टाल सकते हैं बड़ी खरीदारी

Market insight : देविना मेहरा ने कहा कि मार्केट में जब भी कोई मूवमेंट होता है उसके लिए हम लोग कारण ढूंढ लेते हैं या कोई ना कोई बहाना ढूंढ लेते हैं। बेशक, जीएसटी में प्रस्तावित बदलाव से अभी शॉर्ट टर्म में इस तिमाही के नतीजों पर नेगेटिव असर ही पड़ेगा

अपडेटेड Aug 21, 2025 पर 2:08 PM
देविना मेहरा ने आगे कहा कि पहली तिमाही के नतीजों से कोई खास निराशा नहीं हुई है। अगर 1-2 साल के नजरिए से बात करें तो कुछ चीजें अच्छी हुई हैं

Market insight : वीकली एक्सपायरी के दिन निफ्टी ने तेजी का सिक्सर लगाया है। निफ्टी आज 70 अंक चढ़कर 25100 के पार कारोबार कर रहा है। बैंक निफ्टी में भी अच्छी तेजी है। मिडकैप और स्मॉलकैप भी हरे निशान में आने में कामयाब रहे हैं। आज रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी नजर आ रही है। रियल्टी इंडेक्स इंडेक्स करीब एक परसेंट मजबूती के साथ कारोबार कर रहा है। प्रेस्टीज एस्टेट और SOBHA 2-3% चढ़े हैं। साथ ही चुनिंदा NBFCs, तेल और गैस शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिल रही है। लेकिन IT और FMCG शेयरों में आज मुनाफावसूली हो रही है।

ऐसे में बाजार की आगे की दिशा पर बात करते हुए First Global की चेयरपर्सन और MD देविना मेहरा ने कहा कि मार्केट में जब भी कोई मूवमेंट होता है उसके लिए हम लोग कारण ढूंढ लेते हैं या कोई ना कोई बहाना ढूंढ लेते हैं। बेशक, जीएसटी में प्रस्तावित बदलाव से अभी शॉर्ट टर्म में इस तिमाही के नतीजों पर नेगेटिव असर ही पड़ेगा। जीएसटी कटौती को ध्यान में रख कर उपभोक्ता अपनी खरीदारी को कुछ दिन के लिए टाल सकते हैं। ऐसे में दूसरी तिमाही के नतीजों पर दबाव दिख सकता है।

देविना मेहरा के मुताबिक इस समय इंडेक्स से ज्यादा स्टॉक्स अहम लग रहे हैं। अगर इंडेक्सों पर नजर डालें तो इनमें 7-10 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, स्टॉक्स में इससे कहीं ज्यादा गिरावट आई है। अगर आप कोई भी समय सीमा लें तो आपको देखने को मिलेगा कि इंडेक्स का जितना मूव होता है उसमें लगभग 40-50 फीसदी स्टॉक आउटपरफॉर्म करते हैं और 50-60 फीसदी नीचे होते हैं। अभी केवल 10 फीसदी स्टॉक्स ने आउटपरफॉर्म किया है। इसका मतलब ये है कि 90 फीसदी स्टॉक्स 10 फीसदी से ज्यादा गिरे हैं। लगभग 62 फीसदी शेयर ऐसे हैं जो 30 फीसदी से ज्यादा गिरे हैं और 22 फीसदी शेयर ऐसे हैं जो 50 फीसदी से ज्यादा गिरे हैं। शायद इसी के कारण निवेशकों के पोर्टफोलियो में लाल निशान ज्यादा नजर आ रहा है। जबकि इंडेक्स लेवल पर कम गिरावट देखने को मिल रही है।


जीएसटी कट के कारण हो सकता है कि उपभोक्ताओं की खरीदारी पोस्टपोन हो और एक तिमाही के नतीजे अच्छे न आएं। लेकिन निवेशकों को उसके लिए तैयार रहना चाहिए। लंबे नजरिए से देखें तो जीएसटी कम होना और डिमांड का बढ़ना बाजार के लिए अच्छा साबित होगा।

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देविना मेहरा ने आगे कहा कि पहली तिमाही के नतीजों से कोई खास निराशा नहीं हुई है। अगर 1-2 साल के नजरिए से बात करें तो कुछ चीजें अच्छी हुई हैं। जीडीपी नंबर अच्छे आए हैं। वहीं, महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। इसके चलते आगे कंपनियों के रेवेन्यू और मार्जिन दोनों पर अच्छा असर देखने को मिलेगा।

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