Market outlook : पश्चिम एशिया संकट गहराने से बाजार में हाहाकार, जानिए 20 मार्च को कैसी रह सकती है इसकी चाल
Market outlook : वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की भावना और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते बेंचमार्क इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज़्यादा गिर गए। मार्केट ब्रेथ बेहद कमज़ोर रही। 999 शेयरों में बढ़त दिखी, वहीं 3,072 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई
Market cues : Nifty 500 इंडेक्स अपने सितंबर 2024 के शिखर से 10 प्रतिशत से थोड़ा ज़्यादा नीचे गिर गया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब 100-हफ़्ते का मूविंग एवरेज इतना ज़्यादा टूटा और उसके बाद भी कोई रिकवरी नहीं हुई है
Market outlook : पश्चिम एशिया संकट गहराने से बाजार में हाहाकार मच गया है। आज सेंसेक्स-निफ्टी भारी गिरावट के साथ बंद हुए है। मिडकैप, स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली है। BSE के सभी सेक्टर इंडेक्स में बिकवाली हुई है। ऑटो और रियल्टी इंडेक्स सबसे ज्यादा गिरे हैं। ऑटो इंडेक्स 4% से ज्यादा फिसला है। मेटल, IT और बैंकिंग शेयरों में भी दबाव देखने को मिला है।
निफ्टी 776 प्वाइंट गिरकर 23,002 पर बंद हुआ है। वहीं, सेंसेक्स 2497 प्वाइंट गिरकर 74,207 पर बंद हुआ है। बैंक निफ्टी 1875 प्वाइंट गिरकर 53,451 पर बंद हुआ है। मिडकैप 1798 प्वाइंट गिरकर 54,492 पर बंद हुआ है। निफ्टी के 50 में से 49 शेयरों में गिरावट रही। सेंसेक्स के सभी 30 शेयरों में गिरावट देखने को मिली। बैंक निफ्टी के सभी 14 शेयरों में बिकवाली रही।
वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की भावना और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते बेंचमार्क इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज़्यादा गिर गए। मार्केट ब्रेथ बेहद कमज़ोर रही। 999 शेयरों में बढ़त दिखी, वहीं 3,072 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बाज़ार में उतार-चढ़ाव काफ़ी ज़्यादा रहा और India VIX 21 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ गया। ऑटो शेयरों की सबसे ज़्यादा गिरावट रही, जो 4 प्रतिशत से ज़्यादा गिरे। वहीं बैंकिंग, IT, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल इंडेक्स में भी 3-4 प्रतिशत की गिरावट आई।
जियोजित के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट, VK विजयकुमार ने कहा कि इज़राइल ने ईरान में दुनिया की सबसे बड़ी LNG रिफाइनरी पर हमला किया है। इससे युद्ध को लेकर बनी अनिश्चितता और भी बढ़ गई है। अगर ब्रेंट लंबे समय तक $110 से ऊपर बना रहता है, तो इसका भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक्स पर बुरा असर पड़ेगा। FY27 में भारत की GDP ग्रोथ और कॉर्पोरेट अर्निंग पर भी इसका असर पड़ेगा।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ़ मार्केट स्ट्रेटेजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा कि लगभग 900 अंकों की तीन दिन की तेज़ बढ़त के बाद, 10-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज के पास थकावट के संकेत दिखे हैं। उन्होंने आगे कहा कि 23,111 के नीचे जाने से और कमज़ोरी आ सकती है। जबकि मज़बूती दिखाने के लिए किसी भी रिकवरी को 23,450 के ऊपर बने रहना होगा।
वेल्थ मिल्स सिक्योरिटीज में इक्विटी स्ट्रेटेजी की डायरेक्टर, क्रांति बैथानी ने कहा कि बेयर फेज़ छोटे लेकिन ज़्यादा तेज़ हो गए हैं, जबकि बुल मार्केट की अवधि बढ़ गई है। उन्होंने आगे कहा कि बाज़ार अभी बेयर फेज़ के "बिल्कुल करीब" हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में उनके एक दायरे में ही रहने की ज़्यादा संभावना है। जब तक निफ्टी 25,000 से नीचे रहेगा, तब तक बाज़ार का मूड कमज़ोर रहने की संभावना है।
दूसरे एनालिस्ट्स का कहना है कि बाज़ार की अंदरूनी कमज़ोरी ज्यादा चिंताजनक है। बाजार की मार्केट ब्रेथ काफी खराब है। Wealth Co के मैनेजिंग पार्टनर और मार्केट स्ट्रैटेजी हेड अक्षय चिंचालकर का कहना है कि Nifty 500 इंडेक्स अपने सितंबर 2024 के शिखर से 10 प्रतिशत से थोड़ा ज़्यादा नीचे गिर गया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब 100-हफ़्ते का मूविंग एवरेज इतना ज़्यादा टूटा और उसके बाद भी कोई रिकवरी नहीं हुई है।
इसके पहले के करेक्शन में (जिनमें जून 2022, अप्रैल 2023 और अप्रैल 2025 शामिल हैं) इसी तरह की गिरावट आने पर निवेशकों ने तुरंत खरीदारी शुरू कर दी थी। इस बार वैसी ही रिकवरी का न होना यह संकेत देता है कि बाज़ार का माहौल ज़्यादा सतर्कता भरा है।
मार्केट ब्रेथ के इंडीकेटर भी इसी बात की पुष्टि करते हैं। 50, 100 और 200 डे के मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड करने वाले शेयरों का अनुपात अभी तक उस 5 प्रतिशत से 15 प्रतिशत के 'कैपिटुलेशन' (पूरी तरह से हार मान लेने) के स्तर तक नहीं पहुंचा है, जो आमतौर पर बाज़ार के मज़बूत निचले स्तरों (durable bottoms) पर देखा जाता है।
चिंचालकर ने चेतावनी के लहजे में कहा कि हालांकि 21,000 के आस-पास के हालिया निचले स्तर अभी टिके हुए हैं, लेकिन अगर ये स्तर टूटते हैं तो बाज़ार में बिकवाली का एक और दौर शुरू हो सकता है। ऐसा तब तक होगा जब तक कि भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं हो जाता। हालांकि चिंचालकर को निकट भविष्य में ऐसा होने की संभावना कम ही लगती है।
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