Market Insight : मई की वायदा सीरीज के दिन बाजार में दबाव देखने को मिल रहा है। क्रूड में उछाल और रुपये की कमजोरी से निफ्टी करीब 80 अंक गिरा है। बैंक निफ्टी में भी 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल रही है। हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप में मजबूती कायम है। कंज्यूमर ड्यूरेबल शेयरों में आज सबसे ज्यादा दबाव है। निफ्टी का कंज्यूमर ड्यूरेबल इंडेक्स करीब एक फीसदी फिसला है। साथ ही सरकारी बैंक,रियल्टी और NBFCs में हल्का दबाव है। वहीं मेटल IT और कैपिटल गुड्स में खरीदारी आई है। ऐसे में कमाई वाले सेक्टर्स और शेयर्स पर चर्चा करते हुए मार्केट एक्सपर्ट सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि मार्केट सेंटीमेंट में मूल रूप से कोई शिफ्ट नहीं हुआ है।
इस ग्लोबल वोलेटाइल सेटअप के बीच में कल एक टेंपरेरी सी रिलीफ मिली थी। हमें बाजार में थोड़ा-थोड़ा करके अच्छे स्टक्स में खरीदारी करनी चाहिए। वेस्ट एशिया कॉन्फ्लिक्ट के चलते बाजार में अच्छा खासा करेक्शन हो गया है। उन्होंने अपने पसंदीदा शेयरों पर बात करते हुए कहा कि लार्सन एंड ट्युब्रो का शेयर उनको पहले भी अच्छा लगता था। यह शेयर अब भी अच्छा लग रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में आए संकट के चलते इस शेयर में गिरावट आई है, इस गिरावट में उन्होंने इस शेयर में थोड़ा- थोड़ा निवेश बढ़ाया है। कंपनी के लगभग 40% कॉन्ट्रैक्ट वेस्ट एशिया में हैं। इसकी वजह से ही इस शेयर में भारी गिरावट आई है। लेकिन पश्चिम एशिया का संकट निश्चित ही खत्म होगा। यह संकट खत्म होने पर कंपनी के वेस्ट एशियाई कारोबार में और तेजी आएगी। ऐसे में इस समय-समय इस शेयर में गिरावट में थोड़ा-थोड़ा खरीदारी करने की सलाह होगी।
दूसरी तिमाही के अंत से मार्केट में दिखेगा पिकअप
बाजार पर बात करते हुए सुदीप बंद्योपाध्याय ने आगे कहा कि एफआई की बिकवाली के चलते बाजार और रुपए पर अतिरिक्त दबाव बना है। इसके साथ ही मानसून कमजोर रहने की बात भी कही जा रही है। एफआईआई के नजरिए से दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में हमारा बाजार अभी भी महंगा है। इसके अलावा एफआईआई को भारत में लगने वाले टैक्स से भी दिक्कत है। इसके अलावा चौथी तिमाही के नतीजों से भी ग्रोथ लौटने के संकेत नहीं मिले हैं। इस माहौल में पहली और दूसरी तिमाही से तो हमें उम्मीद नहीं ही करनी चाहिए। अगर लक्षण ठीक हो जाते हैं, ट्रेंड अच्छा होता है तो दूसरी तिमाही के अंत से मार्केट में पिकअप देखने को मिल सकता है। उससे पहले तो एफआईआई की खरीदारी लौटने की उम्मीद नहीं दिख रही है।
पीएसयू बैंक शेयरों का लॉन्ग और मीडियम टर्म आउटलुक बहुत पॉजिटिव
पीएसयू बैंक शेयरों पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि इस सेक्टर पर उनका लॉन्ग और मीडियम टर्म नजरिया बहुत पॉजिटिव है। हालांकि शॉर्ट टर्म में थोड़ी दिक्कत हो सकती है। इसके दो मुख्य कारण है। इसकी पहली वजह यह कि पश्चिम एशिया संकट से इकोनॉमी पर दबाव है। इसके चलते क्रेडिट डिमांड में कमी होने की उम्मीद है। इसके साथ ही बैंकों के एसेट क्वालिटी में भी थोड़ा बहुत प्रॉब्लम आ सकता है। लेकिन ये दिक्कत बहुत ही शॉर्ट टर्म की दिक्कत है। 1-2 तिमाही में ये समस्याएं सुलझ जाएंगी। इसके अलावा आरबीआई ने एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस के लिए जो नए प्रोविजनिंग नॉर्म्स लागू किए हैं, उनके भी पीएसयू बैंकों को झटका लग सकता है। इन सब वजहों सो 1-2 तिमाही पीएसयू बैंकों पर दबाव रह सकता है। अगर आप लंबी अवधि के नजरिए से लेना चाहते हैं तो एसबीआई में थोड़ा-थोड़ा करके खरीदारी करें।
हड़बड़ी में बड़ा निवेश करने से बचें
इसके अलावा लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) भी सुदीप बंद्योपाध्याय को अच्छा लग रहा है। कंपनी के नतीजे अच्छे रहे हैं। उनका मानना है कि ये शेयर अब तेजी के लिए तैयार है और इसमें 1 साल में 100 रुपए तक का स्तर देखने को मिल रहा है। लेकिन एकमुश्त बड़ा निवेश न करते हुए थोड़ा-थोड़ निवेश करें। इस समय हड़बड़ी में बड़ा निवेश न करें। मार्केट वोलेटाइल है,करेक्शन कहीं भी आ सकता है। पर लेना जरूर चालू करिए।
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